करारी हार के बाद गांधी की शरण में प्रशांत किशोर, भितिहरवा आश्रम में 24 घंटे का मौन उपवास, पार्टी बोली—‘जनता तक बात नहीं पहुँचा पाए’

बी के झा

NSK

मोतिहारी , ( बिहार ) 20 नवंबर

बिहार चुनाव में करारी हार के बाद जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) एक बार फिर महात्मा गांधी की कर्मभूमि भितिहरवा गांधी आश्रम पहुँचे—वही स्थान जहां से उन्होंने दो वर्ष पहले अपनी राज्यव्यापी पदयात्रा की शुरुआत की थी। गुरुवार दोपहर 11:15 बजे उन्होंने गांधी प्रतिमा के सामने 24 घंटे का मौन व्रत और उपवास प्रारंभ किया, जो शुक्रवार दोपहर 11:14 बजे समाप्त होगा।

चुनाव में पार्टी का खाता तक न खुलने के बाद PK का यह मौन उपवास राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक माना जा रहा है—एक आत्ममंथन, एक स्वीकारोक्ति और शायद एक नई शुरुआत की भूमिका।शिव पूजा से शुरू हुआ कार्यक्रम, गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण गांधी आश्रम पहुँचकर प्रशांत किशोर ने सबसे पहले परिसर स्थित शिव मंदिर में पूजा की। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।प्रतिमा के निकट ही उन्होंने अपने सहयोगियों की उपस्थिति में मौन व्रत की शुरुआत की।इस दौरान उनके चेहरे पर चुनावी परिणामों के बाद का बोझ और आत्मचिंतन की स्पष्ट झलक दिख रही थी।“

हम जनता तक अपनी बात नहीं पहुँचा पाए”—जन सुराज प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती का बयानजन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने मौन उपवास के पीछे का कारण स्पष्ट शब्दों में बताया—

बिहार के गरीबों की समस्या, बेरोजगारी, शिक्षा की विफलता और पलायन जैसे मुद्दों को जनता के बीच सही तरीके से नहीं पहुंचा सके। जनता या तो हमारी बात समझ नहीं पाई या हम उन्हें समझाने में असफल रहे।”उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम एक संकेत हैं कि पार्टी को अपनी रणनीति और संवाद शैली पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा—हम फिर जनता के बीच जाकर अपनी बात मजबूती से रखेंगे। यही आत्ममंथन का उद्देश्य है।”गांधी आश्रम से दो साल पहले शुरू हुई थी PK की यात्रा भितिहरवा गांधी आश्रम से ही प्रशांत किशोर ने 2022 में जन सुराज पदयात्रा शुरू की थी, जिसने उन्हें गांव-गांव तक पहुंचाया।लेकिन यात्रा का असर चुनाव में दिखाई नहीं दिया—नतीजे बेहद निराशाजनक रहे।इस हार के बाद PK का उसी स्थान पर लौटना एक राजनीतिक संदेश भी देता है—

वह अपनी लड़ाई को गांधीवाद की जमीन पर पुनः खड़ा करना चाहते हैं।

सहयोगियों का जमावड़ा—रितेश पांडे भी पहुंचेमौके परभोजपुरी अभिनेता-सिंगर रितेश पांडे,पार्टी के प्रवक्ता विवेक कुमार,एमएलसी आफाक अहमद,महासचिव दिनेश प्रसाद यादव,प्रखंड अध्यक्ष प्रहलाद महतो,अजय द्विवेदी, आरके मिश्रा—सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे।इन नेताओं ने भी माना कि पार्टी को संगठनात्मक मजबूती और जनता तक पहुंच पर नए सिरे से काम करना होगा।

BJP और जेडीयू ने कसा तंज:

‘हार का दर्द गांधी के पास ले गए’PK के मौन व्रत पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की भी कमी नहीं रही।

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने तीखा व्यंग्य किया—चुनाव से बेआबरू होकर प्रशांत किशोर गांधी की शरण में आँसू बहाने पहुँचे हैं।”वहीं जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने इसे PK की राजनीतिक अपरिपक्वता करार देते हुए कहा—यह प्रशांत किशोर के बरबोलेपन की निशानी है। नीतीश-मोदी की आंधी में बिहार की जनता ने सभी बरबोले और भ्रष्ट लोगों को जड़मूल से उखाड़ फेंका।”

क्या PK की राजनीति अब नए मोड़ पर है?चुनावी हार, आत्ममंथन, गांधी की ओर वापसी, मौन उपवास—यह सब संकेत देते हैं कि प्रशांत किशोर अपने राजनीतिक सफर को एक नई दिशा देने की तैयारी में हैं।

महत्वपूर्ण सवाल यह है—क्या PK जनता के बीच दोबारा विश्वसनीयता बना पाएंगे?क्या जन सुराज बिहार की जमीनी राजनीति में पकड़ बना पाएगा?

या यह मौन उपवास सिर्फ प्रतीकात्मक राजनीति भर है?

इन सवालों का जवाब आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति तय करेगी।

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