बी के झा
NSK


पटना:, 17 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार, परिवार के भीतर उठता बवंडर और कार्यकर्ताओं के तीखे सवाल… इन सबके बीच राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने एक बार फिर अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव पर पूरा भरोसा जता कर राजनीतिक संदेश दे दिया है—“
तेजस्वी ही वर्तमान भी हैं और भविष्य भी।”विधायक दल की बैठक में लालू का यह बयान साफ करता है कि हार के बाद भी आरजेडी की कमान तेजस्वी के हाथों से छूटने वाली नहीं है। पार्टी ने सर्वसम्मति से उन्हें विधायक दल का नेता चुन लिया। बैठक में राबड़ी देवी, मीसा भारती, जगदानंद सिंह समेत शीर्ष नेतृत्व मौजूद था।हार के बाद भी लालू के लिए ‘विकल्प’ क्यों नहीं?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह फैसला चौंकाने वाला नहीं है। लालू की राजनीति में परिवारवाद का बोलबाला हमेशा दिखा है—चारा घोटाले में जेल गए तो सत्ता राबड़ी को दीपार्टी के भीतर कद्दावर नेताओं को कई बार दरकिनार किया
अब इतनी बड़ी हार के बाद भी तेजस्वी की जिम्मेदारी नहीं बदली लगातार आरोपों, रोहिणी आचार्य के भावुक हमलों और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी के बावजूद लालू ने बैठक में हर शंका को खत्म करते हुए स्पष्ट कहा—
“पार्टी मज़बूत हो रही है, वोट बेस बढ़ रहा है और मेहनत तेजस्वी ही कर रहे हैं।”चुनाव समीक्षा: हार की परतें खुलीं, जिम्मेदारी तय नहीं राजद ने समीक्षा बैठक में हार के कारणों पर खुलकर चर्चा की।
कई उम्मीदवारों ने बताया कि—संगठन बूथ स्तर पर कमजोर पड़ासंदेश जनता तक नहीं पहुंचासीमांचल में मुस्लिम वोटरों का राजद से दूरी बनना AIMIM के उभार ने समीकरण बिगाड़े
कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग के रवैये और EVM हैकिंग को भी हार का कारण बताया।243 में से 202 सीटें एनडीए ने जीत लीं, जबकि आरजेडी 143 सीटों पर लड़कर सिर्फ 25 जीत पाई।पारिवारिक भूकंप पर चुप्पी—रोहिणी का मुद्दा बैठक से गायब
दिलचस्प यह रहा कि बैठक में उस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोला गया जिसने पिछले 48 घंटे में आरजेडी की प्रतिष्ठा को सबसे ज्यादा झटका दिया है—लालू की बेटी रोहिणी आचार्य का आरोप कि उनका “गंदा किडनी” दान पर सवाल उठाकर उनका अपमान किया गया और उन्हें “अनाथ” जैसा महसूस कराया गया।
रोहिणी के आक्रोश ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है, लेकिन आरजेडी ने बैठक में पूरी तरह चुप्पी साध ली।एनडीए का पलटवार: “जो घर नहीं संभाल पाया, बिहार क्या संभालेगा?
”एनडीए नेताओं ने तेजस्वी और राजद पर तीखा हमला बोला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा—“अगर अपनी बेटी का सम्मान वहीं बचा पाए, तो बिहार की बेटियों का क्या सम्मान करेंगे?”
एनडीए नेताओं का आरोप है—तेजस्वी के खास सहयोगी संजय यादव और रमीज़ ख़ान ने रोहिणी का अपमान किया लालू ने इसके बावजूद तेजस्वी पर भरोसा बनाए रखा इससे जनता के बीच गलत संदेश गया है कि नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि बैठक में मौजूद नेता तब क्यों स्तब्ध रह गए जब लालू ने दोबारा तेजस्वी को नेता घोषित कर राजनीतिक संदेश साफ—
राजद का भविष्य सिर्फ तेजस्वी के इर्द-गिर्दआरजेडी का पूरा नेतृत्व, विवादों के पहाड़ और आरोपों की आँधियों के बावजूद, तेजस्वी को ही पार्टी का चेहरा बनाए रखने पर सहमत दिखा।
लालू का यह फैसला संदेश देता है—हार के बाद भी नेतृत्व परिवर्तन का सवाल नहीं तेजस्वी को विपक्ष का नेता बनना तय
रोहिणी जैसी पारिवारिक कलह भी पार्टी के फैसलों को नहीं डिगा पाएगी बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम बताता है कि पुत्र-मोह और परिवार की प्राथमिकता आज भी लालू प्रसाद की राजनीति का सबसे स्थायी तत्व है।
