बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 20 नवंबर
दिल्ली दंगों के सबसे विवादित केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर हलचल दिखी। जमानत की मांग कर रहे शरजील इमाम और उमर खालिद की याचिकाओं पर सुनवाई उस वक्त और तीखी हो गई, जब दिल्ली पुलिस ने अदालत के सामने शरजील के पुराने भाषणों के वीडियो चलाए।इन वीडियोज में शरजील एक पल अदालत पर “कोर्ट को उसकी नानी याद दिला देंगे” जैसे बयान देता दिखा, तो अगले ही पल “चिकन नेक बंद करने” और पूर्वोत्तर को अलग थलग करने जैसी उत्तेजक बातें करता दिखाई दिया।ASG ने कहा– “इंजीनियरिंग पढ़े लोग, प्रोफेशन नहीं…
देश विरोधी गतिविधियों में लगे हुए”दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने अदालत को बताया कि शरजील कोई मामूली भीड़ भड़काने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि IIT से पढ़ा-लिखा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है।
उन्होंने कहा—“ये लोग अपने प्रोफेशन में नहीं, बल्कि देश को अस्थिर करने में लगे हैं। इनके भाषण सिर्फ साधारण विरोध नहीं, हिंसा भड़काने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं।”राजू ने कोर्ट में जामिया, अलीगढ़, आसनसोल और चाखंड में 2019–20 के बीच दिए गए शरजील के भाषणों के क्लिप्स भी दिखाए।
जज का सवाल– “क्या ये भाषण चार्जशीट में शामिल हैं?”
पुलिस ने कहा– हाँ, सबूत के तौर पर मौजूद**जस्टिस कुमार ने जब पूछा कि क्या दिखाए गए वीडियो चार्जशीट का हिस्सा हैं, तो पुलिस ने साफ कहा—“हाँ, ये सभी भाषण हमारे केस के प्रमुख सबूत हैं।”यानी अदालत में चले वीडियो सिर्फ जनसभाओं के फुटेज नहीं, बल्कि अभियोजन का मुख्य हथियार भी हैं।
UAPA और IPC की संगीन धाराओं में दर्ज केस, आरोप—दंगों के ‘मास्टरमाइंड’शरजील इमाम, उमर खालिद, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और ताहिर हुसैन समेत कई लोगों पर UAPA और IPC की कठोर धाराओं में केस दर्ज है। पुलिस के अनुसार, ये सभी 2020 के दंगों की “संचालक टीम” थे।
2020 की हिंसा में—53 लोगों की मौत हुई,700 से अधिक लोग घायल हुए,और कई इलाकों में दिनों तक कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी रही।“ट्रंप के दौरे से जोड़कर दंगे कराए गए”—पुलिस का बड़ा दावा एएसजी ने दावा किया कि सीएए विरोध के नाम पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नज़र खींचने और भारत की छवि खराब करने की रणनीति थी।उन्होंने कहा—“दंगे जानबूझकर उस वक्त कराए गए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत में थे। मकसद था दुनिया का ध्यान खींचना और देश में अराजकता फैलाना।”राजू ने और तीखा हमला करते हुए कहा—“
ये तथाकथित पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी जमीनी आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक हैं। ये हिंसा को ‘आइडिया’ के नाम पर बेचते हैं।”
क्या करेगी सुप्रीम कोर्ट?
बड़ा फैसला जल्द जमानत की ये सुनवाई सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2020 की दिल्ली हिंसा को लेकर नई राजनीतिक और सामाजिक बहस भी है।शरजील इमाम के उकसावनुमा वीडियो अदालत के सामने आने के बाद जमानत मिलने की संभावना और भी जटिल हो गई है।
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं—क्या इन आरोपियों को राहत मिलेगी?या कोर्ट पुलिस की दलीलों को ध्यान में रखते हुए सख्त रुख अपनाएगा?
दिल्ली दंगों की फ़ाइल एक बार फिर न्यायपालिका और राजनीति के केंद्र में है।
