कपलिंग टूटी, पर हिम्मत नहीं… बड़ा रेल हादसा टल गया, दानापुर–बेंगलुरु एक्सप्रेस दो हिस्सों में बंटी, कई किलोमीटर आगे निकल गया इंजन; यात्रियों में अफरातफरी, घंटों बाधित रहा परिचालन

बी के झा

NSK

आरा,कारीसाथ /पटना, 30 नवंबर

बिहार में शनिवार की शाम एक ऐसा वाकया हुआ जिसने एक पल के लिए हजारों यात्रियों की सांसें रोक दीं। दानापुर से बेंगलुरु की ओर जा रही 03241 दानापुर–बेंगलुरु सिटी स्पेशल एक्सप्रेस अचानक दो भागों में विभाजित हो गई। कपलिंग टूटने की इस घटना ने एक बड़े रेल हादसे की आशंका को जन्म दिया, लेकिन सौभाग्य से किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

जोरदार झटका और टूटता धैर्य

आरा स्टेशन पार करने के कुछ ही मिनट बाद जब ट्रेन पूरी रफ्तार से बक्सर की दिशा में बढ़ रही थी, तभी यात्रियों ने एक तेज झटका महसूस किया। पल भर में चीख-पुकार मच गई—क्योंकि तेज रफ्तार में दौड़ रही ट्रेन दो भागों में बंट चुकी थी।इंजन और आगे के कई डिब्बे लगभग कई किलोमीटर दूर निकल गए, जबकि पिछले कोच ट्रैक पर ही ठिठककर रुक गए।

करीब दो घंटे तक कारीसाथ स्टेशन के पास यात्रियों पर दहशत का साया छाया रहा।अधिकारियों की दौड़-भाग, यात्रियों की दहशत हादसे की खबर मिलते ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी टीमें और सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंच गए। अप लाइन पर परिचालन को तत्काल रोक दिया गया, जिसके कारण पटना–डीडीयू सेक्शन पर कई ट्रेनों की आवाजाही बाधित रही।

इंजन को पीछे लाकर पिछले डिब्बों से जोड़ने का काम आसान नहीं था। अंधेरा, दहशत और टूटे कपलिंग के बीच रेलवे कर्मचारियों ने करीब-करीब युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद ट्रेन को दोबारा जोड़ा गया और लाइन को सामान्य किया जा सका।कारीसाथ स्टेशन के स्टेशन मास्टर योगेंद्र कुमार गुप्ता ने पुष्टि की कि “किसी यात्री को कोई चोट नहीं आई है। तकनीकी टीम द्वारा कपलिंग की मरम्मत के बाद ट्रेन को रवाना किया गया।

”कपलिंग क्यों टूटी?

उठ रहे कई सवाल

रेलवे सूत्रों के अनुसार, ट्रेन के दो हिस्सों में बंटने का कारण कपलिंग का अचानक टूट जाना है।लेकिन सवाल यह है—क्या तकनीकी जांच में कोई चूक हुई?क्या कपलिंग पहले से कमजोर थी?क्या स्पीड, झटका या लोड इसकी वजह बने?रेलवे ने जांच समिति गठित कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इसमें मानवीय भूल, तकनीकी लापरवाही या सिस्टम फेलियर में किसका योगदान रहा।

यात्रियों ने कहा—“हम तो बच गए, लेकिन डर अब भी बैठा है”घटना के दौरान मौजूद यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए—“एक पल लगा कि अब सब खत्म… इतने जोरदार झटके के बाद जब पीछे मुड़कर देखा तो डिब्बे ही नहीं थे,” एक यात्री ने कांपती आवाज़ में बताया।

कई यात्रियों ने इसे जीवन का सबसे डरावना सफर बताया।बड़ा हादसा टल गया—लेकिन चेतावनी भी दे गया यह घटना भले ही बिना जनहानि के निपट गई, लेकिन यह बेहद गंभीर है।

क्योंकि अगर ट्रेन तेज रफ्तार में होती, या ढलान वाले इलाके में होती, तो नतीजा भयावह हो सकता था।रेल सुरक्षा के दावों और सिस्टम की विश्वसनीयता पर इस घटना ने फिर से कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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