बी के झा
NSK

नई दिल्ली/खगड़िया/पटना, 29 नवंबर
बिहार में अपराधियों के हौसले एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। शुक्रवार दोपहर खगड़िया जिले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और जिला कार्यसमिति सदस्य दिलीप कुमार सिंह (50) को बाइक सवार बदमाशों ने सरेआम गोली मार दी।सीने में गोली लगने से उनकी हालत बेहद नाजुक है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेगूसराय के हायर सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने में जुटी हुई है।वारदात कैसे हुई?गंगौर थाना क्षेत्र के विशनपुर मोड़ पर दिलीप सिंह दोपहर करीब 12 बजे एक मचान पर बैठे थे।तभी पहले से घात लगाए दो बाइक सवार आए और करीब से सीने पर निशाना साधकर फायरिंग कर दी।हमले के बाद बदमाश फरार हो गए।स्थानीय लोग कहते हैं
—“अपराधी मिनटों में आए और गोली मारकर भाग निकले… पुलिस के आने तक सबकुछ खत्म हो चुका था।”एसडीपीओ टो परस नाथ साहू ने बताया—दिलीप सिंह जमीन कारोबार से भी जुड़े थे, इसलिए सभी एंगल से जांच जारी है।इलाके में दहशत, पुलिस के लिए चुनौती खुलेआम दिनदहाड़े फायरिंग ने खगड़िया और आसपास के गांवों में भय का माहौल बना दिया है।पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपियों की खोज में कई टीमों को लगाया गया है।हालांकि अब तक हमले के कारणों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
राजनीतिक भूचाल: बिहार की कानून-व्यवस्था पर फूटा विपक्ष का ग़ुस्सा घटना के कुछ ही घंटों में विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया।
RJD पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा—“यह ‘जंगलराज पार्ट-2’ नहीं बल्कि ‘जंगलराज का खुलेआम नाच’ है।जब सत्ताधारी दल का नेता सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की क्या सुरक्षा होगी?”
कांग्रेस
बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा—“बिहार के लोग गोलियों की आवाज़ के बीच जी रहे हैं। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और सरकार दिल्ली में राजनीति का ढोल पीट रही है।”
वाम दल CPI-ML ने कहा—“BJP–JDU की सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने में नाकाम है। अब अपराधी जमीन विवाद से लेकर राजनीतिक बदले तक खुलेआम हमला कर रहे हैं।
”राजनीतिक विश्लेषकों की राय: “यह सरकार के लिए चेतावनी का बड़ा सायरन है”राजनीतिक विशेषज्ञ प्रो. आर.के. मिश्रा कहते हैं—“जब सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यसमिति सदस्य को भी सुरक्षित नहीं रखा जा सके, तो संदेश साफ है—अपराध नियंत्रण तंत्र पूरी तरह लड़खड़ा रहा है।
”सुरक्षा विश्लेषक अजय ओझा का कहना है—“बिहार में कई वारदातें जमीन विवाद या लोकल गैंग की प्रतिद्वंद्विता से जुड़ी होती हैं।लेकिन राजनीतिक चेहरे पर हमला होना बताता है कि अपराधी अब बेखौफ हैं।
BJP की प्रतिक्रिया: “हमले के पीछे साजिश, अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा”BJP प्रदेश अध्यक्ष ने कहा—“हमारे नेता पर हमला सिर्फ व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि संगठन को भयभीत करने की कोशिश है।पुलिस तुरंत कार्रवाई करे, दोषियों को कड़ी सज़ा मिले।”केंद्रीय मंत्री (बिहार से) ने ट्वीट किया—“घायल दिलीप जी की स्वस्थता की कामना करता हूँ। अपराधियों को जल्द पकड़ने के लिए केंद्र भी राज्य को हर सहायता देगा।”
निष्कर्ष:
एक गोली, कई सवाल, और बिहार की सुरक्षा पर उठता बड़ा प्रश्नचिह्न दिलीप सिंह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।इधर राज्य के राजनीतिक गलियारों में बढ़ती अपराध घटनाओं को लेकर तनाव बढ़ चुका है।क्या यह हमला निजी रंजिश का नतीजा है?या फिर किसी संगठित गिरोह का दबदबा दिखाने का खेल?और सबसे बड़ा सवाल—क्या बिहार की कानून-व्यवस्था फिर पुराने अंधेरे दौर में लौट रही है?जांच का नतीजा आने में समय लगेगा,लेकिन वारदात ने बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर एक और गहरी चोट जरूर कर दी है।
