बी के झा
NSK

मधुबनी/पटना, 6 जनवरी
बिहार कांग्रेस में लंबे समय से सुलग रही आंतरिक कलह अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुकी है। मधुबनी स्थित कांग्रेस कार्यालय उस वक्त अखाड़े में तब्दील हो गया, जब पार्टी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और देखते ही देखते लात-घूंसे, लाठी भांजी और झंडों से हमले शुरू हो गए। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान की मौजूदगी में हुआ।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ समय के लिए कांग्रेस कार्यालय में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। अन्य नेताओं और कर्मचारियों ने किसी तरह स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक मामला हाथ से निकल चुका था।हार की समीक्षा बैठक बनी रणभूमि बताया जा रहा है कि कांग्रेस कार्यालय में हालिया चुनावी हार की समीक्षा बैठक चल रही थी। इसी दौरान संगठन की कमजोरी, चुनावी रणनीति और टिकट बंटवारे को लेकर दो गुटों के बीच तीखी बहस शुरू हुई। बहस जल्द ही गाली-गलौज और फिर हाथापाई में बदल गई।
सूत्रों के मुताबिक:टिकट वितरण में अनियमितता कुछ सीटों पर भेदभावऔर कथित तौर पर उगाही के आरोपको लेकर कार्यकर्ताओं के दो गुट आमने-सामने आ गए। आरोप-प्रत्यारोप इतने बढ़े कि मामला मारपीट तक जा पहुंचा।बिहार विधानसभा चुनाव: हार की गहरी चोट बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। पार्टी ने:61 सीटों पर चुनाव लड़ाने किन सिर्फ 6 सीटें जीत सकी इस करारी हार के बाद से ही पार्टी के भीतर रणनीति, नेतृत्व और संगठन को लेकर सवाल उठ रहे थे। इससे पहले भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कई नेताओं को निष्कासित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद असंतोष कम नहीं हुआ।
एक तरफ दफ्तर में मारपीट, दूसरी तरफ विवादित बयानजहां एक ओर मधुबनी में कांग्रेस का संगठनात्मक संकट सड़कों पर दिखा, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री के बयान ने देशभर में राजनीतिक हलचल मचा दी।पूर्व मुख्यमंत्री ने इशारों-इशारों में यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो के साथ किया, वैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी कुछ किया जा सकता है। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में अत्यंत आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदाराना बताया जा रहा है।
सम्राट चौधरी का कड़ा जवाब कांग्रेस के इस बयान पर बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सधे लेकिन तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:“ट्रंप तो ट्रंप है, अगर पूरी दुनिया भी कोशिश कर ले, तब भी कोई भारत के प्रधानमंत्री को छू नहीं सकता। प्रधानमंत्री मोदी के बारे में ऐसा सोचना भी मूर्खतापूर्ण है।”उन्होंने आगे कहा कि ऐसे बयान न केवल प्रधानमंत्री का अपमान हैं, बल्कि भारत की संप्रभुता पर सवाल खड़े करने की कोशिश हैं।
बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और रक्षा विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री के बयान पर: बुद्धिजीवियों शिक्षाविदों हिंदू संगठनों हिंदू धर्मगुरुओंर राजनीतिक विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञोंने एक सुर में कड़ी निंदा की है।वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक का कहना है:“जब कांग्रेस खुद संगठनात्मक अराजकता से जूझ रही है, तब इस तरह के गैर-जिम्मेदार बयान देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।”एक रक्षा विशेषज्ञ ने कहा:“प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सीधे-सीधे भारत की राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभुता को चुनौती देने जैसा है।
”हिंदू संगठनों और धर्मगुरुओं का बयान हिंदू संगठनों और संत-समाज ने भी कांग्रेस नेता के बयान को घटिया और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उनका कहना है कि:“आज पूरी दुनिया भारत और प्रधानमंत्री मोदी की ओर सम्मान से देखती है। ऐसे समय में इस तरह के बयान देश को कमजोर दिखाने का प्रयास हैं।
”पत्रकारों और विश्लेषकों की राय: ‘पहले घर संभालें’वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व को पहले:अपने संगठन की हालत सुधारनी चाहिएअंदरूनी झगड़ों पर नियंत्रण करना चाहिए और राजनीतिक बयानबाजी में जिम्मेदारी दिखानी चाहिए एक वरिष्ठ पत्रकार ने टिप्पणी की:“जिस पार्टी के दफ्तर में अध्यक्ष के सामने लात-घूंसे चल रहे हों, उसे देश की संप्रभुता पर बोलने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
निष्कर्ष
मधुबनी में कांग्रेस दफ्तर में हुआ बवाल केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि यह बिहार कांग्रेस की गहरी संगठनात्मक बीमारी का संकेत है। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के गैर-जिम्मेदार बयान इस संकट को और गहरा कर रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो:कांग्रेस को पहले अपना घर संभालना होगा, वरना ऐसे दृश्य और बयान पार्टी की साख को और नीचे ले जाएंगे।
