दुलारचंद यादव हत्याकांड की गुत्थी उलझी, कार की तलाश में जुटी CID — अनंत सिंह से होगी पूछताछ, 80 गिरफ्तार, सवालों के घेरे में प्रशासन

बी के झा

NSK

पटना/मोकामा,( बिहार ) 2 नवंबर

बिहार चुनावी माहौल के बीच मोकामा विधानसभा से उठी हत्या की यह गूंज अब पूरे राज्य की सियासत को हिला चुकी है। भदौर थाना क्षेत्र के तारतर गांव में जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की निर्मम हत्या के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब इस हत्याकांड की जांच में CID भी शामिल हो गई है। पुलिस के समानान्तर CID की टीम जांच करेगी ताकि किसी भी पक्ष पर पक्षपात का आरोप न लगे।एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने बताया कि CID की अलग टीम गठित की गई है, जो मौके से मिले साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, वीडियो फुटेज और बयानबाजी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी।

उधर पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 80 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, जबकि 15 लोगों को रविवार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।कुचलने वाली कार और हथियार अब तक बरामद नहीं

घटना को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक पुलिस न तो उस कार को बरामद कर पाई है जिससे दुलारचंद को कुचला गया, और न ही वह हथियार मिला जिससे गोली चलाई गई थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं —

रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण गोली नहीं बल्कि दिल और फेफड़ों में लगी गंभीर चोटें बताई गई हैं, जो किसी भारी वाहन से कुचलने पर संभव है।एसएसपी ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वाहन कौन चला रहा था और वह किसकी थी। इस सिलसिले में मुख्य आरोपी अनंत सिंह से रिमांड पर पूछताछ की जाएगी।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में है कि घटना के वक्त इस्तेमाल हुआ हथियार किसका था और कहां से आया था।घटना के वक्त मौजूद थे अनंत सिंह पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना के वक्त अनंत सिंह और जेडीयू प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी दोनों का काफिला इलाके से गुजर रहा था। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद गोली चली और दुलारचंद यादव को पहले पैर में गोली मारी गई, फिर कार से कुचलकर मार डाला गया।

पुलिस का कहना है कि अनंत सिंह मौके पर मौजूद थे और घटना उनकी आंखों के सामने हुई। इसी आधार पर शनिवार को उनकी गिरफ्तारी की गई थी।

13 कंपनियां अर्धसैनिक बल की तैनात, गांव में तनाव बरकरार

मोकामा और उसके आसपास के इलाकों में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी है। 13 कंपनियां अर्धसैनिक बलों की, एसटीएफ की दो यूनिट, और चार क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) लगातार इलाके में गश्त कर रही हैं। डीएसपी और थानेदारों की कई टीमों को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया है।

पुलिस को घटना से जुड़े कई वीडियो फुटेज मिले हैं, जिनकी जांच कर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कई संदिग्धों की पहचान भी की जा चुकी है, जिनकी गिरफ्तारी जल्द की जा सकती है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज, प्रशासन पर उठे सवालमहागठबंधन के नेताओं ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि “सबको मालूम है असली दोषी कौन है, लेकिन सरकार खाना-पूर्ति के लिए दिखावटी जांच कर रही है।”

विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष के दबाव में जांच की दिशा मोड़ने की कोशिश हो रही है।

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर परखा जा रहा है। लेकिन बिहार की पुरानी परंपरा यही रही है कि चुनाव खत्म होते-होते ऐसे कई गंभीर मामले फाइलों में दबकर रह जाते हैं।

अगर सरकार सच में निष्पक्षता चाहती है, तो यह केस ‘टेस्ट केस’ साबित हो सकता है।”

CID बनाम पुलिस — दोहरी जांच की चुनौतीअब CID और पुलिस, दोनों की समानांतर जांच से प्रशासन पर समन्वय और पारदर्शिता की दोहरी चुनौती आ खड़ी हुई है। दोनों एजेंसियां अलग-अलग एंगल से जांच करेंगी और अंत में रिपोर्ट साझा करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बार भी असली दोषी बच निकलता है, तो यह न केवल बिहार पुलिस की साख पर, बल्कि लोकतंत्र के न्याय तंत्र पर भी बड़ा सवाल होगा।

मोकामा की धरती, जो पहले से ही बाहुबल और सियासत के मेल की गवाह रही है, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अब देखना है कि दुलारचंद यादव को न्याय मिलता है या यह मामला भी चुनावी धूल में कहीं गुम हो जाता है।

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