बी के झा
नई दिल्ली , 11 दिसंबर
भारत की कूटनीति एक बार फिर वैश्विक मंच पर केंद्रित है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री एंतोनियो तायानी के हाथों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक निमंत्रण भेजा है। पीएम मोदी ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए कहा— “मैं इटली जरूर आऊंगा।”यह घोषणा न केवल भारत–इटली संबंधों में नया जोश भरती है, बल्कि 2026 को दोनों देशों की साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष के रूप में स्थापित करती है।
तायानी–मोदी मुलाकात: रणनीतिक विश्वास की नई ऊँचाईदिल्ली पहुंचकर इटली के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री एंतोनियो तायानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की।बैठक को तायानी ने “बेहद सकारात्मक और रचनात्मक” बताया। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई—
IMEC कॉरिडोर (India–Middle East–Europe) पर ठोस बातचीतभारत, यूरोप और खाड़ी देशों को जोड़ने वाला यह मेगा कॉरिडोर सामरिक दृष्टि से एशिया–यूरोप साझेदारी की रीढ़ साबित होगा।इटली ने भारत के नेतृत्व और दृष्टि का पूर्ण समर्थन जताया।
औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारीइटली ने रक्षा उत्पादन, मशीनरी, ऑटोमोबाइल और ग्रीन एनर्जी में भारत के साथ निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई।दोनों देश हाई–टेक सेक्टर में संयुक्त परियोजनाओं पर भी काम करेंगे।
वैश्विक शांति पर भारत की भूमिकारूस–यूक्रेन युद्ध पर तायानी ने साफ कहा—“रूस को किसी समझौते की दिशा में लाने में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।”यह भारत की बढ़ती वैश्विक विश्वसनीयता और मध्यस्थ क्षमता का प्रमाण है।
2026: कूटनीतिक कैलेंडर का विशेष वर्षतायानी ने पुष्टि की कि—“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2026 में इटली की यात्रा करेंगे।”यह यात्रा—भारत–इटली रणनीतिक साझेदारीI
MEC का क्रियान्वयनऔद्योगिक और सुरक्षा सहयोग—इन सभी क्षेत्रों में निर्णायक बदलाव लाएगी।इटली यह भी संकेत दे चुका है कि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भी 2026 में भारत आएंगी, जिससे द्विपक्षीय मुलाकातों की श्रृंखला दोनों देशों के संबंधों को नई गहराई देगी।
वैश्विक मंच पर भारत–इटली: एक उभरती साझेदारी विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और इटली की साझेदारी तीन मोर्चों पर अत्यंत महत्वपूर्ण है—
1. Indo-Pacific में यूरोप का भरोसेमंद साझेदार भारतइटली समझता है कि भारत के बिना इंडो–पैसिफिक में यूरोप की कोई भी रणनीति अधूरी है।
2. रक्षा एवं टेक्नोलॉजी सहयोगदोनों देश अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों, साइबर सुरक्षा और AI तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर सहमत हैं।
3. भू–राजनीतिक स्थिरता में भारत की भूमिका रूस–यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया की जटिल परिस्थितियों तक, भारत को एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा भेजा गया यह न्योता केवल एक ‘कूटनीतिक औपचारिकता’ नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, सम्मान और सामरिक गहराई का प्रतीक है।2026 की यात्रा भारत–इटली संबंधों को एक नए युग में प्रवेश कराएगी—जहाँ सहयोग सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी निर्णायक होगा।
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