बी के झा
पटना / न ई दिल्ली, 2 फरवरी
पटना अब केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक राजधानी भर नहीं रहेगा, बल्कि गंगा के जरिए जलमार्ग आधारित औद्योगिक गतिविधियों का भी केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। केंद्रीय बजट में की गई घोषणा के बाद पटना के दीघा क्षेत्र में गंगा नदी के तट पर 300 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने कुर्जी के सामने गंगा किनारे करीब पांच एकड़ भूमि पहले ही आवंटित कर दी है।
जलमार्ग को मिलेगी नई ताकत
इस परियोजना के पूरा होने के बाद बिहार में जलमार्ग से माल ढुलाई और पर्यटन दोनों को नई गति मिलने की उम्मीद है। अभी तक गंगा में चलने वाले जहाजों की मरम्मत के लिए उन्हें कोलकाता या वाराणसी भेजना पड़ता था, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ जाते थे। दीघा में मरम्मत केंद्र खुलने के बाद न सिर्फ पटना और आसपास चलने वाले जहाजों, बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक के जहाजों की मरम्मत यहीं संभव होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इससे हजारों रुपये के अतिरिक्त खर्च की बचत होगी और जलमार्ग को सड़क व रेल परिवहन के एक मजबूत विकल्प के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
एक साथ चार जहाजों की मरम्मत की सुविधा
प्रस्तावित जहाज मरम्मत केंद्र में अत्याधुनिक लिफ्ट सिस्टम लगाया जाएगा, जिसके माध्यम से जहाजों को गंगा नदी से बाहर निकालकर मरम्मत क्षेत्र में रखा जाएगा। एक बार में चार जहाजों की मरम्मत की सुविधा होगी। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद जहाजों को फिर से उसी तकनीक से गंगा में उतारा जाएगा।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
वर्तमान में गंगा में करीब 50–60 छोटे-बड़े जहाज संचालित हो रहे हैं, जिनका परिचालन बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में होता है। मरम्मत सुविधा के अभाव में सरकारी विभागों और निजी निवेशकों की रुचि सीमित थी। अब इस केंद्र के बनने से न केवल जहाजों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है—जिसमें तकनीकी कर्मी, इंजीनियर, वेल्डर, मैकेनिक, सप्लाई चेन और पर्यटन से जुड़े लोग शामिल होंगे।
राजनीतिक विश्लेषक: विकास की दिशा में प्रतीकात्मक कदम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दीघा में जहाज मरम्मत केंद्र की घोषणा केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि बिहार को जलमार्ग आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ने की रणनीतिक पहल है। उनके अनुसार, “यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए विकास का प्रतीक बनेगी, खासकर ऐसे समय में जब बिहार को औद्योगिक निवेश के नए मॉडल की जरूरत है।”
शिक्षाविद: कौशल विकास से जोड़ी जाए योजना
शिक्षाविदों का कहना है कि जहाज मरम्मत केंद्र तभी दीर्घकालिक लाभ देगा, जब इसे तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ा जाए। आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों में मरीन टेक्नोलॉजी, वेल्डिंग और मैकेनिकल में विशेष प्रशिक्षण शुरू किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के साथ रोजगार मिल सके।
विपक्ष की आपत्ति: घोषणा बनाम जमीन पर अमल
विपक्षी दलों ने परियोजना का स्वागत करते हुए भी सरकार से जवाबदेही की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि “बजट घोषणाओं की सूची लंबी होती है, लेकिन बिहार में कई परियोजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पातीं। सरकार को स्पष्ट टाइमलाइन, पर्यावरणीय सुरक्षा और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।”
पर्यटन और माल ढुलाई को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज मरम्मत केंद्र बनने से गंगा पर्यटन, क्रूज सेवा और धार्मिक यात्राओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही जलमार्ग से माल ढुलाई बढ़ने से सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा।
निष्कर्ष:
गंगा के किनारे नई औद्योगिक कहानी
दीघा में प्रस्तावित जहाज मरम्मत केंद्र बिहार के लिए केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि रोजगार, परिवहन और पर्यटन को जोड़ने वाली नई औद्योगिक कहानी की शुरुआत हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषणाएं कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता से जमीन पर उतरती हैं।
अगर ऐसा हुआ, तो गंगा एक बार फिर बिहार की अर्थव्यवस्था की धड़कन बन सकती है।
NSK

