दुबई कनेक्शन की गूंज”! अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संचालक जवाद सिद्दीकी की कमाई विदेश में लगने के आरोप, ठिकाने पर उठे सवाल

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 17 नवंबर

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संचालक जवाद अहमद सिद्दीकी को लेकर नई सूचनाओं ने शिक्षण जगत और प्रशासन दोनों को चौंका दिया है। लंबे समय से शिक्षा के नाम पर करोड़ों की कमाई करने वाले सिद्दीकी के बारे में सूत्रों का दावा है कि उन्होंने न सिर्फ दुबई में बड़ा रियल एस्टेट साम्राज्य खड़ा किया, बल्कि अपना परिवार भी कुछ महीने पहले वहीं शिफ्ट कर दिया।

अब आशंका यह है कि वे खुद भी दुबई में हैं—हालाँकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।इंजीनियरिंग बंद, मेडिकल केंद्र में—्पै

से के पीछे बदली रणनीति अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज को विश्वविद्यालय में बदले जाने और मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद जवाद सिद्दीकी की कार्यशैली में बड़ा बदलाव दिखाई दिया।

सूत्रों के अनुसार—इंजीनियरिंग, JBT, डिप्लोमा जैसे सस्ते कोर्सों को बंद किया गया,क्योंकि इनसे सीमित कमाई होती थी।एमबीबीएस को प्राथमिकता दी गई, जहाँ एक छात्र पर एक करोड़ रुपये तक खर्च दिखाया जाता है और फीस भी उसी स्तर की होती है।यानी संस्था का रुख स्पष्ट रूप से “लो-वॉल्यूम, हाई-प्रॉफिट” मॉडल की ओर मुड़ गया।‘स्टेशनरी से लेकर बागवानी तक, हर खर्च पर उनकी मंजूरी

’सूत्र बताते हैं कि सिद्दीकी शुरू से ही पैसों को लेकर अत्यंत सतर्क रहे।

यहाँ तक कि—स्टेशनरी खरीदने से पहले भी उनकी व्यक्तिगत मंजूरी अनिवार्य थी।निर्माण कार्य, बागवानी और छोटे से छोटे खर्च पर भी उनकी सीधी नज़र रहती थी।लेकिन मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिलने के बाद जैसे ही भारी धन प्रवाह शुरू हुआ, उनके व्यवहार में भी भारी बदलाव देखने को मिला।

दुबई में रियल एस्टेट बिज़नेस खड़ा किया; घर भी वहीं बनायाआर्थिक स्रोतों की तेज़ी से बढ़ोतरी के साथ ही सिद्दीकी ने कारोबार का दायरा देश से बाहर बढ़ाया।सूत्रों के मुताबिक

—उन्होंने दुबई में रियल एस्टेट कारोबार शुरू किया,वहाँ प्रॉपर्टी खरीदी,फिर अपना घर बनवाकर परिवार को स्थायी रूप से वहां शिफ्ट कर दिया।ऐसे में सवाल उठता है—क्या सिद्दीकी भारत में आय के स्रोत मजबूत कर विदेश में निवेश का आधार खड़ा कर रहे थे?

किसानों से ज़मीन विवाद—रकबा 30 एकड़ से बढ़कर 100 एकड़ तक!जवाद सिद्दीकी का नाम सिर्फ शिक्षा जगत में ही नहीं, बल्कि जमीन विवादों में भी लगातार सामने आता रहा है।स्थानीय किसानों का आरोप है कि—

सिद्दीकी ने सरकारी रास्तों पर कब्जा किया,जिसकी शिकायत किसानों ने प्रशासन तक पहुंचाई,लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।किसानों का कहना है कि रास्ता बंद होने से खेती-बाड़ी और खेतों तक पहुँच मुश्किल हो गई।आरोप यह भी है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाकर सिद्दीकी ने आस-पास की जमीनों पर दबाव बनाकर रकबा 30 एकड़ से बढ़ाकर लगभग 100 एकड़ कर लिया।

प्रशासन की चुप्पी, सवालों की गूँज

सिद्दीकी के ठिकाने, उनकी वास्तविक आर्थिक गतिविधियाँ, और दुबई से जुड़े लेनदेन को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं—

क्या शिक्षण संस्थान की कमाई विदेश भेजी जा रही थी?दुबई में कारोबार के लिए रकम का स्रोत क्या था?स्थानीय विवादों पर प्रशासन की चुप्पी की वजह क्या है?और क्या सिद्दीकी वास्तव में भारत में हैं भी या नहीं?इन सवालों पर फिलहाल कोई भी विभाग औपचारिक बयान देने को तैयार नहीं है।

निष्कर्ष

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संचालक जवाद सिद्दीकी पर लगे आरोप केवल किसी संस्थान के संचालन की अनियमितताओं तक सीमित नहीं, बल्कि विदेशी निवेश, जमीन विवाद और संस्थागत धन के इस्तेमाल जैसे व्यापक मुद्दों को छूते हैं।यदि आरोप सही सिद्ध होते हैं तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र—दोनों के लिए गंभीर चेतावनी होगी।

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