आरक्षण 50% से ऊपर गया तो चुनाव पर रोक! सुप्रीम कोर्ट का महाराष्ट्र सरकार को कड़ा अल्टीमेटम—“अदालत की शक्तियों का इम्तिहान न लें”

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/महाराष्ट्र, 18 नवंबर

स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण की सीमा को पार करने पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आरक्षण 50 प्रतिशत से ऊपर गया तो चुनाव पर रोक लगाने में अदालत एक क्षण भी नहीं लगाएगी। यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब मंगलवार से नामांकन पत्रों की जांच शुरू होने वाली है और राज्य चुनाव प्रक्रिया पूरे उफान पर है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बगची की बेंच ने स्पष्ट किया—“

हम 50% सीमा पर कोई समझौता नहीं करेंगे। इस अदालत की शक्तियों की परीक्षा न लें। जरूरत पड़ी तो हम पूरे चुनाव शेड्यूल पर ही रोक लगा देंगे।”OBC आरक्षण 50% से ऊपर?

—याचिकाकर्ताओं ने उठाया बड़ा सवाल सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र के कई स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण जोड़ने से कुल आरक्षण सीमा 50% से ऊपर चली गई है।

कुछ निकायों में यह सीमा 70% तक पहुंच गई, जो कि सुप्रीम कोर्ट के 6 मई 2023 के आदेश का सीधा उल्लंघन है।

सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र हुड्डा ने कहा कि:40% से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में आरक्षण 50% सीमा से पार हैकई स्थानों पर SC-ST-OBC को जोड़कर आरक्षण अनुपात लगभग 70% तक पहुंच गया यह न सिर्फ अदालत की गाइडलाइन के विपरीत है बल्कि चुनावी समानता के सिद्धांत को भी ध्वस्त करता है कोर्ट

की दो टूक — “

जब बांठिया आयोग लागू नहीं, तो पुराने नियम मानने होंगे”बेंच ने कहा कि चूंकि राज्य सरकार ने जे. के. बांठिया आयोग की 27% OBC आरक्षण वाली सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं किया है, इसलिए चुनाव जुलाई 2010 से पहले लागू ढांचे के अनुसार ही कराए जाएंगे।

अदालत ने साफ किया:“

संविधान पीठ द्वारा निर्धारित 50% सीमा को पार करना संभव नहीं है। दो जजों की बेंच बैठकर हम यह सीमा तोड़ नहीं सकते।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील और आगे की सुनवाई राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समय की मांग की, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 19 नवंबर तय की। हालांकि, अदालत ने सरकार को आरक्षण सीमा का पालन करने का स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा—“

50 प्रतिशत से ऊपर जाने की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो।”“नामांकन शुरू हो गया है” तर्क पर नाराज़ हुई पीठ जब राज्य पक्ष ने तर्क रखा कि नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, इसलिए चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप उचित नहीं होगा, तो सुप्रीम कोर्ट नाराज़ हो गया और कहा—“

यदि यह तर्क है कि नामांकन शुरू हो गया है इसलिए अदालत चुप बैठ जाए, तो हम चुनाव ही रोक देंगे।”

यह बयान अदालत के स्वर और नाराज़गी की गंभीरता दर्शाता है।

आरक्षण 70% तक पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

अदालत ने उन याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है जिनमें आरोप है कि कुछ निकाय क्षेत्रों में आरक्षण 70% तक पहुंच गया है, जो लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के मूल ढांचे का उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव—समयरेखा पर भी मंडराया संशयभले ही चुनाव का कार्यक्रम जारी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से अब चुनाव आयोग और राज्य सरकार की चिंताएँ बढ़ गई हैं।

चुनाव कार्यक्रम:नामांकन अंतिम तिथि: 17 नवंबर

नामांकन जांच: 18 नवंबर नामांकन

वापसी: 21 नवंबर

चिह्न आवंटन व अंतिम सूची: 26 नवंबर

मतदान: 2 दिसंबर

मतगणना: 3 दिसंबर

246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों में होने वाले निकाय चुनावों पर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई का सीधा असर पड़ सकता है।

क्या आगे चुनाव टल सकते हैं?—राजनीतिक हलकों में हलचल

कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि अदालत की कड़ी चेतावनी संकेत देती है कि यदि राज्य सरकार आरक्षण सीमा की समीक्षा नहीं करती, तो पूरा चुनाव कार्यक्रम खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

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