जेल में बंद सांसद की अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट के दो जजों में मतभेद, अब चीफ जस्टिस करेंगे अंतिम फैसला—जानें पूरा मामला

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 7 नवंबर

दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक अनोखी स्थिति देखने को मिली, जब जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सांसद अब्दुल राशिद शेख उर्फ़ इंजीनियर राशिद की एक याचिका पर सुनवाई कर रही दो जजों की पीठ खुद दो राय में बंट गई। दोनों न्यायाधीशों द्वारा एक ही याचिका पर अलग-अलग निर्णय देने के बाद मामला अब हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के पास भेज दिया गया है, जो इस पर अंतिम आदेश देंगे।क्या थी सांसद राशिद की याचिका?तिहाड़ जेल में बंद इंजीनियर राशिद ने अदालत से उस आदेश में संशोधन की मांग की थी, जिसके तहत उन्हें संसद सत्र में भाग लेने के लिए जेल प्रशासन को करीब चार लाख रुपये का खर्च जमा कराने को कहा गया था। यह राशि सुरक्षा, यात्रा और निगरानी से जुड़े खर्च को कवर करने के लिए तय की गई थी।

सांसद राशिद ने तर्क दिया कि संसद सत्र में शामिल होना उनका संवैधानिक अधिकार है और इस यात्रा का खर्च केंद्र सरकार को उठाना चाहिए।पीठ में क्यों हुआ मतभेद?

डबल बेंच के दो जज—जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी—इस मुद्दे पर सहमत नहीं हो सके।जस्टिस भंभानी का मत:सरकार को एक निर्वाचित सांसद की संसद यात्रा का खर्च वहन करना चाहिए। उन्होंने राशिद की याचिका स्वीकार कर ली।

जस्टिस चौधरी की राय:आतंकवादी वित्तपोषण जैसे गंभीर आरोपों में आरोपी व्यक्ति के लिए सरकार पर यात्रा खर्च डालना उचित नहीं होगा। उन्होंने याचिका खारिज कर दी।जब दोनों न्यायाधीशों में कोई साझा निष्कर्ष नहीं निकला तो मामले को चीफ जस्टिस के पास भेजने का फैसला किया गया।

दोनों जजों ने क्या कहा?

फैसला सुनाते हुए दोनों जजों ने स्पष्ट कहा—”हम एक-दूसरे से सहमत नहीं हो पाए हैं। दो अलग-अलग फैसले दिए गए हैं, इसलिए उचित आदेश हेतु मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जा रहा है।”कौन हैं इंजीनियर राशिद?इंजीनियर राशिद कश्मीर की राजनीति में एक चर्चित नाम हैं। वर्तमान में वे 2017 के टेरर फंडिंग केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की गिरफ्त में हैं और 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं।

एनआईए की चार्जशीट के अनुसार:

उन पर अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को धन देने का आरोप हैसह-आरोपी व्यापारी जहूर वटाली की पूछताछ में उनका नाम सामने आया2022 में विशेष NIA अदालत ने उन पर यूएपीए, आईपीसी की धारा 120B, 121 और 124A के तहत आरोप तय किएइसके बावजूद राशिद ने 2024 का लोकसभा चुनाव तिहाड़ जेल से ही लड़कर राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला को लगभग दो लाख वोटों से पराजित किया, जो उस समय एक बड़ी खबर बन गई थी।

अगला कदम क्या?

अब निर्णय मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के हाथ में है। वे तय करेंगे कि:क्या सरकार सांसद राशिद की संसद यात्रा का खर्च उठाएगी,या तिहाड़ का पिछला आदेश ही लागू रहेगा जिसमें चार लाख रुपये जमा कराने होंगे।यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक तौर पर भी महत्व रखता है, क्योंकि यह सवाल उठाता है कि जेल में बंद एक निर्वाचित प्रतिनिधि की संसदीय जिम्मेदारियों को कैसे संतुलित किया जाए।

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