बी के झा
NSK

गांधीनगर, 10 नवंबर
गुजरात एंटी-टेरर स्क्वॉड (ATS) ने रविवार को एक संगठित साजिश का पर्दाफाश करते हुए तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घातक माने जाने वाले रासायनिक ज़हर — रिसिन — की तैयारी कर रहे थे, जिसे किसी पर हमला करने या वस्तुओं के ज़रिये भेजने की योजना के तहत तैयार किया जा रहा था। गिरफ्तार तीनों में से एक ने चीन से MBBS की डिग्री हासिल की है, जिससे जांच में रासायनिक ज्ञान के दुरुपयोग का संकेत मिलता है।
लीड
क्या पकड़ा गया और कितना खतरनाक है
जांचकर्ताओं के मुताबिक़ आरोपियों — अहमद मोहय्यूद्दीन सैयद, आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम — के पास रासायनिक उपकरण और रिसिन बनाने में उपयोग होने वाले रसायन बरामद हुए हैं। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि वे रिसिन तैयार करने की आरंभिक रासायनिक प्रक्रिया तक पहुँच चुके थे। रिसिन एक बेहद विषैला प्रोटीन है; इसकी मात्र कुछ मिलीग्राम किसी व्यक्ति के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
क्या है रिसिन — सरल भाषा मेंरिसिन अरंडी (castor) के बीज से निकाले जाने वाला एक अत्यधिक जहरीला प्रोटीन है।यह Chemical Weapons Convention (CWC) की Schedule-
1 सूची में आता है — यानी सबसे संगीन केमिकल हथियारों में गिना जाता है।अल्प मात्रा (रेफरेंस के तौर पर कुछ मिलीग्राम) भी जानलेवा हो सकती है।शरीर में जाने पर — साँस, इंजेक्शन या निगलने से — प्रभाव अक्सर 48–72 घंटे के अंदर गंभीर व मृत्युदायी हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय संस्था OPCW के अनुसार रिसिन गर्मी और पानी के संपर्क में आने पर अस्थायी रूप से कमजोर पड़ता है, इसलिए बड़े पैमाने पर फैलाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।अभी तक रिसिन के लिए कोई निश्चित एंटीडोट या सार्वभौमिक इलाज विकसित नहीं हुआ है।
ATS की कार्रवाई — क्या मिला और क्या कहा जा रहा हैATS ने बताया कि कार्यवाही के दौरान आरोपियों के पास रासायनिक उपकरण, रसायन और उन उपकरणों की कुछ स्केच/नोट्स बरामद हुए हैं जिनका उपयोग रिसिन बनाने में किया जाता। एजेंसियों का कहना है कि पकड़े गए संदिग्धों ने रिसिन के शुरुआती रासायनिक चरणों पर काम शुरू कर दिया था —
अब जांच इस बात पर केंद्रीत है कि वे इसे किस तरह और किसके खिलाफ इस्तेमाल करने वाले थे।जांच अधिकारीयों ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विस्तृत तकनीकी जानकारी और बरामद सामग्री का सार्वजनिक खुलासा फिलहाल सीमित रखा जा रहा है ताकि जांच पर असर न पड़े और सार्वजनिक भय को बढ़ावा न मिले।
संदिग्ध की पृष्ठभूमि और संभावित नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक़ अहमद मोहय्यूद्दीन सैयद ने चीन से MBBS की डिग्री ली है — यह तथ्य जांचकर्ताओं के लिए अहम है क्योंकि इससे चिकित्सा व रासायनिक प्रक्रियाओं से जुड़ा तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने की संभावना बनती है।
ATS यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या स्थानीय नेटवर्क, अंतरराज्यीय गठजोड़ या विदेशी संपर्कों ने उन्हें तकनीकी सहायता/रहनुमाई (guidance) दी।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ — रिसिन का उपयोग और इतिहासरिसिन से जुड़ी घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय तौर पर भी दर्ज हैं — पिछले दशक में कुछ मामलों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्राध्यक्षों और अन्य सार्वजनिक हस्तियों को रिसिन युक्त वस्तुएँ भेजे जाने की घटनाएँ रिपोर्ट हुई थीं। हालांकि बड़े पैमाने पर फैलाने की तकनीकी जटिलताओं और जोखिमों के कारण इसका उपयोग सीमित रहा है, फिर भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह पदार्थ बेहद चिंताजनक बना हुआ है।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण — खतरे और रोकथाम
रसायनिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रिसिन का उत्पादन और प्रसार कठिन है पर एक बार किसी लक्ष्य तक पहुँच जाए तो प्रभाव गंभीर और जटिल होगा। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं:
संदिग्धों के नेटवर्क का विश्लेषण, बरामद रसायनों की फॉरेंसिक जाँच, और संभावित लक्ष्यों की पहचान। सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट पर रखा जाना चाहिए ताकि किसी भी संदिग्ध लक्षण की त्वरित पहचान और रोकथाम संभव हो।अब जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी
ATS और अन्य केंद्रीय एजेंसियाँ (यदि ज़रूरी हुआ तो) राष्ट्रीय रासायनिक फॉरेंसिक संस्थाओं के साथ मिलकर बरामद सामग्री की विस्तृत जाँच कर रही हैं।संदिग्धों के फोन, ईमेल, बैंक रेकॉर्ड और विदेश संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।यह भी जांचा जा रहा है कि क्या रिसिन का इस्तेमाल किसी विशेष व्यक्ति, संस्थान या व्यापक जनसमूह को लक्ष्य करके किया जाना था।जिस व्यक्ति ने विदेश से शैक्षिक डिग्री हासिल की, उसके अध्ययन/रहवास रिकॉर्ड और संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
सुरक्षा संदेश और निष्कर्ष
यह घटना याद दिलाती है कि रासायनिक हथियारों की सम्भावित धमकी कितनी गंभीर हो सकती है — भले ही बड़े पैमाने पर फैलाने में तकनीकी कठिनाइयाँ हों। सार्वजनिक तौर पर घबराहट फैलाने के बजाय, संवेदनशील सूचनाओं को सिर्फ संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जाना चाहिए और संदिग्ध गतिविधि देखने पर स्थानीय पुलिस या ATS को तुरंत सूचित किया जाए।
नोट
यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी और अधिकारियों के संक्षिप्त बयानों पर आधारित है। जांच जारी है और भविष्य में ATS/केंद्र सरकार से और अधिक तकनीकी व कानूनी विवरण सामने आएंगे।
