बी के झा
NSK


नई दिल्ली, 22 नवंबर
राजधानी दिल्ली में पुलिस क्राइम ब्रांच ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क की जड़ों को हिला दिया। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर चल रहे इस रैकेट के जरिए तुर्की और चीन में बनी हाई-टेक पिस्टलें ड्रोन के माध्यम से भारत भेजी जाती थीं। इन हथियारों को पंजाब के रास्ते दिल्ली और एनसीआर में सक्रिय कुख्यात गैंग—लॉरेंस बिश्नोई, बमबीहा, गोगी और हिमांशु भाऊ—तक पहुंचाने की तैयारी थी।लेकिन इससे पहले कि ये बंदूकें किसी बड़ी वारदात में इस्तेमाल होतीं, दिल्ली पुलिस ने रोहिणी में जाल बिछाकर इस पूरे नेटवर्क को झकझोर दिया।
कैसे पकड़ा गया हथियारों का यह बड़ा जखीरा?
क्राइम ब्रांच को इनपुट मिला कि कुछ तस्कर दिल्ली में बड़ी सप्लाई देने आ रहे हैं।पुलिस ने मौके पर ट्रैप लगाया और रोहिणी इलाके से चार तस्करों को गिरफ्तार कर लिया।इनके पास से बरामद हुआ:10 विदेशी हाई-एंड पिस्टल 92 जिंदा कारतूस चीन और तुर्की निर्मित आधुनिक हथियार गैंगस्टर संपर्कों की डिटेल पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, यह खेप पंजाब में ड्रोन से गिराई गई थी। तस्करों ने इन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों से उठाया और दिल्ली तक पहुंचाने की कोशिश की।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं: मनदीप (फगवाड़ा, पंजाब) — कुख्यात अपराधी, हत्या सहित दर्जनों केस
रोहन तोमर (बागपत, यूपी) — गोगी गैंग से पुराना नाता
मोनू (यूपी) — सप्लाई चैन का हिस्सा एक अन्य सहयोगी, जो डिलीवरी नेटवर्क संभालता था पुलिस के अनुसार, मनदीप सोनू खत्री गैंग से जुड़ा है, जबकि रोहन तोमर पहले भी अवैध हथियार सप्लाई के केस में यूपी STF से पकड़ा जा चुका है।ड्रोन रूट और ISI की नई रणनीति जांच में सामने आया कि—पाकिस्तान में ISI से जुड़े लोग हथियार पहले PAK में जमा करते वहां से ड्रोन के जरिए भारत भेजते हथियारों को कार्बन पेपर में लपेटा जाता था ताकि वे स्कैनर में पकड़ में न आएं
सीमा पार तय ड्रॉप प्वाइंट पर तस्करों की टीम उन्हें उठा लेतीदिल्ली क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने कहा:यह एक हाई-टेक तस्करी रैकेट है जिसमें ड्रोन, एन्क्रिप्टेड चैट और विदेशी हथियारों का इस्तेमाल हो रहा था।”
किंगपिन बैठा है अमेरिका में—भारत विरोधी नेटवर्क की कड़ी उजागर पुलिस की जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि इस पूरे रैकेट का मुख्य संचालक जसप्रीत उर्फ जस्सा, अमेरिका में बैठकर ऑपरेशन चला रहा था।वह पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से सीधा जुड़ा था और भारत में ड्रोन-ड्रॉप लोकेशन तस्करों को भेजता था।जस्सा ही यह तय करता था कि—हथियार कब और कहां गिराने हैं कौन उठाएगा किस गैंग तक भेजने हैं-यह पूरा नेटवर्क अमेरिका–पाकिस्तान–भारत में फैली कड़ी को दिखाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया—“गैंगस्टर + सीमा पार नेटवर्क = नई चुनौती”इस घटनाक्रम पर कई राजनीतिक विश्लेषकों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा:यह सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि संगठित अपराध और सीमा पार आतंक का गठजोड़ है। गैंगस्टर और विदेशी एजेंसियों का मिलना भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।”
एक राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ ने टिप्पणी की:ड्रोन-आधारित हथियार तस्करी पाकिस्तान की नई रणनीति है। यह सैन्य और आतंकी दोनों क्षेत्रों में हाइब्रिड वारफेयर के संकेत हैं।”
तीन संभावित टारगेट की पहचान—बड़ा खतरा टलापुलिस ने खुलासा किया है कि गिरफ्तार तस्करों के पास से तीन संभावित टारगेटों की जानकारी मिली है।यह संकेत है कि हथियारों का उपयोग किसी बड़ी वारदात में होने वाला था।लाल किले धमाके के बाद एजेंसियां सतर्क—
हर गतिविधि पर नज़र10 नवंबर को लाल किले के पास हुए धमाके, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी, के बाद से एजेंसियां हाई-अलर्ट पर हैं।इस तस्करी नेटवर्क के पकड़ में आने से साफ है कि—गैंगस्टर,इंटरनेशनल हथियार तस्कर और पाकिस्तान समर्थित तत्व एक साथ मिलकर बड़े हमले की तैयारी कर रहे थे।
निष्कर्ष:
एक बड़ी वारदात टली, पर खतरा अभी खत्म नहीं दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि—भारत में गैंग युद्ध पाकिस्तान का ISI नेटवर्क और विदेशी हथियार सप्लाई चेनअब एक ही प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं।
ड्रोन का इस्तेमाल, विदेशी हथियार और बहु-देशीय नेटवर्क—यह बताता है कि देश के सामने नई तरह की चुनौती खड़ी हो चुकी है।जांच एजेंसियां अब इस रैकेट की पूरी कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, और आने वाले दिनों में और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
