बी के झा
NSK

पटना/मोकामा, 4 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सियासी बयानबाज़ी ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है। आरोप है कि ललन सिंह ने अपने एक भाषण में समर्थकों से विपक्षी वोटरों को मतदान से रोकने की अपील की थी।
चुनाव आयोग ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए उन्हें 24 घंटे के भीतर जवाब देने का आदेश दिया है।
‘घर से निकलने मत दो…’—
वायरल हुआ विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें कथित तौर पर ललन सिंह कहते दिखाई दे रहे हैं—
एक-दो नेता हैं, तो चुनाव के दिन इन्हें घर से निकलने मत दो, घर में ही बंद कर दो। अगर बहुत हाथ-पैर जोड़ें तो साथ ले जाकर अपना वोट डलवाओ और फिर घर आकर सुला दो।
इस बयान ने बिहार की सियासत में तूफ़ान ला दिया है। आरजेडी समेत विपक्षी दलों ने इसे ‘मतदान अधिकार पर सीधा हमला’ बताया है और चुनाव आयोग से ललन सिंह की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की है।
हालांकि NSK इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता, पर यह वीडियो मोकामा से लेकर पटना तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
जेडीयू खेमे का बचाव: कहा—
बयान का गलत अर्थ निकाला गया जेडीयू के सूत्रों का कहना है कि वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
पार्टी नेताओं के मुताबिक़ ललन सिंह का निशाना विपक्षी नेताओं पर नहीं बल्कि पार्टी के भीतर विरोध करने वालों पर था। मोकामा की राजनीति से जुड़े स्थानीय जानकार मानते हैं कि यह टिप्पणी दरअसल जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार के लिए थी, जिनका लंबे समय से अनंत सिंह खेमे से टकराव चल रहा है
मोकामा का रण और ‘अनंत फैक्टर’
इस विवाद से पहले भी ललन सिंह सुर्खियों में थे, जब उन्होंने मोकामा में जनसभा के दौरान कहा था—
अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब हर व्यक्ति को ‘अनंत सिंह’ बनकर चुनाव लड़ना चाहिए। अब मोकामा की कमान मैंने अपने हाथ में ले ली है।”उनका यह बयान उस समय आया था जब मोकामा के बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह को जन सुराज पार्टी समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया।
ललन सिंह ने गिरफ्तारी को “राजनीतिक साजिश” बताया था और कहा था कि “सच्चाई बहुत जल्द सामने आएगी।”
विपक्ष का पलटवार:
‘दिखावे की कार्रवाई’ बता चुनाव आयोग पर निशाना
आरजेडी की प्रवक्ता कंचना यादव ने कहा कि चुनाव आयोग का नोटिस “महज़ दिखावा” है।अगर आयोग सच में निष्पक्ष है तो ललन सिंह, हेमंत बिस्वा सरमा और योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, जो खुलेआम संप्रदायिक भावना भड़का रहे हैं। केवल नोटिस भेजने से लोकतंत्र की रक्षा नहीं होगी।
वाम दलों और कांग्रेस ने भी आयोग से मांग की है कि ऐसे भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के प्रचार पर रोक लगाई जाए, ताकि बिहार चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रह सके।
राजनीतिक विश्लेषण:
‘बिहार की मिट्टी में सियासत की भाषा बदल रही है’
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की चुनावी ज़मीन पर बाहरी राज्यों से आने वाले नेताओं और बयानों ने ध्रुवीकरण की राजनीति को हवा दी है।
मीडिया विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. सिंह के अनुसार —
बिहार की राजनीति में जो पहले सामाजिक न्याय बनाम विकास का विमर्श था, अब वह बदलकर धर्म और अपराध बनाम आस्था की लड़ाई में बदल रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
संपादकीय
ललन सिंह पर चुनाव आयोग का नोटिस सिर्फ़ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस राजनीतिक प्रवृत्ति पर सवाल है जिसमें सत्ता पाने की ललक में संवैधानिक मर्यादाएँ और लोकतांत्रिक शुचिता दरकिनार की जा रही हैं।बिहार का मतदाता अब यह तय करेगा कि वह ‘वोट से बदलाव’ चाहता है या ‘वोट से डर’।
