बी के झा
NSK

नई दिल्ली/जम्मू/श्रीनगर, 10 जनवरी
गणतंत्र दिवस से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की एक और साजिश को भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे सांबा जिले के घगवाल क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से गिराई गई हथियारों की खेप बरामद कर ली गई है। यह बरामदगी केवल हथियारों की नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाले दुस्साहस की पोल खोलती है।बरामद सामग्री में दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 कारतूस, एक हैंड ग्रेनेड और अन्य आपत्तिजनक सामान शामिल है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन हथियारों का उद्देश्य गणतंत्र दिवस समारोह को बाधित करना और सीमावर्ती इलाकों में दहशत फैलाना था।संयुक्त कार्रवाई, सतर्कता और सफलता सीमा सुरक्षा बल (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) ने ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने के बाद शुक्रवार देर रात पलोरा गांव में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। एक नाले के किनारे पीले टेप में लिपटे संदिग्ध पैकेट को बम निरोधक दस्ते की मदद से सुरक्षित तरीके से खोला गया, जिसमें यह हथियार मिले।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अंतिम सूचना मिलने तक तलाशी अभियान जारी था और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
रक्षा विशेषज्ञ: “ड्रोन अब पाकिस्तान का नया हथियार बन चुका है”
वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) पी.के. मल्होत्रा कहते हैं:“ड्रोन के जरिए हथियार गिराना पाकिस्तान की हाइब्रिड वॉर रणनीति का हिस्सा है। जब सीधे घुसपैठ विफल हो गई, तब तकनीक का दुरुपयोग किया जा रहा है। भारत की जवाबी क्षमता अब पहले से कहीं अधिक मजबूत है।
”भारत सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि“सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा दोनों मोर्चों पर कोई ढील नहीं दी जाएगी। गणतंत्र दिवस को लेकर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है और किसी भी आतंकी प्रयास को जड़ से कुचल दिया जाएगा।”सरकार ने स्पष्ट किया कि ड्रोन रोधी तकनीक और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषक: “यह केवल सुरक्षा नहीं, राष्ट्र की प्रतिष्ठा का सवाल है”
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. आर.सी. मिश्र के अनुसार:“हर गणतंत्र दिवस से पहले इस तरह की साजिशें यह बताती हैं कि भारत का लोकतांत्रिक उत्सव आतंक के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य है। लेकिन हर बार इन प्रयासों का विफल होना पाकिस्तान की हताशा को उजागर करता है।
”शिक्षाविदों की दृष्टि
जेएनयू के अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ डॉ. नीरज पांडेय कहते हैं:“ड्रोन आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए भी एक नई चुनौती है। भारत को इसे वैश्विक मंचों पर आक्रामक ढंग से उठाना चाहिए।
”हिंदू संगठनों और धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया
विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि“यह हमला केवल सुरक्षा बलों पर नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, संविधान और गणतंत्र पर हमला है।”हरिद्वार से संत स्वामी परमानंद गिरी ने कहा:“जब देश का पर्व आता है, तब आतंक सिर उठाता है। यह अधर्म है और इसका उत्तर केवल एकजुट राष्ट्र ही दे सकता है।
”कानूनविद: “
ड्रोन आतंकवाद पर सख्त कानून जरूरी”
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देशमुख ने कहा:“ड्रोन के जरिए हथियार तस्करी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नया खतरा है। इसके लिए विशेष कानून और फास्ट-ट्रैक ट्रायल जरूरी हैं।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सुरक्षा बलों की तत्परता की सराहना करते हुए सरकार से सीमा सुरक्षा पर और संसाधन लगाने की मांग की। एक विपक्षी नेता ने कहा:“आतंक के खिलाफ लड़ाई में राजनीति नहीं, राष्ट्रीय एकता होनी चाहिए।”दूसरी ओर: कर्तव्य निभाते हुए दो कुलियों की शहादत इसी बीच उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास ढलान से फिसलकर गिरने से सेना के दो नागरिक कुलियों—लियाकत अहमद दीदार और इशाक अहमद खटाना—की मौत हो गई। दोनों चंदूसा (बारामूला) के निवासी थे।सेना के अनुसार, गुरुवार दोपहर एक अग्रिम क्षेत्र से फिसलकर वे नाले में गिर गए। इसके बाद श्रीनगर स्थित 15 कोर और नगरोटा की व्हाइट नाइट (16) कोर के समन्वय से व्यापक खोज एवं बचाव अभियान चलाया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना
रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि“नागरिक कुली सीमा पर तैनात सेना की रीढ़ होते हैं। उनका बलिदान भी उतना ही सम्माननीय है।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर में ड्रोन से हथियार गिराए जाने की घटना और सीमा पर सेवा करते नागरिक कुलियों की मौत—दोनों घटनाएं यह दर्शाती हैं कि भारत की सुरक्षा चुनौतियां बहु-आयामी हैं। लेकिन सतर्क सुरक्षा बल, मजबूत खुफिया तंत्र और राष्ट्रीय एकता के बल पर भारत हर साजिश को विफल करने में सक्षम है।यह केवल एक सुरक्षा समाचार नहीं, बल्कि भारत के गणतंत्र, संप्रभुता और संकल्प की परीक्षा है—
और हर बार की तरह, भारत इसमें खरा उतरता दिखाई दे रहा है।
