बी के झा
NSK

नई दिल्ली / फरीदाबाद, 13 नवंबर
दिल्ली में 10 नवंबर को हुए लाल किला ब्लास्ट के बाद जांच का दायरा अब शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँच गया है। इसी कड़ी में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) ने बड़ा कदम उठाते हुए फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है।AIU ने विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी और निर्देश दिया कि यूनिवर्सिटी अब AIU का नाम या लोगो कहीं भी इस्तेमाल नहीं कर सकती। साथ ही, संघ ने साफ कहा है कि यूनिवर्सिटी अपनी वेबसाइट और आधिकारिक दस्तावेजों से AIU का लोगो तुरंत हटा दे।
क्यों रद्द की गई सदस्यता
भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने कहा कि संघ के उपनियमों के अनुसार, किसी भी विश्वविद्यालय की सदस्यता तभी तक रहती है जब तक वह “अच्छी स्थिति (Good Standing)” में माना जाता है।AIU ने अपने बयान में कहा —मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह सामने आया है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय अच्छी स्थिति में नहीं है। इसलिए उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाती है।”संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि अब यह संस्थान AIU के नाम या प्रतीक (logo) का किसी भी तरह इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत नहीं है।
जांच के घेरे में विश्वविद्यालयदिल्ली ब्लास्ट की जांच में यह विश्वविद्यालय भी शक के दायरे में आया है। जांच एजेंसियों को कुछ संदिग्धों का अल-फलाह यूनिवर्सिटी से संबंध होने की जानकारी मिली है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय के सभी रिकॉर्ड की फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और अन्य वित्तीय जांच एजेंसियों को भी इस विश्वविद्यालय के फंड और लेन-देन की जांच करने को कहा गया है।
उच्च स्तरीय बैठक के बाद फैसला
यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद की गई, जिसमें 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट की जांच की समीक्षा की गई थी। बैठक में यह माना गया कि अगर किसी शैक्षणिक संस्था से भी संदिग्ध गतिविधियों का संबंध सामने आता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि
फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी हरियाणा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक निजी विश्वविद्यालय है। लेकिन दिल्ली धमाके के बाद से यह संस्था जांच एजेंसियों के निशाने पर है।वर्तमान में जांच टीमें यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस यूनिवर्सिटी के संसाधनों, खातों या छात्रों का किसी आतंकी नेटवर्क से कोई सीधा या परोक्ष संबंध है।
निष्कर्ष
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द किए जाने का फैसला यह संदेश देता है कि केंद्र सरकार और एजेंसियां अब किसी भी स्तर पर लापरवाही या संदिग्ध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगी।दिल्ली ब्लास्ट की जांच जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उससे यह साफ है कि सरकार इस बार पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए तैयार है।
