बी के झा
NSK


नई दिल्ली, 24 अक्टूबर
राजधानी दिल्ली इन दिनों दो मोर्चों पर ऐतिहासिक बदलाव की गवाह बन रही है।एक ओर, छठ पूजा से पहले यमुना नदी को साफ़ और जीवन्त बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने हथिनीकुंड बैराज से अतिरिक्त जल छोड़ा है, तो दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने 2026 तक 5,000 नई इलेक्ट्रिक बसें उतारकर शहर को भारत का सबसे बड़ा ज़ीरो-एमिशन ट्रांसपोर्ट हब बनाने का संकल्प लिया है।दोनों प्रयासों का मकसद एक ही है — “स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और स्वस्थ दिल्ली”।
हरियाणा का बड़ा कदम: यमुना में छोड़ा गया स्वच्छ जल, छठ व्रतियों को मिलेगी राहत छठ पर्व से कुछ दिन पहले हरियाणा ने हथिनीकुंड बैराज के गेट खोल दिए हैं।केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार शाम 5 बजे से यमुना की पूर्वी और पश्चिमी नहरों में पानी का प्रवाह रोककर पूरा जल मुख्य धारा में छोड़ दिया गया।शाम 7 बजे यह प्रवाह बढ़कर 293.81
क्यूमेक्स तक पहुंच गया — जो दिल्ली के लिए तय पर्यावरणीय प्रवाह (10 क्यूमेक्स) से लगभग 30 गुना अधिक है।यह अतिरिक्त जल यमुना के बहाव को तेज करेगा, जिससे नदी का ठहरा हुआ प्रदूषित पानी बह सकेगा।विशेषज्ञों का कहना है कि “प्रवाह बढ़ने से नदी में घुले प्रदूषक घटते हैं, जल में ऑक्सीजन बढ़ती है और जैव विविधता को नया जीवन मिलता है।”
छठ घाटों की तैयारियां तेज, यमुना तट पर सजेगी आस्था की भव्य तस्वीर दिल्ली प्रशासन ने बताया कि बढ़े हुए जल प्रवाह से इस वर्ष छठ घाटों की स्थिति काफी बेहतर रहेगी।
उत्तरपूर्वी, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के घाटों — जैसे कालिंदी कुंज, आईपी स्टेशन, मयूर विहार और वजीराबाद — पर साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, रोशनी और सुरक्षा इंतज़ामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया,यह कदम सिर्फ छठ के लिए नहीं, बल्कि यमुना को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी है। हमारी कोशिश है कि आने वाले वर्षों में यमुना फिर से अपनी प्राकृतिक सुंदरता प्राप्त करे।”
दिल्ली की सड़कें होंगी ‘ग्रीन कॉरिडोर’ — 2026 तक 5,000 इलेक्ट्रिक बसें इसी के साथ दिल्ली का परिवहन विभाग भी राजधानी की सूरत बदलने में जुटा है।मार्च 2026 तक दिल्ली की सड़कों पर 5,000 नई इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी, जिससे दिल्ली देश का सबसे बड़ा जीरो-एमिशन पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनेगा।
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा —हमारा लक्ष्य है कि दिल्ली की बस सेवाएं विश्वस्तरीय और पर्यावरण के अनुकूल बनें। हर महीने नई बसें जुड़ रही हैं।
थोड़ी देरी के बावजूद दिशा साफ़ है — दिल्ली अब ‘पॉल्यूशन फ्री मोबिलिटी’ की राजधानी बनने जा रही है।
चार्जिंग डिपो बन रहे ‘इलेक्ट्रिक हब’अब तक दिल्ली में 25 बस डिपो पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो चुके हैं।अगले चार महीनों में सभी 63 डिपो ‘हाई-वोल्टेज मोड’ में बदल दिए जाएंगे, जिनमें 40 डीटीसी और 23 क्लस्टर डिपो शामिल हैं।इन डिपो में उच्च क्षमता वाले चार्जिंग स्टेशन, स्वचालित रखरखाव इकाइयाँ और ऊर्जा पुनर्चक्रण प्रणाली स्थापित की जा रही है।
‘छोटी बस, बड़ा असर’ — गलियों में दौड़ेंगी 9 मीटर की DEVi बसेंदिल्ली के मोहल्लों और तंग गलियों में अब 9 मीटर लंबी DEVi इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी।ये उन रूटों पर भी पहुँचेंगी जहाँ अब तक बड़ी सीएनजी बसें नहीं पहुँच पाती थीं।वर्तमान में दिल्ली में 5,000 बसें चल रही हैं, जो 426 शहर रूट, 12 एनसीआर रूट और 70 DEVi रूट कवर कर रही हैं।
IIT दिल्ली की मदद से स्मार्ट ट्रांजिट सिस्टम
दिल्ली सरकार ने IIT दिल्ली के साथ मिलकर बस संचालन को स्मार्ट शेड्यूलिंग मॉडल पर शिफ्ट किया है।अब बसों का टाइमटेबल रीयल-टाइम ट्रैफिक और यात्रियों की जरूरतों के हिसाब से बदला जा रहा है, ताकि लोगों को स्टॉप पर लंबा इंतज़ार न करना पड़े — खासकर बाहरी और रिहायशी इलाकों में।
‘स्वच्छ नदी से स्वच्छ हवा तक’ — पर्यावरणविदों ने सराहा
पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि दिल्ली और हरियाणा की यह दोहरी पहल —
यमुना में जल प्रवाह बढ़ाना और इलेक्ट्रिक बस बेड़े का विस्तार —
दिल्ली के पर्यावरणीय भविष्य की दिशा बदल सकती है।वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद रंजन ने कहा,यमुना को सांसें और सड़कों को हरियाली — यह दो मोर्चों पर एक ही दिशा में कदम है। अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति बनी रही, तो दिल्ली अगले पाँच वर्षों में भारत का सबसे पर्यावरण-संवेदनशील शहर बन सकती है।”
निष्कर्ष:
दिल्ली की नई पहचान — हरित राजधानी एक ओर यमुना की लहरों में स्वच्छता की चमक होगी,दूसरी ओर दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें पर्यावरण का संदेश देती नजर आएंगी।
छठ पूजा की आस्था और हरित विकास की नीति — दोनों मिलकर यह साबित कर रही हैं कि दिल्ली अब सिर्फ राजनीतिक राजधानी नहीं, बल्कि “पर्यावरणीय नवजागरण की राजधानी” बनने की ओर बढ़ रही है।
