बी के झा
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पटना / न ई दिल्ली, 28 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी के बीच मंगलवार को महागठबंधन ने अपना बहुचर्चित घोषणापत्र जारी कर दिया।पटना के मौर्या होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घोषणा पत्र को भावनात्मक नाम दिया गया — “तेजस्वी प्रण”।
महागठबंधन के इस कार्यक्रम में आरजेडी, कांग्रेस, लेफ्ट दलों (सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई-एमएल), वीआईपी पार्टी और आईपी गुप्ता के संगठन के नेता मौजूद रहे।तेजस्वी यादव को सीएम और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित किया गया
महागठबंधन ने अपने घोषणा पत्र के साथ यह भी स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव इस चुनाव में मुख्यमंत्री पद के चेहरा होंगे, जबकि वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस के रूप में प्रस्तुत किया गया है।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा
—महागठबंधन ने सबसे पहले तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर भरोसा जताकर युवा बिहार की दिशा तय की है। यह घोषणापत्र सिर्फ कागज़ नहीं, बिहार के भविष्य की रूपरेखा है।”“
तेजस्वी प्रण” में क्या हैं
प्रमुख वादेघोषणापत्र में जनता से किए गए वादे विकास, रोजगार, सामाजिक न्याय और महिला सुरक्षा पर केंद्रित हैं। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं —सरकारी नौकरी का संकल्प: एक वर्ष में 10 लाख सरकारी पदों पर बहाली।पुरानी पेंशन योजना की बहाली: सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू की जाएगी।
महिलाओं के लिए सम्मान योजना: हर ब्लॉक में महिला हेल्प डेस्क, कार्यस्थलों पर सुरक्षा आयोग, और स्व-रोजगार योजनाओं की घोषणा।शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार: स्कूलों में शिक्षकों की व्यापक नियुक्ति, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सों की स्थायी बहाली।
कृषि राहत पैकेज: किसानों को ब्याजमुक्त ऋण और फसल बीमा के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी।युवाओं के लिए विशेष रोजगार पोर्टल: निजी और सरकारी नौकरियों के बीच समन्वय के लिए “युवा मिशन पोर्टल” की स्थापना।सीट बंटवारे की तस्वीर साफ
महागठबंधन ने सीटों का बंटवारा भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया —आरजेडी: 143 सीटेंकांग्रेस: 62 सीटेंवीआईपी पार्टी: 15 सीटेंसीपीआई-एमएल: 20 सीटेंसीपीएम: 6 सीटेंसीपीआई: 4 सीटेंआईपी गुप्ता की पार्टी: 3 सीटेंइस तरह गठबंधन कुल 253 सीटों पर साझा तालमेल के तहत चुनाव लड़ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषण:
“वादों की बारिश, लेकिन सच्चाई चुनाव के बाद ही सामने आएगी”
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार बिहार का चुनाव वादों की प्रतिस्पर्धा में बदल गया है। हर दल अपने घोषणा पत्र में ऐसे वादे कर रहा है जैसे उन्हें “अलाउद्दीन का चिराग” मिल गया हो।
एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा — “महागठबंधन ने रोजगार और पेंशन को केंद्र में रखकर युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच एक भावनात्मक मुद्दा छेड़ा है। लेकिन यह वादे कितने व्यवहारिक हैं, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। फिर भी, इसने चुनावी मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।”‘
तेजस्वी प्रण’ या ‘राजनीतिक प्रयोग’?महागठबंधन का यह घोषणापत्र तेजस्वी यादव के नेतृत्व की नई छवि पेश करता है — एक युवा नेता जो नौकरी, सामाजिक न्याय और अवसरों की बात कर रहा है।दूसरी ओर, बीजेपी-जेडीयू खेमे के रणनीतिकार इसे “लोकलुभावन और अव्यावहारिक” बताकर जनता को सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं।
निष्कर्ष
:बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर है। महागठबंधन के “तेजस्वी प्रण” ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। अब देखना यह है कि जनता के दिलों में यह घोषणापत्र कितना भरोसा और उम्मीद जगा पाता है।
