बी के झा

NSK
पटना, नई दिल्ली, 4 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राजनीति में रिश्तों का नया रंग देखने को मिल रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और मोदी सरकार में मंत्री रह चुके पशुपति कुमार पारस ने अपने भतीजे चिराग पासवान को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। पारस ने कहा है कि “चिराग मेरे भतीजे हैं। परिवार का कोई सदस्य मुख्यमंत्री बने, इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है। अगर चिराग मुख्यमंत्री बनते हैं, तो सबसे ज्यादा खुशी मुझे होगी।”यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति पूरी तरह से चुनावी मोड में है। महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित कर रखा है, वहीं एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। खुद चिराग पासवान भी बार-बार नीतीश कुमार को सीएम फेस मानने की बात दोहरा रहे हैं। लेकिन, पारस के इस बयान ने कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।चाचा-भतीजा: रिश्तों से सियासत तक का सफररामविलास पासवान के निधन के बाद ही एलजेपी में फूट पड़ गई थी। सभी सांसदों को साथ लेकर पशुपति पारस ने नई पार्टी बना ली और चिराग को अलग-थलग कर दिया। हालात यहां तक पहुंचे कि पारस ने चिराग को ‘अपना खून’ मानने से भी इनकार कर दिया। धीरे-धीरे सियासत ने करवट ली और जनता का झुकाव चिराग की ओर होने लगा। चिराग ने अपनी आक्रामक शैली और ‘बिहारी प्रथम, बिहारी हित’ की राजनीति से अलग पहचान बनाई। इसके बरअक्स, पारस का राजनीतिक कद सीमित होता चला गया।एनडीए में भाव न मिलने पर पारस ने महागठबंधन का दामन थामा। लेकिन अब वही पारस चिराग की संभावित मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर खुशी जता रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह बदला हुआ दिल है या फिर सियासी मजबूरी?अमित शाह का फैक्टर और चिराग की अहमियतराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पारस का यह बयान अकेले उनका नहीं हो सकता। गृह मंत्री अमित शाह हाल के दिनों में बार-बार चिराग पासवान के साथ खड़े दिखे हैं। भाजपा ने उन्हें ‘हनुमान’ की उपाधि दी और संकेत दिए कि बिहार में पासवान परिवार की राजनीतिक विरासत को साधे बिना सत्ता की राह आसान नहीं होगी।ऐसे में पारस का बदला हुआ रुख भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। महागठबंधन में रहने के बावजूद पारस का चिराग को लेकर अचानक नरम पड़ना, विपक्ष के लिए एक संकेत है कि भाजपा चुनावी समीकरणों में पासवान परिवार को एकजुट दिखाने की कोशिश कर रही है।महागठबंधन की मुश्किलें और तेजस्वी का समीकरणमहागठबंधन में लगभग सभी दलों ने तेजस्वी यादव को अगला मुख्यमंत्री मान लिया है। कांग्रेस ने पारस के बयान को ‘पारिवारिक मामला’ कहकर टालने की कोशिश की है। लेकिन जमीनी स्तर पर यह बयान महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। तेजस्वी खुद को भविष्य का सीएम प्रोजेक्ट कर चुके हैं, ऐसे में चिराग के नाम की चर्चा विपक्षी खेमे में असहजता पैदा कर सकती है।राजनीतिक विश्लेषण: चाचा-भतीजा कितने दिन साथ?चाचा-भतीजा का रिश्ता बिहार की राजनीति में हमेशा से सुर्खियों में रहा है। कभी आरोप-प्रत्यारोप तो कभी कड़वाहट। अब जब चुनाव सिर पर हैं, पारस का यह बयान राजनीतिक ‘दिल बदलने’ जैसा लग रहा है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह नजदीकी चुनाव तक ही सीमित रहेगी या वाकई पासवान परिवार की एकता लौट रही है?विशेषज्ञों के अनुसार, “बिहार की राजनीति में पासवान फैक्टर निर्णायक रहा है। भाजपा और एनडीए इस फैक्टर को हाथ से जाने नहीं देना चाहते। पारस का बयान इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा दिखता है।निष्कर्षपशुपति पारस के इस बयान ने चुनावी समर में नई हलचल मचा दी है। जहां महागठबंधन के भीतर असहजता बढ़ सकती है, वहीं भाजपा और एनडीए के लिए यह संदेश है कि पासवान परिवार की एकजुटता उनके पक्ष में जाएगी। अब असली सवाल यह है कि आने वाले महीनों में चाचा-भतीजा की यह सियासी नजदीकी कितनी मजबूत साबित होगी और बिहार की जनता किसे अपना ‘नेक्स्ट सीएम’ चुनती है।
