जाले विधानसभा सीट पर गरमाई सियासत: भाजपा प्रत्याशी जीवेश मिश्रा का विवादित बयान, कांग्रेस के ऋषि मिश्रा को बताया ‘बाहरी’

बी के झा

NSK

दरभंगा / नई दिल्ली, 22 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा जिले की जाले विधानसभा सीट इस बार सियासी चर्चाओं के केंद्र में है। यहां भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री जीवेश मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी ऋषि मिश्रा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। दोनों उम्मीदवार अपने-अपने समर्थन को मजबूत करने के लिए क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं।

चुनावी रैलियों के बीच एक सभा के दौरान भाजपा प्रत्याशी जीवेश मिश्रा ने कांग्रेस उम्मीदवार पर बड़ा हमला बोलते हुए उन्हें “बाहरी प्रत्याशी” बताया। उनके इस बयान से सियासी माहौल और गर्मा गया है।

जीवेश मिश्रा का तंज: “जाले की किसी मां ने ऐसा बेटा पैदा नहीं किया…”मंत्री जीवेश मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा,कांग्रेस के उम्मीदवार ऋषि मिश्रा दूसरे क्षेत्र से आकर जाले विधानसभा में चुनाव लड़ रहे हैं।

हमारी पार्टी में तो यह नियम है कि चुनाव प्रभारी वही बनेगा जो अन्य विधानसभा क्षेत्र से हो। मगर आप सहरसा जिले के बलुआ से आकर जाले पर कब्जा करना चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा,जाले विधानसभा की किसी मां ने ऐसा बच्चा पैदा नहीं किया कि वह कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ सके। बाहर से आकर आप चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन अगर बेनीपुर से कोई ब्राह्मण का बेटा चुनाव प्रभारी बन जाए तो आपके पेट में दर्द होने लगता है।”मिश्रा ने इतना ही नहीं, बल्कि महागठबंधन पर भी तीखा प्रहार किया।

उन्होंने कहा कि‌ महागठबंधन अब ‘महागठबंधन’ नहीं बल्कि ‘लठबंधन’ बन गया है। ये लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। गौरबौराम विधानसभा में राजद के अफजल अली और वीआईपी के संतोष सहनी दोनों को सिम्बल दिया गया है। दरअसल, इन्हें जाले में भी दो प्रत्याशी खड़ा कर देना चाहिए था ताकि दो-दो हाथ हो जाते।”

स्थानीय मतदाताओं की प्रतिक्रिया: “दोनों के बीच कांटे की टक्कर”जीवेश मिश्रा के बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर पलटवार किया है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के मंत्री द्वारा ‘बाहरी’ शब्द का प्रयोग अनुचित है, क्योंकि संविधान किसी भी भारतीय नागरिक को किसी भी क्षेत्र से चुनाव लड़ने का अधिकार देता है।

वहीं, स्थानीय मतदाताओं का कहना है कि दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला कांटे का है। एक ओर भाजपा के जीवेश मिश्रा अपने मंत्री पद और संगठनात्मक पकड़ के बल पर मैदान में हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस के ऋषि मिश्रा अपने परिवार की पुरानी सियासी विरासत और विकास के मुद्दों के सहारे जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

विश्लेषकों और शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया

राजनीतिक विश्लेषकों ने मंत्री जीवेश मिश्रा के बयान पर व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि ऋषि मिश्रा को “बाहरी उम्मीदवार” कहा जा सकता है, तो फिर यह सवाल भी उठता है कि क्या मंत्री नीतीश मिश्रा झंझारपुर विधानसभा के “स्थानीय उम्मीदवार” हैं?

वहीं, एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा, मंत्री जीवेश मिश्रा शायद अहंकार में जी रहे हैं। राजनीति में जनता का मूड कब बदल जाए, यह कोई नहीं जानता।

भाजपा शीर्ष नेतृत्व को ऐसे बयानों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि इससे पार्टी की छवि पर असर पड़ सकता है।

”‘लठबंधन’ बयान से बढ़ी चुनावी गर्मी

मंत्री मिश्रा द्वारा महागठबंधन को ‘लठबंधन’ कहे जाने के बाद कांग्रेस और राजद नेताओं ने भाजपा पर चुनावी हताशा का आरोप लगाया है। दोनों दलों का कहना है कि भाजपा अपने घटते जनाधार से परेशान होकर इस तरह के बयानों के सहारे माहौल भटकाने की कोशिश कर रही है।

जाले विधानसभा में इस समय चुनावी सरगर्मी चरम पर है। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर जुबानी हमला बोल रहे हैं। जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि इस बार मुकाबला नतीजे आने तक रोमांचक बना रहेगा।

निष्कर्ष:

जाले विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के स्तर तक पहुंच चुका है। जहां भाजपा नेता जीवेश मिश्रा स्थानीयता के मुद्दे को उभारने की कोशिश में हैं,

वहीं कांग्रेस उम्मीदवार ऋषि मिश्रा विकास और जनता के सरोकारों पर चुनाव को केंद्रित रखना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि जनता किसकी बातों पर भरोसा जताती है।

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