बी के झा
NSK

नई दिल्ली/सहारनपुर, 13 नवंबर
दिल्ली कार ब्लास्ट केस की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों ने जिस डॉ. अदील को सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित फेमस मेडिकेयर अस्पताल से गिरफ्तार किया था, उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन से कई अहम सुराग मिले हैं। इनसे यह साफ होता जा रहा है कि अदील ने जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन से ट्रेनिंग ली थी और सहारनपुर में अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया था।मौलवी इरफान ने कराई थी आतंकी ट्रेनिंग
जम्मू-कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस को मिली जानकारियों के अनुसार, अनंतनाग निवासी मौलवी इरफान, जो जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय सदस्य है, उसी ने डॉ. अदील को आतंकी संगठन से जोड़ा था।इरफान ने न केवल अदील को ट्रेनिंग दिलवाई, बल्कि उसे सहारनपुर भेजकर छिपने का ठिकाना भी तय किया।एजेंसियों का कहना है कि अदील ने अपनी पढ़ाई के दौरान कट्टरपंथी विचारों को अपनाया और धीरे-धीरे आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बन गया।
सहारनपुर बना अदील का ‘सेफ ज़ोन’जांच में सामने आया है कि अदील ने सहारनपुर को अपनी गतिविधियों का केंद्र बना लिया था। उसने पहले दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में काम किया, फिर अंबाला रोड के फेमस मेडिकेयर अस्पताल में नौकरी जॉइन की।
डॉक्टर की आड़ में वह यहां अंडरग्राउंड संपर्कों और नेटवर्क को मजबूत करता रहा।सूत्रों का कहना है कि अदील के कई करीबी सहयोगी अभी वेस्ट यूपी में छिपे हो सकते हैं, जिनकी पहचान और लोकेशन के लिए स्थानीय पुलिस की मदद ली जा रही है।
लैपटॉप और चैट्स से निकले खतरनाक क्लूडॉ. अदील के लैपटॉप और व्हाट्सएप चैट्स की जांच में कई कोडवर्ड्स, लोकेशन टैग्स और डिजिटल डॉक्स मिले हैं। इनसे पता चला है कि अदील दिल्ली, सहारनपुर और कश्मीर के बीच कई संदिग्ध संपर्कों में था।सूत्रों के मुताबिक, उसकी कई चैट्स जैश के ऑपरेटिव्स से जुड़ी मिली हैं, जिनमें ट्रेनिंग मॉड्यूल और फंडिंग पैटर्न के संकेत हैं।
अस्पतालों की लापरवाही से खुली प्रशासनिक खामियांअब इस मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है — अस्पतालों की लापरवाही।स्वास्थ्य विभाग ने पाया कि फेमस मेडिकेयर अस्पताल और वी ब्रॉस अस्पताल दोनों ने डॉ. अदील की नियुक्ति की जानकारी विभाग को नहीं दी थी, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है।सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने पुष्टि की है कि दोनों अस्पतालों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है, और अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।एजेंसियां सघन जांच में जुटींइस समय जम्मू-कश्मीर पुलिस, यूपी एटीएस, और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां मिलकर अदील के नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।
खास बात यह है कि पूरी कार्रवाई गोपनीय रखी जा रही है, ताकि बाकी संदिग्ध भाग न सकें।सूत्रों के अनुसार, इनपुट की पुष्टि के बाद कई ठिकानों पर छापेमारी की जा सकती है।
निष्कर्ष
डॉक्टर की आड़ में आतंक का चेहरा
एक तरफ डॉक्टर के रूप में लोगों की सेवा का व्रत, और दूसरी तरफ आतंक का रास्ता —
डॉ. अदील की दोहरी जिंदगी ने सबको चौंका दिया है।उसके लैपटॉप से निकली फाइलें और चैट्स अब इस बात का सबूत बन गई हैं कि आतंक का नेटवर्क कितनी गहराई से हमारे सिस्टम में पैठ बना रहा है।अब नजरें एजेंसियों पर हैं कि वे इस नेटवर्क को कितना जल्दी और कितनी गहराई तक तोड़ पाती है।
