बी के झा
हाजीपुर ( पटना ) / नई दिल्ली, 25 अक्टूबर
बिहार की सियासत में एक बार फिर लालू परिवार के भीतर की दूरी सुर्खियों में है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा है कि वे अब कभी भी राजद (RJD) में वापसी नहीं करेंगे।
उन्होंने दो टूक कहा —RJD में लौटने से बेहतर मैं मौत को चुनूंगा। मेरे लिए सत्ता नहीं, सिद्धांत और आत्मसम्मान सर्वोपरि हैं।तेज प्रताप इस बार अपनी नई पार्टी “जनशक्ति जनता दल” (JJD) के बैनर तले मैदान में हैं और महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं — वही सीट जहाँ से उन्होंने 2015 में पहली बार जीत दर्ज की थी।
“महुआ की जनता मेरा परिवार है”तेज प्रताप ने कहा कि “महुआ की जनता सिर्फ मतदाता नहीं, मेरा परिवार है। मैं विधायक बनने से बहुत पहले से इस क्षेत्र से जुड़ा रहा हूं। जब मैं विधायक था, तब लोग खुश थे क्योंकि उनकी आवाज विधानसभा तक जाती थी। आज लोग कहते हैं कि उनकी सुनने वाला कोई नहीं।”उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल राज्य में 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और इसका चुनाव चिन्ह ‘ब्लैकबोर्ड’ है।
“तेजस्वी यादव पर पिता की छत्रछाया, हिम्मत है तो अकेले लड़ें”तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर अप्रत्यक्ष हमला बोलते हुए कहा —तेजस्वी यादव पिता लालू यादव की छत्रछाया में हैं। अगर उनमें हिम्मत है तो वे बिना पिता के सपोर्ट के चुनाव लड़कर दिखाएं।”उन्होंने कहा कि सत्ता उसी को मिलती है, जिसे जनता का आशीर्वाद प्राप्त हो, न कि विरासत में मिली कुर्सी के भरोसे।
“मैं सत्ता का भूखा नहीं, जनता की सेवा मेरा धर्म”तेज प्रताप ने पीटीआई से बातचीत में कहा —मैं सत्ता का भूखा नहीं हूं। मेरे लिए सबसे बड़ी बात जनता की सेवा करना है। मैं जो भी करता हूं, ईमानदारी से करता हूं और जनता मुझसे प्यार करती है, मुझ पर भरोसा करती है।
”उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए सत्ता का खेल नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है।
“माता-पिता का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है”नामांकन के समय तेज प्रताप ने अपनी दिवंगत दादी मरिचिया देवी की तस्वीर अपने साथ रखी थी।
उन्होंने कहा —मेरे पिता लालू प्रसाद भी राजनीति में दादी के आशीर्वाद से आगे बढ़े थे। जब मैं नामांकन भर रहा था, तो मैंने भी उन्हीं का आशीर्वाद लिया। पिता और माता से हाल में बात नहीं हुई, लेकिन मुझे पता है उनका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है।”
“तेजस्वी मेरा छोटा भाई है, उस पर सुदर्शन चक्र नहीं चलाऊंगा”तेज प्रताप ने कहा कि तेजस्वी यादव चाहे किसी भी दल में हों, वह उनका छोटा भाई है।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा —वह मेरा छोटा भाई है, उस पर मेरा आशीर्वाद हमेशा रहेगा। मैं उस पर सुदर्शन चक्र नहीं चला सकता।”महागठबंधन की ओर से तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने पर उन्होंने कहा कि राजनीति में तरह-तरह की घोषणाएँ होती रहती हैं, लेकिन सत्ता वही पाता है जिसे जनता का आशीर्वाद मिलता है।
“प्रशांत किशोर व्यापारी हैं, नेता नहीं”तेज प्रताप ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर भी तंज कसते हुए कहा —प्रशांत किशोर मूल रूप से व्यापारी हैं। वे संसाधन जुटाकर पार्टियों के लिए प्रचार अभियान चलाते हैं। वही काम वे अब भी कर रहे हैं।”
पारिवारिक राजनीति से बाहर निकलकर नई राह पर तेज प्रतापलालू परिवार की राजनीति में हमेशा छाए रहने वाले तेज प्रताप अब अपने “जनशक्ति जनता दल” के जरिए एक अलग पहचान गढ़ने की कोशिश में हैं।उन्होंने कहा —मैं परिवार की राजनीति नहीं, जनता की राजनीति करता हूं। मेरे लिए आत्मसम्मान और आदर्श सबसे पहले हैं।”
बिहार की इस गर्मागर्म चुनावी फिज़ा में तेज प्रताप का यह बयान सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और वैचारिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है — उस राजनीतिक परिवार के लिए, जिसकी पहचान ही ‘लालू राज’ रही है।
संपादकीय
तेज प्रताप यादव का यह बयान न केवल राजनीतिक विद्रोह है बल्कि एक आत्म घोषणा भी — कि वे सत्ता की राजनीति से अधिक ‘सिद्धांत की राजनीति’ में विश्वास रखते हैं। अब देखना यह है कि जनता उनके इस नए अवतार को कितना स्वीकार करती है।
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