दिल्ली-शंघाई सीधी उड़ान की वापसी: क्या यह केवल विमान सेवा है या बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का संकेत?

बी के झा

बीजिंग/नई दिल्ली , 2 फरवरी

अमेरिका के साथ बढ़ते रणनीतिक तनाव और वैश्विक भू-राजनीति में तेज़ बदलावों के बीच भारत और चीन के संबंधों में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। लगभग छह वर्षों के अंतराल के बाद एयर इंडिया ने दिल्ली–शंघाई के बीच सीधी उड़ान सेवा बहाल कर दी है। पहली उड़ान बोइंग 787 ड्रीमलाइनर से शंघाई के पुडोंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी, जिसमें 230 से अधिक यात्री सवार थे।शंघाई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास के अनुसार, यह कदम भारत–चीन के बीच निलंबित पड़े हवाई संपर्क को सामान्य करने की दिशा में एक ठोस शुरुआत है।

गौरतलब है कि 2020 में कोविड-19 महामारी और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के चलते दोनों देशों के बीच यात्री उड़ानें ठप हो गई थीं।

कूटनीतिक संकेत: ‘सॉफ्ट नॉर्मलाइज़ेशन’ की शुरुआत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उड़ान सेवा केवल परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संकेत भी है। वरिष्ठ रणनीतिक मामलों के जानकार प्रो. (डॉ.) अरविंद मेनन के अनुसार, “भारत और चीन फिलहाल बड़े समझौतों से पहले छोटे भरोसेमंद कदम उठा रहे हैं। सीधी उड़ानों की बहाली उसी क्रम में ‘लो-रिस्क कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेज़र’ है।”

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिका–चीन तनाव, ताइवान मुद्दा और इंडो-पैसिफिक में बदलते समीकरणों के बीच बीजिंग यह संकेत देना चाहता है कि वह नई दिल्ली के साथ रिश्तों में पूरी तरह टकराव की नीति नहीं अपनाना चाहता।

कानूनी और संस्थागत दृष्टिकोण

प्रख्यात कानूनविद और अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ एडवोकेट सीमा राघवन कहती हैं, “हवाई संपर्क बहाल होना द्विपक्षीय समझौतों और नागरिक उड्डयन नियमों के पुनर्सक्रिय होने का संकेत है। यह निवेश, वीज़ा, शिक्षा और व्यावसायिक अनुबंधों से जुड़े कई लंबित मामलों को भी गति देगा।”उनके अनुसार, यह कदम भविष्य में व्यापारिक विवादों के वैधानिक समाधान और संस्थागत संवाद को भी आसान बना सकता है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: सतर्क समर्थन

विपक्षी दलों ने इस पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन सरकार से स्पष्टता भी मांगी है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “लोगों के आपसी संपर्क बढ़ना सकारात्मक है, लेकिन सीमा पर यथास्थिति और सैनिकों की वापसी जैसे मुद्दों पर सरकार को कोई भी नरमी बरतने से पहले संसद को विश्वास में लेना चाहिए।

”वहीं वाम दलों का कहना है कि आर्थिक और सांस्कृतिक संपर्क बहाल होना शांति की दिशा में सही कदम है, बशर्ते इसे ‘रणनीतिक आत्मनिर्भरता’ के साथ संतुलित रखा जाए।

रक्षा विशेषज्ञों की राय: ज़मीन पर हालात अभी निर्णायक नहीं

रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आर.के. मल्होत्रा के मुताबिक, “हवाई सेवा बहाली का सैन्य गतिरोध से सीधा संबंध नहीं जोड़ा जाना चाहिए। एलएसी पर विश्वास बहाली के लिए अभी और ठोस कदमों की जरूरत है।”हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि नागरिक स्तर पर संपर्क बढ़ने से ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को बल मिलता है, जो लंबे समय में तनाव कम करने में सहायक हो सकता है।

आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव

व्यापार विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिल्ली–शंघाई सीधी उड़ान से आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और स्टार्टअप सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। शंघाई और दिल्ली जैसे दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा आसान और अपेक्षाकृत किफायती होने से व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों, छात्रों और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।

भारतीय महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने उड़ान के शुभारंभ पर कहा कि यह सेवा “लोगों से लोगों के संपर्क, व्यापार, पर्यटन और संस्थागत सहयोग को नई ऊर्जा देगी।

”निष्कर्ष:

उड़ान से आगे की राह

दिल्ली–शंघाई उड़ान की बहाली भारत–चीन संबंधों में धीमे लेकिन नियंत्रित सामान्यीकरण की ओर इशारा करती है। यह न तो किसी बड़े राजनीतिक समझौते का विकल्प है और न ही सीमा विवाद का समाधान, लेकिन यह ज़रूर बताती है कि दोनों देश पूर्ण टकराव के बजाय व्यावहारिक सह-अस्तित्व की राह तलाश रहे हैं।

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह ‘सपनों की उड़ान’ केवल आसमान तक सीमित रहती है या ज़मीन पर भी रिश्तों की दिशा बदलने में भूमिका निभाती है।

NSK

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