बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 18 नवंबर
फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है—
इस बार किसी उपलब्धि को लेकर नहीं, बल्कि कथित आर्थिक अनियमितताओं और फर्जी मान्यता के दावों को लेकर। यूनिवर्सिटी के संस्थापक और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है।
मंगलवार को हुई घंटों लंबी छापेमारी के बाद ED ने उन्हें PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत हिरासत में लिया और मेडिकल जांच के बाद दिल्ली की साकेत कोर्ट में पेश किया।19 ठिकानों पर छापेमारी, 48 लाख कैश और शेल कंपनियों के सबूत बरामद
ED की यह कार्रवाई बिल्कुल फिल्मी अंदाज में सुबह से शुरू हुई। दिल्ली-एनसीआर में फैले 19 लोकेशनों पर एक साथ छापेमारी हुई—
यूनिवर्सिटी परिसर से लेकर ट्रस्ट और उससे जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों के आवास तक।इस दौरान जो बरामद हुआ, उसने जांच एजेंसियों को चौंका दिया—
48 लाख रुपये से अधिक नकदी डिजिटल डिवाइस महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेजऔर सबसे अहम—
कई शेल कंपनियों के सबूत
सूत्रों के मुताबिक, ED को ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो बताते हैं कि कथित अपराध से कमाए गए पैसों को घुमाने, छिपाने और वैध दिखाने के लिए जटिल लेयरिंग की गई थी।गिरफ्तारी क्यों हुई?
ED का आरोप—ग्रुप के असली नियंत्रणकर्ता खुद जावेद सिद्दीकीED का दावा है कि भले ही ट्रस्ट में कई नाम जुड़े हों, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों का असली नियंत्रण जावेद सिद्दीकी के हाथों में ही रहा।जांच में यह भी सामने आया कि:अवैध रूप से अर्जित धन को कई माध्यमों से घुमाया गया ट्रस्ट और संस्थाओं में फर्जी खर्चों और लेनदेन का उपयोग किया गया शेर कंपनियों के ज़रिये पैसे को वैध रूप देने की कोशिश की गई इन तथ्यों की पुष्टि के बाद ED ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया।
फर्जी मान्यता का खेल! UGC की रिपोर्ट से खुली पोलइस मनी लॉन्ड्रिंग जांच की जड़ दो FIR हैं, जिन्हें दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया था।
FIR में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि:अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने NAAC मान्यता होने का झूठा दावा कियाऔर UGC के सेक्शन 12(B)—जो फंडिंग और अकादमिक मानकों से जुड़ा महत्वपूर्ण सेक्शन है—
के तहत मान्यता प्राप्त होने की फर्जी जानकारी दी UGC ने स्पष्ट किया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी केवल सेक्शन 2(f) के तहत एक स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी है और उसने कभी भी 12(B) के लिए आवेदन तक नहीं किया।यानी कथित तौर पर मान्यता की हवा भरकर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया गया।
अल-फलाह ट्रस्ट: विस्तार तेज़, लेकिन वित्तीय क्षमता संदिग्ध1995 में स्थापित Al-Falah Charitable Trust की शुरुआत से ही जावेद सिद्दीकी एक प्रमुख ट्रस्टी रहे।
30 वर्षों में: यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज इंजीनियरिंग कॉलेज मैनेजमेंट और पैरामेडिकल संस्थान जैसी कई इकाइयाँ तेजी से खड़ी कर दी गईं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह विस्तार ट्रस्ट की घोषित वित्तीय क्षमता से मेल नहीं खाता, जिससे फंडिंग के स्रोतों और फर्जी कंपनियों के दुरुपयोग पर संदेह और गहरा गया।
अब आगे क्या?
साकेत कोर्ट में ED ने सिद्दीकी की कस्टडी रिमांड की मांग की है, ताकि पैसों की लेयरिंग, फर्जी कंपनियों के नेटवर्क और गलत मान्यता संबंधी पूरे रैकेट को खंगाला जा सके।
यह मामला सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रह सकता
—क्योंकि आरोपी को मिली सत्ता, संपर्क और वित्तीय नियंत्रण की पकड़ ने इसे एक बड़े शिक्षा-घोटाले का रूप दे दिया है।
