बी के झा
NSK

नई दिल्ली/गोरखपुर/लखनऊ 11 दिसंबर
यूपी पुलिस ने जिस व्यक्ति को करोड़ों की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है, उसकी जिंदगी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं। नाम— ललित किशोर। पेशा— फर्जी आईएएस। शौक— महंगी ज्वैलरी, लग्जरी गाड़ियां, गनर और प्रेमिकाएं।पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ललित की एक वैध पत्नी है, लेकिन उसके साथ चार प्रेमिकाएं भी थीं—
जिनमें से तीन गर्भवती हैं। इन सभी पर वह लाखों रुपये खर्च करता था: महंगे फोन, सोने की ज्वैलरी, ब्रांडेड कपड़े और फाइव-स्टार जैसी लाइफस्टाइल।जालसाज की पोल खुलने के बाद इन्हीं में से एक प्रेमिका ने उसे पकड़वाने में पुलिस की मदद की।
गोरखपुर में फर्जी ऑफिस, फर्जी बोर्ड, फर्जी गनर — सबकुछ था हाई-प्रोफाइल ललित खुद को यूपी कैडर का आईएएस अधिकारी बताता था। गोरखपुर के चिलुआताल इलाके में उसने बकायदा किराए के मकान में “
आईएएस कार्यालय” बनाकर बाहर चमचमाता बोर्ड लगाया था। दो लग्जरी वाहनों पर नीली बत्ती, आगे-पीछे ‘गनर’, मैनेजर और स्टेनो— सबकुछ बिल्कुल सरकारी अंदाज़ में।
गनर को महीने का ₹30,000
मैनेजर को ₹60,000
गाड़ियों की EMI ₹60,000
होटल और लाइफस्टाइल का खर्च लाखों में कुल मिलाकर, यह फर्जी अफसर हर महीने ₹5 लाख से अधिक सिर्फ अपनी हाई-प्रोफाइल इमेज बनाए रखने पर उड़ाता था।
कैसे खुला पूरा खेल: एक शिकायत, एक व्यापारी और करोड़ों का झांसा गोरखपुर के एक युवक ने गुमनाम शिकायत दी थी, लेकिन ठोस आधार नहीं था।इसी बीच बिहार के मोकामा के व्यापारी मुकुंद को एक करोड़ रुपये “ठेके” के नाम पर ठगने की कोशिश करते हुए पुलिस ने पकड़ लिया। इसके बाद पूरा नेटवर्क सामने आया।पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि ललित ने अपने लिए 10 गनर रखे थे, ताकि कहीं भी उसकी ‘सरकारी धमक’ कायम रहे।
फर्जी अखबार, फर्जी फोटो, फर्जी आदेश — AI और Photoshop से रचता था भ्रम पुलिस को ललित के पास से कई अखबारों की बनाई गई मैनिपुलेटेड कटिंग्स मिली हैं, जिनमें वह जिलाधिकारी, सीईओ और बड़े अधिकारियों के साथ मीटिंग में बैठे दिखाया गया है।डीएम देवरिया की एक असली प्रेस फोटो को एडिट कर वह खुद को अधिकारी के रूप में चिपका देता था।
जांच में आशंका है कि उसने AI और फोटोशॉप के जरिए ही वेतन रोकने के आदेश कार्रवाई बताने वाली हेडिंग विशेष निरीक्षण रिपोर्ट जैसे दस्तावेज तैयार किए।इन्हीं वजहों से लोग उसके जाल में आसानी से फंस जाते थे।
शिक्षक से ठग बनने तक: कोचिंग में रिश्वत, फरारी और शादी ललित किशोर का बैकग्राउंड भी उतना ही चौंकाने वाला है।वह बिहार की एक बड़ी कोचिंग में गणित का शिक्षक रह चुका है। लेकिन एक छात्र से ₹2 लाख रिश्वत लेने का मामला सामने आया, जिसके बाद उसे वहां से निकाल दिया गया।इसी दौरान वह एक युवती को बहला-फुसला कर ले भागा। उस पर केस भी हुआ।
अंततः उसी युवती से उसने शादी कर ली और उसके दो बच्चे भी हैं।अब पुलिस को इस बात के प्रमाण मिले हैं कि शादी के बाद भी वह लगातार नए रिश्ते बनाता गया— और ठगने के लिए “अधिकारियों का रौब” इस्तेमाल करता रहा।
अंग्रेजी में रौब, ड्रेस अफसरों जैसी, और निरीक्षण की नौटंकी
कथित निरीक्षण के दौरान ललित अफसरों जैसे कपड़े पहनकर अंग्रेजी में बात करता था— जिससे स्कूलों, संस्थानों और कारोबारियों को वह वास्तविक IAS ही लगता था।दोनों लग्जरी गाड़ियां उसने ठगी के पैसों से ली थीं, जिनमें से एक इनोवा थी— जो यूपी में आम तौर पर अधिकारियों की गाड़ी मानी जाती है। इसलिए भी लोगों को शक नहीं होता था।स्कूलों में फर्जी जांच, फर्जी आदेश और ठेके का झांसा
ललित अलग-अलग स्कूलों में “सरकारी जांच” के नाम पर पहुंचता था और फिर कार्रवाई की धमकी देकर वसूली करता था।उसके पास से मुख्य कार्यपालक अधिकारी, गोरखपुर का फर्जी पत्र भी मिला है, जिसके जरिए उसने मोकामा के व्यापारी को ठेका देने का लालच दिया था।यह भी शक है कि कई और लोग उसकी ठगी के शिकार हुए हैं।पुलिस की अपील: सामने आएं, कार्रवाई होगी सख्त
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने जनता से अपील की है कि जिस किसी के साथ भी इस जालसाज ने ठगी की है, वे आगे आएं और रिपोर्ट करें।पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इस फर्जी आईएएस के तार कई जिलों और राज्यों तक फैले हो सकते हैं।
निष्कर्ष
ललित किशोर का मामला सिर्फ एक फर्जी आईएएस की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि यह चेतावनी है कि तकनीक, दिखावे और महंगी लाइफस्टाइल के दम पर अपराधी किस तरह प्रशासन जैसी साख को भी ढाल बना लेते हैं।इस पूरे मामले ने सरकारी पहचान, सुरक्षा, सत्यापन और फर्जीवाड़े पर नए सिरे से बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
