चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया पत्नी से विवाद के बाद जहर खाकर सुसाइड, कटिहार में टूटा पूरा परिवार; समाज को झकझोरने वाली घटना

बी के झा

NSK





कटिहार ( बिहार ) 20 दिसंबर

कटिहार जिले के कुरसेला थाना क्षेत्र अंतर्गत तीनघरिया गांव में शुक्रवार की रात एक पारिवारिक विवाद ने ऐसा भयावह मोड़ ले लिया, जिसने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। पत्नी से हुए आपसी विवाद के बाद चार बच्चों के पिता छंगुरी शर्मा ने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।मृतक की पहचान तीनघरिया वार्ड संख्या-5 निवासी छंगुरी शर्मा के रूप में हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। शनिवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। लेकिन तब तक घर में मातम और गांव में सन्नाटा पसर चुका था।एक विवाद, चार मासूम और उजड़ता भविष्य

्बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच किसी घरेलू बात को लेकर कहासुनी हुई थी। विवाद के बाद छंगुरी शर्मा घर से अलग हुए और बाद में जहर खा लिया।परिजनों का कहना है कि किसी को अंदाजा नहीं था कि एक मामूली घरेलू विवाद इतना बड़ा और अंतिम फैसला बन जाएगा।मृतक के पीछे उसकी पत्नी, चार छोटे बच्चे और बुजुर्ग परिजन रह गए हैं। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाने से परिवार पर आर्थिक और भावनात्मक संकट एक साथ टूट पड़ा है। घर में चीख-पुकार और गांव में गमगीन माहौल है।

पुलिस: जांच जारी,

हर पहलू देखा जा रहा कुर्सेला थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया—

प्रारंभिक जांच में पति-पत्नी के बीच विवाद की बात सामने आई है। परिजनों से प्राप्त आवेदन के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।पुलिस का कहना है कि फिलहाल यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है, लेकिन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।

शिक्षाविदों की चिंता: ‘

संवाद की कमी जानलेवा बन रही’इस घटना पर स्थानीय शिक्षाविदों ने गहरी चिंता जताई है। एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा—आज के समय में पारिवारिक तनाव, आर्थिक दबाव और संवाद की कमी लोगों को भीतर से तोड़ रही है। छोटी-छोटी बातों पर जीवन समाप्त कर लेना हमारे सामाजिक ढांचे की कमजोरी को उजागर करता है।”उन्होंने कहा कि स्कूलों और समाज में मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है।

समाजसेवी संगठनों की प्रतिक्रिया: ‘

आत्महत्या नहीं, यह सामाजिक असफलता है’

कई समाजसेवी संगठनों ने इस घटना को केवल आत्महत्या नहीं बल्कि सामाजिक विफलता बताया।एक समाजसेवी संस्था के प्रतिनिधि ने कहा—चार बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला गया। अगर समय रहते काउंसलिंग, पारिवारिक मध्यस्थता या सामाजिक सहयोग मिला होता, तो शायद यह जान बचाई जा सकती थी।”संगठनों ने सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र, हेल्पलाइन और पारिवारिक परामर्श व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषक: ‘गरीबी, तनाव और अकेलापन भी कारण’

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण भारत में आत्महत्याओं के पीछे केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि आर्थिक असुरक्षा, बेरोजगारी, सामाजिक दबाव और अकेलापन भी बड़ी वजह बन रहे हैं।

एक विश्लेषक के अनुसार—ऐसी घटनाएं बताती हैं कि विकास की बातें करने के साथ-साथ समाज के निचले स्तर तक मानसिक और सामाजिक सुरक्षा पहुंचाना जरूरी है।”गांव में सवाल, समाज के सामने आईना तीन गरिमा गांव में लोग आज भी यही सवाल कर रहे हैं—

क्या कोई रास्ता नहीं था?

क्या कोई ऐसा था जिससे छंगुरी अपनी पीड़ा साझा कर पाता?

चार मासूम बच्चों की आंखों में भविष्य का डर और घर के आंगन में पसरा सन्नाटा इस बात की गवाही दे रहा है कि एक क्षण का आवेग कई जिंदगियों को तोड़ देता है।

निष्कर्ष

: चेतावनी है यह घटनायह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है—

संवाद, संवेदना और सहयोग की कमी जब बढ़ती है, तो उसका अंजाम पूरे परिवार और समाज को भुगतना पड़ता है।

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