दिल्ली के स्कूलों में फिर बजेगी ‘सायरन की घंटी’—छात्र होंगे डिज़ास्टर ब्रिगेड के सिपाही, राजधानी में शुरू हुआ देश का सबसे बड़ा स्कूल सेफ्टी कैंपेन

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 2 दिसंबर

राजधानी दिल्ली एक बार फिर बच्चों को आपदा प्रबंधन की वास्तविक तैयारी सिखाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। पूसा रोड स्थित स्प्रिंगडेल्स स्कूल से मंगलवार को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘डिज़ास्टर रेडी स्कूल कैंपेन’ की भव्य शुरुआत की। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के संयुक्त प्रयास से शुरू हुआ यह अभियान देश में स्कूल सुरक्षा की दिशा में सबसे व्यापक और दूरगामी पहल माना जा रहा है।पहला चरण: दो दिन चलेगा स्ट्रक्चरल ट्रेनिंग व मॉक ड्रिल अभियानअभियान के प्रथम चरण में दिल्ली के सभी सरकारी, सरकारी-सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों मेंदो दिन की स्ट्रक्चरल ट्रेनिंग,मॉक ड्रिल,सुरक्षा ऑडिट,और आपदा प्रतिक्रिया अभ्यास आयोजित किए जाएंगे।इसका उद्देश्य है—

बच्चों को दुर्घटना, भूकंप, आग, हीट वेव, भवन ढहने और जलभराव जैसी स्थितियों में सही प्रतिक्रिया सिखानाशिक्षकों व वॉलंटियर्स को व्यावहारिक प्रशिक्षण देनास्कूलों की संरचनात्मक कमियों को पहचानकर तत्काल सुधार सुनिश्चित करनाएलजी सक्सेना बोले—“दिल्ली भूकंप ज़ोन-4 का हिस्सा, तैयारी अनिवार्य”कार्यक्रम में भूकंप सुरक्षा ड्रिल और ड्रॉप–कवर–होल्ड का लाइव डेमो देखकर उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा:“दिल्ली भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। आग, हीट वेव, फ्लडिंग और भी कई जोखिम राजधानी को और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। ऐसे में बच्चों को बचाव तकनीक सिखाना समय की सबसे बड़ी मांग है।

”उन्होंने बताया कि दिल्ली के साढ़े पाँच हजार स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जाएगा, ताकि हर स्कूल “डिज़ास्टर रेडी” बन सके।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता—“बच्चे बनेंगे सुरक्षा संस्कृति के दूत”मुख्यमंत्री ने बच्चों को इस अभियान का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बताते हुए कहा—“जैसे स्वच्छता अभियान में बच्चों ने पूरे देश की सोच बदली, वैसे ही अब वे आपदा सुरक्षा की आदतें अपने परिवार और समाज तक पहुँचाएँगे।”उन्होंने भूकंप के दौरान ड्रॉप, कवर और होल्ड तकनीक पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा—“

भूकंप एक अचानक आने वाली आपदा है। पल भर की सही प्रतिक्रिया कई ज़िंदगियाँ बचा सकती है।”मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रेज़ेंस ऑफ माइंड को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सुरक्षा को दैनिक आदत बनाया जाना चाहिए।आशीष सूद की बड़ी घोषणा—

‘दिल्ली बनेगी डिज़ास्टर रेडी कैपिटल’दिल्ली के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह सिर्फ स्कूलों की नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा यात्रा की दिशा में एक मील का पत्थर है।उन्होंने कहा—“हमारा लक्ष्य है कि दिल्ली का हर स्कूल—चाहे वह सरकारी हो, एनडीएमसी हो, एमसीडी हो या प्राइवेट—आपदा से निपटने में पूरी तरह सक्षम हो।”सूद ने बताया कि:छह शैक्षिक जिलों में लाखों छात्रहजारों अध्यापक फायर सर्विस, सिविल डिफेंस, ‘आपदा मित्र’और DDMA टीमेंएक विशाल नेटवर्क की तरह इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुँचाएंगे।दिल्ली के लिए यह अभियान क्यों है महत्वपूर्ण?—एक विश्लेषण सिस्मिक ज़ोन-4: दिल्ली उच्च भूकंप जोखिम वाले क्षेत्र में आता हैउच्च जनसंख्या घनत्व: एक छोटी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती हैस्कूलों की बड़ी संख्या: पाँच हज़ार से अधिक शिक्षण संस्थान सीट वेव और फ्लडिंग का बढ़ता खतरा: जलवायु परिवर्तन ने जोखिमों को बढ़ाया है

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चों को शुरुआती उम्र से प्रशिक्षण मिल जाए, तो बड़ा हादसा होने पर जानहानि को 40–60% तक कम किया जा सकता है।समापन—भविष्य का ‘सेफ्टी मॉडल’ बनेगी

राजधानी दिल्ली सरकार और NDMA–DDMA की यह संयुक्त पहल अब सिर्फ अभियान नहीं, बल्कि राजधानी के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट की तरह देखी जा रही है।मॉक ड्रिल और सुरक्षा प्रशिक्षण अगर नियमित रूप से स्कूल संस्कृति का हिस्सा बन जाए, तो आने वाले समय में दिल्ली देश को स्कूल सेफ्टी का सबसे सफल मॉडल दे सकती है।

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