ऑपरेशन ‘सिंदूर’ पर राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: “हम और कर सकते थे, पर भारत ने चुना संयम—यही हमारी ताकत है

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 7 दिसंबर

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को ऑपरेशन सिंदूर पर ऐसा वक्तव्य दिया जिसने भारत की सैन्य नीति, राजनीतिक संदेश और कूटनीतिक संतुलन—तीनों पर नई बहस छेड़ दी है। पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ढांचों पर लक्षित अभियान चलाया था। इस अभियान में भारत ने निर्णायक प्रहार किए, लेकिन Singh ने उनके “संयम” को विशेष रूप से रेखांकित किया।उन्होंने कहा—

“हम चाहते तो और भी बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन हमारे बलों ने संयम और संतुलन का प्रदर्शन करते हुए वही किया जो आवश्यक था।”यह बयान सिर्फ सैन्य क्षमता नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच का भी संकेत माना जा रहा है।ऑपरेशन सिंदूर: सीमित कार्रवाई, पर संदेश गहरा22 अप्रैल के आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष लोगों—जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे—की मौत के बाद पूरे देश में आक्रोश था। सैन्य सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में आतंकियों के कई लॉन्च पैड, कमांड-नोड और सप्लाई पॉइंट्स को निशाना बनाया गया।लेकिन अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को देखते हुए सेना ने सटीक, सीमित और त्वरित कार्रवाई की।राजनाथ सिंह ने साफ किया कि“भारतीय सेना में क्षमता की कोई कमी नहीं है, हमने संयम इसलिए चुना क्योंकि हमारा लक्ष्य बदले की आग नहीं, बल्कि आतंकवाद की रीढ़ तोड़ना था।”

“सिंक्रोनाइज़्ड ऑपरेशन”—लद्दाख व सीमावर्ती नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्णरक्षामंत्री ने बीआरओ के 125 नए बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों का उद्घाटन करते हुए दावा किया कि सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी ने इस ऑपरेशन को सफलता दिलाई।

उन्होंने कहा—“सीमा सड़कें, रियल-टाइम संचार, उपग्रह सहायता—यही हमारी सुरक्षा की रीढ़ हैं। हमारे सैनिक दुर्गम जगहों तक समय पर रसद पहुँचा पाए, इसलिए ऑपरेशन बिना तनाव बढ़ाए सफल रहा।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएँ राजनीतिक और सैन्य विशेषज्ञ इस बयान को तीन कोणों से देखते हैं

:1. रणनीतिक संयम: भारत का नया ‘डॉक्ट्रिन ’प्रो. कमलेश पाठक, रक्षा रणनीतिकार:“ऑपरेशन सिंदूर भारत की ‘कैलिब्रेटेड रिस्पॉन्स’ नीति का हिस्सा है। यह पाकिस्तान को संदेश है कि भारत सर्जिकल और राजनीतिक दोनों स्तरों पर जवाब देने में सक्षम है, पर अनियंत्रित युद्ध नहीं चाहता।

”2. चुनावी वर्ष में सैन्य सफलता का राजनीतिक प्रभावडॉ. साधना रस्तोगी, राजनीतिक विश्लेषक:“सरकार यह दिखाना चाहती है कि वह आतंकवाद पर निर्णायक और सीमावर्ती इलाकों के विकास पर प्रतिबद्ध है। राजनाथ का संयम वाला बयान घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति—दोनों को संबोधित करता है।”

3. कूटनीति बनाम आक्रामकतापूर्व राजनयिक अनिल त्रिवेदी:“भारत ने पिछले एक दशक में यह स्थापित किया है कि वह आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई करने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने वाला जिम्मेदार शक्ति-केन्द्र है। यह संदेश अमेरिका, रूस और यूरोप—सभी तक जाता है।”

कनेक्टिविटी: सिर्फ सड़क नहीं, राष्ट्र की सुरक्षा-रीढ़ राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि आज की लड़ाई सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि संचार नेटवर्क पर भी लड़ी जाती है—ड्रोन, रडार, सैटेलाइट, ऑप्टिकल फाइबर—सब मिलकर युद्ध की दिशा तय करते हैं।उन्होंने कहा—“सीमा पर खड़े सैनिक का हर सेकंड अनमोल है। इसीलिए कनेक्टिविटी सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।”

बीआरओ की उपलब्धियाँ: सुरक्षा + विकास = दोहरी मजबूती125 परियोजनाओं का उद्घाटन ऐसा समय में हुआ है जब उत्तर से लेकर पूर्वी सीमाओं तक भारत बड़े पैमाने पर बुनियादी निर्माण कर रहा है।इसके दो प्रभाव हैं—

1. सुरक्षा मजबूत (तेजी से सैनिक और उपकरण तैनात करना आसान)

2. स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त (पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार वृद्धि)GDP की तेज रफ्तार और कनेक्टिविटी: आर्थिक-रणनीतिक तालमेलदेश की 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2% GDP वृद्धि को भी राजनाथ ने कनेक्टिविटी से जोड़ा

उन्होंने कहा—“जब संचार नेटवर्क मजबूत होता है—अर्थव्यवस्था भी गति पकड़ती है।

”निष्कर्ष

भारत की नई सैन्य-रणनीतिक पहचानऑपरेशन सिंदूर ने यह स्थापित कर दिया कि—भारत क्षमता भी रखता है,इरादा भी,और सबसे बढ़कर कंट्रोल भी।संयमित परंतु सटीक कार्रवाई भारत की “दृढ़ पर संतुलित” नीति का प्रतीक है।राजनाथ सिंह का संदेश स्पष्ट है—

हमारे पास ताकत है, पर भारत ताकत का इस्तेमाल बुद्धिमानी और नैतिकता से करता है।

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