बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 18 नवंबर
लाल किले के पास हुए कार विस्फोट ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को गहराई तक झकझोर दिया है। घटना के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों —
सीबीआई, एनआईए और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल —
ने उन डॉक्टरों की व्यापक प्रोफाइलिंग शुरू कर दी है जिन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और चीन के मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरी की डिग्री प्राप्त की है। उद्देश्य स्पष्ट है —
यह पता लगाना कि कहीं यह समूह किसी बड़े डॉक्टर-टेरर मॉड्यूल से जुड़ा तो नहीं, अथवा अनजाने में ही सही, उसकी परिधि में आये हों।अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और मेडिकल संस्थानों को नोटिस एजेंसियों ने राजधानी व एनसीआर स्थित सभी बड़े अस्पतालों, निजी नर्सिंग होम और मेडिकल संस्थानों को नोटिस भेजकर ऐसे डॉक्टरों की पूरी सूची तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है।
अधिकारियों को भेजे गए पत्र में एजेंसियों ने लिखा है—“10 नवंबर 2025 को लाल किले के समीप हुए कार विस्फोट के बाद की गंभीर परिस्थिति को देखते हुए कृपया ऐसे सभी चिकित्सकों का विवरण उपलब्ध कराएं जिनकी मेडिकल डिग्री उपरोक्त चार देशों से प्राप्त है। यह जानकारी अत्यंत आवश्यक है।”
कुछ अस्पतालों ने डेटा सीधे दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) से लेने की सलाह दी है, जो राजधानी में कार्यरत डॉक्टरों का आधिकारिक रिकॉर्ड रखता है। हालांकि एजेंसियाँ स्वयं भी समानांतर स्तर पर यह डेटा संग्रह कर रही हैं।पूछताछ, वित्तीय जाँच और डिजिटल फुटप्रिंट की स्कैनिंग जाँच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन चार देशों से MBBS या अन्य मेडिकल डिग्री प्राप्त सभी चिकित्सकों की
पृष्ठभूमि, यात्रा रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल गतिविधियों की गहन जाँच की जाएगी।अधिकारी के शब्दों में —
“हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कहीं आतंकी नेटवर्क ने मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश कर अपने मॉड्यूल को भारत में विस्तार तो नहीं दिया। फिलहाल यह महज एक एहतियाती कदम है, लेकिन बेहद जरूरी।”विशेष रूप से इसलिए, क्योंकि हाल ही में पकड़े गए आरोपियों में भी उच्च शिक्षित लोग शामिल हैं, जिनके संपर्क विदेशों तक फैले होने के संकेत मिले थे।
कार ब्लास्ट केस: दो गिरफ्तारियाँ, कई सुराग हाथ लगेलाल किले के पास हुए विस्फोट की जांच में अब तक दो गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
पहला आरोपी—डॉ. उमर नबी का सहयोगी आमिर राशिद अली, जिसे 16 नवंबर को पकड़ा गया।
दूसरा आरोपी—श्रीनगर निवासी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश, जिसे 17 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।दोनों आरोपियों से एनआईए लगातार पूछताछ कर रही है। शुरुआती पूछताछ में यह सामने आया है कि संदिग्धों के लिंक देश और विदेश में फैले कई व्यक्तियों तक पहुँचते हैं।
क्यों उठे संदेह?
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इन चार देशों से MBBS करके भारत लौटे डॉक्टरों की संख्या में तेजी आई है। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि इसी प्रवाह का दुरुपयोग कर कुछ संगठनों ने चिकित्सक समुदाय में स्लीपर नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश की हो सकती है।वैसे वर्तमान जांच अभी संदेह और सुरक्षा सतर्कता के स्तर पर है —
किसी भी डॉक्टर पर प्रत्यक्ष संलिप्तता का आरोप नहीं लगाया गया है।देशव्यापी नेटवर्क की जाँच भी संभव यदि प्रारंभिक जांच में कोई संदिग्ध लिंक मिलता है, तो यह प्रक्रिया केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगी।
एजेंसियाँ इसे देशव्यापी स्तर पर विस्तार दे सकती हैं, विशेषकर उन राज्यों में जहाँ विदेशों में MBBS कर लौटने वाले डॉक्टरों की संख्या अधिक है।सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर, मेडिकल क्षेत्र में भी सतर्कता बढ़ी
कार विस्फोट की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी संभावित आतंकी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना है।
डॉक्टरों से जुड़े रिकॉर्ड की जाँच इसी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि मेडिकल विशेषज्ञता का दुरुपयोग आतंकी गतिविधियों में उच्च खतरे की श्रेणी में माना जाता है।
