बी के झा
NSK

रीवा / न ई दिल्ली, 2 नवंबर
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सशस्त्र सेनाएं अब पूरी तरह सजग और सक्रिय हैं। पिछले ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में पाकिस्तान को करारा जवाब देने के बाद अब एक बार फिर ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ की गूंज सुनाई दे रही है।
भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि —
यदि दुश्मन ने फिर किसी कायराना हरकत की कोशिश की, तो भारत की सेनाएं तैयार हैं —
और इस बार जवाब पहले से कहीं ज्यादा कठोर होगा।रीवा सैनिक स्कूल से गूंजा राष्ट्रभक्ति का संदेशजनरल द्विवेदी ने यह बयान उस समय दिया जब वे रीवा सैनिक स्कूल में एक विशेष समारोह में शामिल होने पहुंचे। इस स्कूल में उन्होंने और वर्तमान नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कभी साथ पढ़ाई की थी।
भावनाओं से भरे स्वर में सेना प्रमुख ने कहा —
विंध्य की यह पावन भूमि मेरे जीवन की ऊर्जा का स्रोत है। यही मिट्टी है जिसने मुझे अनुशासन, समर्पण और मातृभूमि के लिए बलिदान की प्रेरणा दी। आज फिर जब मैं इस धरती पर खड़ा हूं, तो भारत के भविष्य के वीरों को देखकर गर्व महसूस होता है।
”ऑपरेशन सिंदूर: एकता और संयम का प्रतीकसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की संप्रभुता, अखंडता और शांति की रक्षा का प्रतीक था।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान भारत की तीनों सेनाएं —
थल, जल और वायु —
एक साथ खड़ी रहीं।जहां-जहां आतंकियों के ठिकाने थे, हमने उन्हें निशाना बनाया। लेकिन हमने यह भी सुनिश्चित किया कि आम नागरिक, विशेषकर नमाज या धार्मिक गतिविधियों के दौरान, किसी तरह की क्षति न हो। भारत की सेना अनुशासन और मानवता दोनों का सम्मान करती है।
”तीनों सेनाओं का अद्वितीय तालमेलजनरल द्विवेदी ने अपने पुराने साथियों —
एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और एयर चीफ सिंह —का ज़िक्र करते हुए कहा,हम एनडीए में बैचमेट थे।
जब ऑपरेशन सिंदूर चला, तो नौसेना, थल सेना और वायु सेना —
तीनों की कमान हमारे ही हाथों में थी। जब हम तीनों एक साथ आए, तो कोई दुश्मन भारत की ओर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं कर सका।उनका यह बयान भारत की सशस्त्र सेनाओं के बीच तालमेल और एकजुटता का सशक्त संदेश लेकर आया।‘
ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ की पूरी तैयारीसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि उसका दूसरा चरण — ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ — किसी भी समय शुरू किया जा सकता है।
हमारी तैयारी पूरी है। अगर दुश्मन ने सीमाओं पर या सीमा पार किसी तरह की साजिश की, तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। भारत की सशस्त्र सेनाएं किसी भी स्थिति का सामना करने में सक्षम हैं।रीवा से सतना तक —
भावनात्मक सफरशनिवार को जनरल द्विवेदी अपने बचपन के स्कूल सरस्वती हायर सेकेंडरी स्कूल, सतना भी पहुंचे, जहां उन्होंने 1971–72 में चौथी कक्षा में पढ़ाई की थी।
वहां उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की।इस स्कूल की मिट्टी ने मुझमें अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का बीज बोया। मैं आज उसी भाव से छात्रों से कहना चाहता हूं —
मेहनत, निष्ठा और टीमवर्क ही जीवन में सबसे बड़ा शस्त्र है।”विश्लेषण: पाकिस्तान पर सख्त संदेश, देश को भरोसे का आश्वासनविश्लेषकों का मानना है कि जनरल द्विवेदी का यह बयान सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश है। यह संकेत देता है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव स्ट्राइक पॉलिसी पर काम कर रहा है।
पहलगाम हमले के बाद देश की जनता जिस “कठोर जवाब” की मांग कर रही थी, सेना प्रमुख का यह वक्तव्य उसी भावना का प्रतिबिंब है।‘ऑपरेशन सिंदूर’ —
कब और क्यों बना प्रतीकपहली बार भारत की तीनों सेनाओं ने मिलकर एक संयुक्त कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया था।इस अभियान का मकसद था —
आतंकवाद को उसकी जड़ तक जाकर खत्म करना और यह संदेश देना कि भारत अब सिर्फ चेतावनी नहीं देता, बल्कि कार्रवाई भी करता है।
निष्कर्ष
रीवा की धरती से निकला यह संदेश अब सीमाओं तक गूंज रहा है —
भारत का नया संकल्प है, “शांति हमारी नीति है, पर सुरक्षा हमारी प्राथमिकता।
”और यदि कोई राष्ट्र या संगठन इस नीति की परीक्षा लेने की कोशिश करेगा, तो भारत के वीर सैनिकों का जवाब एक ही होगा —“
ऑपरेशन सिंदूर 2.0 — घर में घुसकर जवाब।
