बी के झा
NSK

पटना/ नई दिल्ली, 16 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम आने के बाद से ही राज्य की राजनीति का पारा लगातार चढ़ा हुआ है। एनडीए 202 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर चुका है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी हवा में तैर रहा है—क्या इस बार मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा या नीतीश कुमार एक बार फिर गद्दी संभालेंगे?इन अटकलों को और दिलचस्प मोड़ दिया है जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने, जिन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में इन कयासों को सीधा खारिज तो किया, लेकिन उनके जवाबों ने राजनीति की गलियों में नई फुसफुसाहटें जरूर पैदा कर दी हैं।
BJP बनी नंबर-1 पार्टी—लेकिन सवाल नेतृत्व पर243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में सीटों का हाल इस प्रकार रहा—BJP – 89 सीटें
(सबसे बड़ी पार्टी)J
DU – 85 सीटें
LJP(R) – 19
HAM – 5
RLM – 4
यानी स्पष्ट है कि संख्या के लिहाज से भाजपा गठबंधन की धुरी बनकर उभरी है।इसी वजह से यह थ्योरी जोर पकड़ रही है कि भाजपा चाहे तो JDU पर निर्भर हुए बिना भी सरकार बना सकती है, या बाद में नेतृत्व बदल सकती है।
क्या BJP अकेले भी सरकार बना सकती है? संजय झा का जवाब इन चर्चाओं पर जब संजय झा से पूछा गया—
क्या बीजेपी नीतीश कुमार के बिना सरकार चला सकती है?क्या नीतीश ही 5 साल मुख्यमंत्री रहेंगे?उन्होंने बेहद नपे-तुले शब्दों में कहा—
मैं ऐसी अटकलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता।
समय आने पर सब साफ हो जाएगा। एनडीए के भीतर न कोई भ्रम है न कोई खींचतान। हम एकजुट हैं।उनकी यह बात उतनी स्पष्ट नहीं थी जितनी एनडीए चाहती, और यही अस्पष्टता राजनीतिक हलकों में कई संकेत छोड़ गई।
क्या अंदर खाने कोई नई रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संजय झा के “हम अटकलों पर टिप्पणी नहीं कर सकते” जैसे वाक्य में भी कई परतें छिपी हैं।क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट कहा था—>
“CM का फैसला विधायक करेंगे।”यही बयान NDA के भीतर शक्ति-संतुलन को लेकर नये समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।कई विशेषज्ञों का मानना है कि—BJP संख्या बल की वजह से और केंद्रीय नेतृत्व की शैली को देखते हुएअंदर-अंदर कोई नया विकल्प तलाश रही हो सकती है।
लेकिन इसी थ्योरी पर सबसे बड़ा ब्रेक एक वरिष्ठ पत्रकार ने लगाया।
उन्होंने कहा—अगर दिल्ली या पटना में BJP नेतृत्व ने नीतीश के खिलाफ एक कदम भी उठाया तो न सिर्फ बिहार में, बल्कि दिल्ली में भी उनकी सरकार अस्थिर हो सकती है। नीतीश अकेले दम पर आज भी नई सरकार बनाने की क्षमता रखते हैं।”नीतीश के पास अब भी शक्ति का कार्ड
विश्लेषकों के अनुसार—RJDकांग्रेस वाम AIMIM जैसे दलों के साथ नीतीश सैद्धांतिक रूप से सरकार बना सकते हैं।ऐसी स्थिति में BJP का बिहार में राजनीतिक भविष्य लंबे समय तक प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए यह एक ऐसा दांव होगा जिसका उल्टा पड़ना उन्हें भारी पड़ सकता है।
फिलहाल तस्वीर साफ—CM की कुर्सी पर नीतीश ही बैठेंगे राजनीतिक हल्चरियों और अटकलों के बीच एक बात बिल्कुल साफ है—
NDA गठबंधन की एकजुटता संख्या बलऔर भाजपा का सावधानी भरा मौजूदा रुख इन सबके कारण फिलहाल महागठबंधन या किसी अन्य समीकरण की वापसी की संभावना कम दिखाई देती है।
नीतीश कुमार ही शपथ लेंगे।
हाँ, आगे चलकर भाजपा नेतृत्व क्या रणनीति अपनाता है, यह बिहार की राजनीति का सबसे दिलचस्प अध्याय बनने जा रहा है।निचोड़: संजय झा का बयान संकेतों से भरा हैउनके शब्द भले नरम थे, लेकिन राजनीतिक तापमान को उन्होंने और बढ़ा दिया है।
एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बावजूद आगे का रास्ता राजनीतिक बुद्धिमत्ता और शक्ति संतुलन के नए प्रयोगों से होकर गुजरने वाला है।
