चुनाव आयोग ने प्रशांत किशोर को भेजा नोटिस: दो वोटर आईडी पर मांगा जवाब, जन सुराज बोली— “राजनीतिक बदले की कार्रवाई”

बी के झा

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पटना / नई दिल्ली 28 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर एक नए विवाद में फंस गए हैं। निर्वाचन आयोग ने उन्हें दो अलग-अलग राज्यों — बिहार और पश्चिम बंगाल — में वोटर के रूप में पंजीकृत होने के आरोप में नोटिस जारी किया है।

आयोग ने किशोर से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है।रोहतास जिले के करगहर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाची पदाधिकारी-सह-डीसीएलआर, सासाराम की ओर से मंगलवार को जारी इस नोटिस में लिखा गया है कि “एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार प्रशांत किशोर का नाम बिहार के करगहर विधानसभा और पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र, दोनों की निर्वाचक सूचियों में दर्ज है।”

निर्वाचन आयोग ने इस पर स्पष्ट किया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत कोई भी व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकता। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दोषी को एक वर्ष की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

जन सुराज का पलटवार: “पीके को टारगेट करने की कोशिश”जन सुराज पार्टी ने इस नोटिस को राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया है।

पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि जब प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में रहते थे, तब उन्होंने वहीं का मतदाता पंजीकरण कराया था। लेकिन अब वे बिहार में स्थायी रूप से निवास करते हैं और करगहर विधानसभा क्षेत्र में उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा गया है।

पार्टी के अनुसार, किशोर ने पहले ही पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आवेदन जमा कर दिया था, जिसकी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के पास लंबित है।

जन सुराज नेताओं का कहना है कि “फिर भी सरकार और गृह मंत्रालय को पीके को घेरने का कोई बहाना चाहिए था। यह नोटिस उसी सियासी एजेंडे का हिस्सा है।

”विश्लेषकों की राय: “बीजेपी के लिए नई चुनौती बन चुके हैं पीके”राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी इस बार बिहार चुनाव में तीसरे मोर्चे के रूप में मजबूती से उभर रही है। कई सीटों पर उनके प्रत्याशी जातिगत और स्थानीय समीकरणों को प्रभावित कर रहे हैं।

एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, “बीजेपी के लिए महागठबंधन से बड़ी चुनौती इस समय प्रशांत किशोर का जनसंपर्क अभियान बन चुका है। शायद इसी वजह से सत्तारूढ़ दल के नेता और केंद्रीय नेतृत्व पीके और उनके उम्मीदवारों पर लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए हैं।”

चुनावी माहौल में नया मोड़चुनाव आयोग का यह नोटिस बिहार के राजनीतिक माहौल में नई हलचल पैदा कर गया है। एक ओर जन सुराज पार्टी इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रही है,

वहीं विपक्षी दल भी इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे हैं।अब सबकी नजर प्रशांत किशोर के उस जवाब पर टिकी है जो उन्हें तीन दिनों के भीतर आयोग के समक्ष पेश करना है।

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