चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को बताया बेबुनियाद, बीजेपी ने कहा—देश की छवि धूमिल करने की कोशिश

बी के झा

NSK

नई दिल्ली , 5 नवंबर

हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयान ने देश के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

राहुल गांधी ने दावा किया था कि हरियाणा की मतदाता सूची में 25 लाख फर्जी नाम जोड़े गए थे और “पिछला विधानसभा चुनाव चोरी हुआ” था। इस आरोप पर बुधवार को चुनाव आयोग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि राहुल गांधी के सभी दावे “निराधार और तथ्यों से परे” हैं।

“कांग्रेस ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई”

चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने साफ कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के दौरान न तो कांग्रेस के बूथ स्तरीय एजेंट (BLA) ने मतदाता सूची को लेकर कोई दावा या आपत्ति दर्ज कराई थी, न ही किसी बूथ से “एक से अधिक मतदान” की शिकायत आयोग तक पहुंची थी।आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सवाल उठाया,अगर मतदाता सूची में इतनी भारी गड़बड़ी थी, तो कांग्रेस के बूथ एजेंट्स ने चुनाव के दौरान या बाद में कोई औपचारिक शिकायत क्यों नहीं की?

वे मतदान केंद्रों पर क्या कर रहे थे?”अधिकारी ने आगे कहा कि आयोग नियमित रूप से मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए अभियान चलाता है, जिसमें ‘डुप्लिकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं’ के नाम हटाए जाते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा,क्या राहुल गांधी इन सुधार अभियानों का समर्थन करते हैं या फिर इनका विरोध?

”‘शून्य मकान संख्या’ को लेकर भी दी स्पष्टीकरण

राहुल गांधी ने मतदाता सूची में दर्ज “शून्य मकान संख्या” को लेकर भी सवाल उठाए थे। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि जहां पंचायत या नगरपालिका द्वारा घरों को आधिकारिक संख्या आवंटित नहीं की गई, वहां बूथ स्तरीय अधिकारियों ने उन्हें तकनीकी रूप से ‘मकान संख्या शून्य’ के रूप में चिह्नित किया है। इसका मतलब यह नहीं कि मतदाता फर्जी हैं।”

बीजेपी का पलटवार—‘देश को बदनाम करने की कोशिश’चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी “भारत विरोधी ताकतों” के हाथों में खेल रहे हैं और देश के लोकतंत्र को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।

रिजिजू ने कहा,राहुल गांधी हर बार चुनाव के दौरान विदेश चले जाते हैं, जमीन पर जनता के बीच नहीं जाते। जब हार होती है तो चुनाव आयोग और लोकतंत्र पर सवाल उठाते हैं। यह एक तरह से देश की छवि को धूमिल करने की साजिश है।उन्होंने आगे कहा कि अगर वास्तव में राहुल गांधी को मतदाता सूची या मतदान प्रक्रिया पर संदेह था तो उन्हें “साक्ष्य सहित” आयोग के पास जाना चाहिए था या अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए था — “

लेकिन उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया।”हरियाणा चुनाव का राजनीतिक परिदृश्य

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में 2024 के चुनाव में बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 37 सीटें मिलीं।

इनेलो को 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 3 सीटें मिली थीं। दिलचस्प है कि कई एग्जिट पोल्स ने कांग्रेस की बढ़त का अनुमान जताया था, पर नतीजे उससे उलट आए।

विश्लेषण —

विपक्ष की रणनीति या असली चिंता?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी का यह बयान महज एक राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश हो सकता है, ताकि हरियाणा में कांग्रेस की हार को “जनादेश नहीं, चुनावी धांधली” के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष को अगर मतदाता सूची पर ठोस सबूत मिलते हैं तो उन्हें औपचारिक रूप से आयोग के समक्ष पेश करना चाहिए—

सार्वजनिक मंचों पर बयान देने से नहीं, संस्थागत प्रक्रिया के जरिए।

निष्कर्ष

हरियाणा चुनाव को लेकर राहुल गांधी के बयान ने जहां कांग्रेस को चर्चा में ला दिया है, वहीं चुनाव आयोग और बीजेपी दोनों ने इसे “बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप” करार दिया है। इस विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या देश के चुनावी संस्थानों पर भरोसे का संकट गहराता जा रहा है या यह महज सियासी शोर है— जिसका शोर अगले चुनाव तक थमने वाला नहीं।

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