एसआईआर पर सियासी भूचाल : अभिषेक बनर्जी का बड़ा हमला, चेतावनी—‘एक भी नाम हटाया तो दिल्ली घेरेंगे लाख लोग’

बी के झा

कोलकाता / नई दिल्ली, 29 अक्टूबर

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मंगलवार को सियासी संग्राम छिड़ गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस प्रक्रिया को “Silent Invisible Rigging” करार देते हुए भाजपा और चुनाव आयोग दोनों पर तीखा प्रहार किया।

बनर्जी ने कहा कि यह कवायद मतदाताओं को सूची से बाहर कर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने की साजिश है।‘यह जोड़ने की नहीं, हटाने की प्रक्रिया है’

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि एसआईआर का आदेश केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ने दिया है और चुनाव आयोग उसकी “सहयोगी इकाई” बन गया है।

उन्होंने कहा,यह प्रक्रिया नाम जोड़ने की नहीं, बल्कि निकालने की है। डेढ़ साल पहले ही लोकसभा चुनाव हुए थे, अगर मतदाता सूची में इतनी गड़बड़ी है, तो लोकसभा भंग कर नए चुनाव कराइए।

‘बांग्लादेश-रोहिंग्या’ तर्क पर भी उठाए सवालबनर्जी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि अगर बांग्लादेशी घुसपैठ या रोहिंग्या का खतरा कारण है, तो फिर केवल पश्चिम बंगाल में ही एसआईआर क्यों?उन्होंने तंज कसा,पूर्वोत्तर के पांच राज्य भी बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा से लगे हैं,

लेकिन एसआईआर सिर्फ बंगाल में क्यों? यह स्पष्ट करता है कि मंशा मतदाताओं को डराने और वोटों का ध्रुवीकरण करने की है।

सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल

टीएमसी नेता ने चुनाव आयोग की तय समयसीमा को अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि 2002 में बंगाल में एसआईआर दो वर्षों में पूरा हुआ था, अब इसे एक-दो महीने में निपटाने की बात कही जा रही है —

यह कैसे संभव है?

स्पष्ट है कि चुनाव आयोग राज्य प्रशासन पर नियंत्रण चाहता है ताकि 2026 के चुनाव से पहले बंगाल सरकार के कामकाज में बाधा डाली जा सके।

‘एनआरसी के डर से हुई मौत,

जिम्मेदार अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त’अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार सुबह बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर 24 परगना के पनिहाटी में एक व्यक्ति प्रदीप कर की मौत एनआरसी और एसआईआर की दहशत से हुई।उन्होंने कहा,प्रदीप कर के सुसाइड नोट में एनआरसी और एसआईआर को लेकर चिंता दर्ज है।

उनकी मौत के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।”‘एक भी नाम हटाया गया तो दिल्ली में प्रदर्शन’बनर्जी ने चेतावनी दी कि अगर एक भी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया, तो बंगाल के एक लाख लोग दिल्ली पहुंचकर चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरना देंगे।”

उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की यह कवायद तृणमूल को कमजोर नहीं कर पाएगी, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटें और बढ़ेंगी।

भाजपा का पलटवार :

“एसआईआर से दीदी घबराई हैं”दूसरी ओर, भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी एसआईआर से इसलिए बौखलाई हुई हैं क्योंकि इससे उनके “पोषित अवैध घुसपैठियों” का पर्दाफाश हो जाएगा।

उन्होंने कहा,एसआईआर के बाद रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बंगाल की धरती से बाहर फेंक दिया जाएगा। इसलिए दीदी और उनके नेता चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं।

घुसपैठियों को अब देश से निकालकर ही दम लेंगे, चाहे विपक्ष जितना भी शोर मचाए।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

मतदाता सूची का यह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग द्वारा देशभर में घोषित किया गया है।

लेकिन पश्चिम बंगाल में इसे लेकर सबसे तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

राज्य की सत्ता में काबिज टीएमसी इसे “लोकतंत्र पर हमला” बता रही है, जबकि भाजपा इसे “मतदाता सूची की शुद्धि” कह रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा सियासी युद्धक्षेत्र बनने जा रहा है।

NSK

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