बी के झा
NSK


पटना / मुजफ्फरपुर /नई दिल्ली, 30 अक्टूबर
बिहार की पावन धरती पर छठ पर्व की आस्था की लहर अभी थमी भी नहीं थी कि राजनीति ने अंगड़ाई ले ली। महापर्व के बाद आज बिहार की राजनीति में भी ‘प्रकाश’ फैल गया —
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुजफ्फरपुर से एनडीए के चुनावी अभियान का बिगुल फूंक दिया।मोतीपुर चीनी मिल मैदान में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आस्था, विकास और सुशासन —
तीनों के संगम से भरे भाषण में कहा,जो छठी मइया का अपमान करेगा, उसे बिहार माफ नहीं करेगा। जो लोग वोट के लिए हमारी माताओं की आस्था का मज़ाक उड़ाते हैं, वो जान लें — बिहार की आत्मा छठी मइया में बसती है। बिहार न झुका है, न झुकेगा।”मोदी की यह भावनात्मक अपील भीड़ में जोश और नारेबाज़ी के बीच गूंज उठी।
“बिहार का गौरव ही NDA की प्राथमिकता”मोदी ने कहा कि “बिहार का गौरव और बढ़ाना, उसकी संस्कृति को दुनिया के हर कोने तक पहुँचाना — यही NDA की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”
उन्होंने आगे जोड़ा —जब भारत ज्ञान-विज्ञान और अर्थव्यवस्था में अग्रणी था, तब उसमें बिहार की भूमिका सबसे अहम थी। इसलिए विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब बिहार विकास के शिखर पर होगा।”प्रधानमंत्री ने इस दौरान बिहार में हो रहे औद्योगिक विकास की झलक भी पेश की —
आज बिहार में रेल के इंजन बन रहे हैं, डेयरी के बड़े-बड़े प्लांट लग रहे हैं, मखाना दुनिया भर में जा रहा है। NDA के सुशासन का यही असर है कि बिहार अब पिछड़ेपन से निकलकर प्रगति की पटरी पर दौड़ रहा है।
“राजद-कांग्रेस की पहचान —
कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन और करप्शन”भाषण के अगले हिस्से में मोदी ने महागठबंधन पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा —
राजद-कांग्रेस की पहचान पाँच ‘क’ से है — कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन और करप्शन।”
प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी,जहां कट्टा चलता है, वहां कानून ठहर नहीं सकता। जहां क्रूरता राज करती है, वहां जनता का विश्वास टूट जाता है। ये वही लोग हैं जिन्होंने बिहार को कभी अराजकता की राह पर धकेल दिया था। अब ये फिर उसी दौर को लौटाने की साजिश कर रहे हैं।”कब मोदी ने कहा कि बिहार की जनता अब समझ चुकी है कि “विकास के रास्ते से भटकाना, आरजेडी-कांग्रेस की पुरानी राजनीति है, लेकिन अब बिहार का जनमानस उन्हें दूसरा मौका नहीं देगा।”
NDA का घोषणापत्र आज —
विकसित बिहार” पर फोकसआज ही एनडीए अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करने जा रहा है, जिसमें “विकसित बिहार, आत्मनिर्भर किसान और रोजगार सृजन” मुख्य एजेंडा रहेगा।मोदी ने कहा —बीते दस वर्षों में NDA सरकार ने बिहार को जो गति दी, वही आगे की दिशा तय करेगी। नए घोषणापत्र में हर वर्ग —
किसान, युवा, महिला और गरीब — के उत्थान का रोडमैप होगा।”
विपक्षी मैदान में हलचलवहीं, दूसरी ओर महागठबंधन और जन सुराज भी अपने-अपने मोर्चे पर सक्रिय हैं।सीतामढ़ी में आज नित्यानंद राय की सभा है, मधुबनी में तेज प्रताप यादव वोट मांगेंगे,और दरभंगा में तेजस्वी यादव तथा मुकेश सहनी संयुक्त रैली करेंगे।इधर प्रशांत किशोर का रोड शो भी दरभंगा की सड़कों पर उतरने वाला है।
यानि बिहार की सियासत अब अपने चरम पर है —हर नेता जनता की नब्ज़ टटोलने में जुटा है,और हर मंच से एक ही आवाज़ उठ रही है —“अबकी बार, बिहार का भविष्य दांव पर है।
निष्कर्ष
मुजफ्फरपुर की रैली ने यह साफ़ कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी इस चुनाव को सिर्फ़ राजनीतिक नहीं, आस्थात्मक और भावनात्मक युद्ध के रूप में भी लड़ रहे हैं।
उनके शब्दों में —छठ की मिट्टी में जो संस्कार हैं, वही बिहार की पहचान हैं।और जो इस पहचान पर वार करेगा, वो बिहार के दिल से मिट जाएगा।
बिहार की राजनीति अब उस निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है,जहां आस्था बनाम अवसरवाद और विकास बनाम वंशवाद
दोनों धाराएं आमने-सामने हैं।आने वाले दिनों में तय होगा कि छठी मइया के आशीर्वाद से बिहार किस दिशा में जाएगा —विकास की ओर या फिर अराजकता के पुराने दौर की ओर।
