बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ इस्लामाबाद, 26 दिसंबर
पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे जटिल आंतरिक सुरक्षा संकटों में से एक से गुजर रहा है। एक तरफ बलोचिस्तान में उग्रवादियों ने पाकिस्तानी रेलवे जैसी रणनीतिक जीवनरेखा को ठप कर दिया है, तो दूसरी ओर अब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ऐसा एलान कर दिया है, जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक खतरे की घंटियां तेज कर दी हैं।टीटीपी ने 2026 के लिए अपने नए संगठनात्मक ढांचे की घोषणा करते हुए “एयर फोर्स यूनिट” बनाने की बात कही है।
यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक दुःस्वप्न की शुरुआत हो सकती है।राजनीतिक और रक्षा विशेषज्ञ इसे महज़ शोर नहीं, बल्कि बदलते युद्ध के स्वरूप का संकेत मान रहे हैं।पाकिस्तान चारों ओर से घिरता हुआराजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आज पाकिस्तान की स्थिति अभूतपूर्व है—बलोचिस्तान में अलगाववादी हिंसा खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी का बढ़ता आतंकअफगानिस्तान के साथ रिश्तों में तनावऔर ऊपर से आर्थिक बदहाली
एक वरिष्ठ रणनीतिक विश्लेषक कहते हैं,“यह पहली बार है जब पाकिस्तान को बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक मोर्चों पर एक साथ कई युद्ध लड़ने पड़ रहे हैं। और सबसे खतरनाक बात यह है कि ये युद्ध असममित (asymmetric) हैं।”टीटीपी का नया दांव: इस्लामाबाद की ओर बढ़ता खतरा न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीटीपी का यह नया संगठनात्मक ढांचा सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है। इसमें क्षेत्रवार कमांड लड़ाकों ने की नई तैनाती और हमलों की रणनीतिक प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से दर्ज की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि “एयर फोर्स” का जिक्र दरअसल इस बात का संकेत है कि टीटीपी अब जमीन से आसमान तक लड़ाई ले जाना चाहता है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं,“यह इस्लामाबाद की तरफ बढ़ने का प्रतीकात्मक और रणनीतिक एलान है। संदेश साफ है—अब सिर्फ चौकियों पर नहीं, दिल पर वार होगा।”ड्रोन युग में ‘एयर फोर्स’ का मतलब क्या है?
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आज एयर फोर्स का मतलब पारंपरिक फाइटर जेट नहीं होता।आज का युद्ध ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और रॉकेट-ड्रोन से लड़ा जा रहा है।एक वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं,“15–20 साल पहले यह बयान हंसी में उड़ाया जा सकता था। लेकिन आज ड्रोन टेक्नोलॉजी इतनी सस्ती और सुलभ हो चुकी है कि गैर-राज्य तत्व भी वायु-आधारित हमले कर सकते हैं।”
अगर टीटीपी को—उन्नत ड्रोनसैटेलाइट-आधारित नेविगेशन रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम मिल जाते हैं, तो पाकिस्तानी सेना और पुलिस के ठिकाने, काफिले और यहां तक कि शहरी लक्ष्य भी खतरे में आ सकते हैं।
इतिहास की चेतावनी: LTTE की परछाईंअब तक दुनिया में केवल एक उग्रवादी संगठन ऐसा रहा है, जिसने अपनी जमीनी सेना, नौसेना और एयर विंग बनाई थी—श्रीलंका का LTTE (लिट्टे)।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है,“LTTE की एयर विंग छोटी थी, लेकिन उसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव बहुत बड़ा था। उसने साबित किया कि गैर-राज्य संगठन भी आसमान से हमला कर सकते हैं।”टीटीपी अगर उसी मॉडल के 10–20% तक भी पहुंच गया, तो पाकिस्तान के लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा आपदा होगी।
अफगानिस्तान फैक्टर:
जड़ वहीं हैअफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से ही टीटीपी का हौसला बढ़ा है।नवंबर 2022 में संघर्षविराम खत्म होने के बाद—पुलिससैन्य ठिकाने प्रशासनिक अधिकारी लगातार निशाने पर हैं।पाकिस्तान टीटीपी को “फितना अल-खवारिज” कहकर प्रतिबंधित संगठन घोषित करता है और उसके ठिकानों पर अफगानिस्तान में हमले करता है।
वहीं काबुल का दावा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंक के लिए नहीं होने देता।राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं,“असल समस्या यह है कि पाकिस्तान ने जिन ताकतों को दशकों तक पाला, वही अब उसके लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई हैं।”
क्या टीटीपी सच में एयर फोर्स बना पाएगा?साफ शब्दों में—आसान नहीं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं।रक्षा विशेषज्ञों का आकलन है कि पूर्ण सैन्य एयर फोर्स बनाना टीटीपी के बस की बात नहीं लेकिन सीमित ड्रोन-विंग बनाना पूरी तरह संभव हालांकि,“पाकिस्तानी सेना से सीधी टक्कर में टीटीपी टिक नहीं पाएगा, लेकिन वह अस्थिरता, डर और मनोवैज्ञानिक दबाव पैदा करने में सफल हो सकता है।”और आधुनिक आतंकवाद में यही सबसे खतरनाक हथियार होता है।
निष्कर्ष:
पाकिस्तान अपने ही बनाए जाल में फंसा टीटीपी का यह एलान सिर्फ एक संगठनात्मक घोषणा नहीं, बल्कि पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीतियों का आईना है।आज आसिम मुनीर के सामने चुनौती सिर्फ आतंकवाद की नहीं, बल्कि राज्य की साख, नियंत्रण और अस्तित्व की है।
अगर टीटीपी ने सचमुच आसमान की ओर कदम बढ़ा, तो यह पाकिस्तान के लिए सिर्फ सुरक्षा संकट नहीं, बल्कि रणनीतिक अपमान भी होगा।जिस आग को पड़ोस में जलाकर फायदा उठाया गया, वही आग अब घर की छत तक पहुंचने को तैयार है।
