दिल्ली की हवा ‘ज़हर’, राजधानी की साँसें उखड़ीं, AQI गंभीर श्रेणी में, कई इलाकों में 400 के पार, विपक्ष का हमला—“सरकार सो रही है”, डॉक्टरों की चेतावनी—“हेल्थ इमरजेंसी जैसी स्थिति”

बी के झा

NSK

नई दिल्ली , 23 नवंबर

दिल्ली–एनसीआर रविवार की सुबह एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में नजर आया। घनी धुंध की परत और आंखों में चुभन लिए हवा ने साफ संकेत दे दिया कि राजधानी की साँसें सामान्य नहीं रहीं। CPCB के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत AQI 381 रहा—जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी है।

वहीं बवाना का AQI 435, यानी सीधे ‘गंभीर’ (Severe) स्तर में, जिसने स्मॉग की परत को और घना कर दिया।इसी तरह आनंद विहार में 429, पंजाबी बाग में 411, आरके पुरम में 397, चांदनी चौक में 390 तथा इंडिया गेट–कर्तव्य पथ पर AQI 388 दर्ज किया गया।राजधानी में GRAP-IV लागू होने के बावजूद प्रदूषण में सुधार न दिखना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।

GRAP पर सवाल: नियम सख्त, हवा बदतर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने शनिवार को GRAP में बड़े बदलाव किए।जहाँ पहले कई कड़े प्रावधान केवल स्टेज-4 में थे, अब उन्हें स्टेज-3 में स्थानांतरित कर दिया गया है।अब स्टेज-3 में शामिल प्रमुख प्रावधान—

सरकारी व निजी कार्यालयों में 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति

सरकारी कार्यालयों की टाइमिंग में स्लॉट आधारित बदलाव

दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा सहित पूरे NCR में नई पॉलिसी लागू करने की तैयारीपहले चरण में ही—

बिजली की अबाधित सप्लाई सुनिश्चित

डीजल जेनरेटर के प्रयोग पर रोक

मेट्रो और बसों के फेरे बढ़ाने के निर्देश

मीडिया के जरिए आम जनता को एडवाइजरी जारी में बदलाव सुप्रीम कोर्ट में 17 नवंबर को हुई सुनवाई के बाद किए गए, जहां अदालत ने AQI की भयावह स्थिति पर चिंता जताई थी।

डॉक्टरों की चेतावनी—“दिल्ली हेल्थ इमरजेंसी के करीब”AIIMS और सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने राजधानी की हवा को “गंभीर स्वास्थ्य संकट” बताया है।एक पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार—“इस स्तर की हवा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दमा के मरीजों के लिए बेहद घातक है।यदि यह स्तर 48 घंटे भी बना रहा तो यह स्वास्थ्य आपदा में बदल सकता है।”डॉक्टरों ने लोगों को– सुबह–शाम बाहर न निकलने,– N95 मास्क अनिवार्य करने,– एयर-प्यूरीफायर का प्रयोग बढ़ाने की सलाह दी है।

विपक्ष का हमला:

‘दिल्ली सरकार-केन्द्र केवल बयानबाज़ी कर रहे’‌

प्रदूषण पर नियंत्रण न होते देख विपक्ष ने सरकारों पर खूब निशाना साधा।BJP पर AAP का आरोप“दिल्ली सरकार केवल आरोप-प्रत्यारोप में लगी है। न सड़कें साफ हुईं, न धूल उड़ी कम हुई, न पराली समाधान मिला।”एक अन्य AAP नेता ने कहा—“GRAP सिर्फ कागज़ों में लागू है, जमीन पर कुछ नहीं। आम जनता का दम घुट रहा है।”केन्द्र पर AAP का पलटवार‌ AAP के प्रवक्ता बोले—“केंद्र सरकार NCR के सभी राज्यों पर समान दबाव नहीं डालती। समस्या क्षेत्रीय नहीं, क्षेत्रीय राजनीति की है।

न्यायपालिका की चिंता:

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है—“दिल्ली की हवा बच्चों को जहरीली गैस चेंबर में बदल रही है। सरकारें कार्रवाई की जगह एक-दूसरे पर दोष डालने में लगी हैं।”19 नवंबर की सुनवाई में कोर्ट ने कहा—“केवल आकड़ों से प्रदूषण नहीं घटेगा। जमीनी काम दिखाई देना चाहिए।”

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रदूषण दिल्ली–NCR की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता बन गया है।राजनीतिक विश्लेषक रजत रॉय का मत—“हर साल GRAP, हर साल चेतावनी, हर साल AQI 400 के पार—यह बताता है कि समस्या का मूल कारण अभी भी अनछुआ है।राजनीति और प्रशासनिक ढिलाई की संयुक्त असफलता इसका कारण है।”एक अन्य विश्लेषक ने कहा—“NCR में चार राज्यों और केंद्र की अलग-अलग सरकारें हैं—इसलिए एक केंद्रीय नीति बिना राजनीतिक संघर्ष के लागू होना लगभग असंभव है।

निष्कर्ष:

दिल्ली की सांसें SOS परदिल्ली आज फिर वही सवाल पूछ रही है—कब मिलेगी साफ हवा?

नियम बनते जा रहे हैं, प्रावधान बदल रहे हैं, अदालत डांट रही है, डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं—पर राजधानी की सांसें अभी भी धुंध की गिरफ्त में कैद हैं।यदि प्रशासनिक समन्वय, NCR राज्यों की संयुक्त कार्रवाई और राजनीतिक ईमानदारी नहीं दिखाई गई, तो दिल्ली की यह धुंध जल्द ही संपूर्ण ‘हेल्थ इमरजेंसी’ का रूप ले सकती है।

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