बी के झा
NSK

पटना / न ई दिल्ली, 20 नवंबर
बिहार की राजनीति इन दिनों फिर गरमा गई है। केंद्र सरकार के पूर्व मंत्री, पूर्व IAS अधिकारी और आरा से चार बार के सांसद रहे राज कुमार सिंह (RK Singh) एक बार फिर अपने तीखे तेवर और विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सिंह अपने विरोधियों पर तीखी भाषा में हमला बोलते नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने न सिर्फ चेतावनी दी बल्कि अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “हम पर उंगली उठाएगा तो दोनों आंख में उंगली घुसेड़ देंगे…
थोड़ा सा भी इधर-उधर किया तो नंगा करके रख देंगे।”वीडियो में आर.के. सिंह स्पष्ट शब्दों में कहते हैं,हम शुरू से अलग किस्म के आदमी हैं। कोई डराने की कोशिश न करे… अगर शांत हैं तो हमें शांत रहने दें। कार्रवाई करके दिखाएं तो बताएं कि हम क्या कर सकते हैं। मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी।”यह बयान ऐसे समय आया है जब सिंह बीजेपी से छह साल के लिए निलंबित किए जाने के बाद पार्टी छोड़ने का एलान कर चुके हैं।
पार्टी ने उन पर “विरोधी गतिविधियों” का आरोप लगाया था।IAS से गृह सचिव, फिर मंत्री—लंबा सफर, लेकिन 2024 ने बदल दी सियासत
आर.के. सिंह का करियर बेहद प्रभावशाली रहा है—1975 बैच के IAS,भारत सरकार के गृह सचिव,2014 से 2024 तक लगातार MP,ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री,कौशल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री।लेकिन 2024 की लोकसभा चुनाव में आरा सीट से उनकी अप्रत्याशित हार ने उनके राजनीतिक समीकरण बदल दिए। उन्होंने अपनी हार के लिए भाजपा और एनडीए के कई नेताओं पर भीतरघात का आरोप लगाया था। इसी दौरान पवन सिंह विवाद भी चर्चा में रहा, जिसके कारण उनकी हार की बात कही गई।
सियासी पृष्ठभूमि:
लालू शासन के समय आडवाणी की गिरफ्तारी से लेकर आज तक सिंह अपने करियर के दौरान कई बार कठोर फैसलों और सीधी बात के लिए जाने जाते रहे हैं।लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्होंने समस्तीपुर में आडवाणी की रथयात्रा रोकी, उन्हें गिरफ्तार किया और बंगाल सीमा पर महान जोड़ डैम के गेस्ट हाउस में रखा गया—
यह कदम उनकी ‘निडर कार्यशैली’ का प्रतीक माना जाता है।
BJP का पलटवार: “मानसिक चिकित्सक से मिलें”आर.के. सिंह के बयान के बाद BJP भी पीछे नहीं रही। पार्टी के वरिष्ठ नेता निशिकांत दुबे ने तीखा पलटवार करते हुए कहा—
पार्टी से निकाले जाने के बाद आर.के. सिंह बौखला गए हैं। उन्हें पहले किसी मानसिक चिकित्सक से मिलना चाहिए। अनाप-शनाप बयान वही देता है जो असंतुलित हो चुका हो।”दुबे ने कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है और किसी भी नेता को धमकी भरी भाषा की इजाजत नहीं दी जा सकती।
राजनीतिक संदेश साफ—आर.के. सिंह बैकफुट पर नहीं, आक्रमण मोड में बीजेपी
से निलंबन और इस्तीफे के बाद भी आर.के. सिंह टकराव वाली शैली में दिख रहे हैं।उनके बयान न सिर्फ राजनीतिक गर्मी बढ़ा रहे हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि वह अपनी आलोचनाओं या आरोपों को लेकर अब किसी भी तरह की संयमित भाषा का इस्तेमाल नहीं करने वाले।
अब सवाल यह है कि—क्या आर.के. सिंह अकेले राजनीतिक मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं?या यह आक्रामक तेवर किसी नए सियासी गठजोड़ की भूमिका है?
क्या BJP आगे और कड़े कदम उठाएगी?
आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में यह मामला एक बड़ी बहस और कई नए समीकरण तय कर सकता है।
