बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 9 दिसंबर
एनडीए संसदीय दल की अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया कि आगामी महीनों में सरकार का फोकस नीतिगत सुधारों को गति देना और उन्हें जन-जन तक पहुंचाना होगा। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद यह पहली बड़ी रणनीतिक बैठक थी, जिसमें पीएम मोदी ने सांसदों को एक तरह से ग्राउंड एक्टिवेशन मिशन सौंपा—
जनता के बीच जाओ, समस्याएँ समझो, और सुधारों को लोगों के जीवन से जोड़ो।देश ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ मोड में—
पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि आज देश “रिफॉर्म एक्सप्रेस” फेज में है—
जहाँ सुधार केवल फाइलों और मंत्रालयों तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी को बदलने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा:हमारे सुधार नागरिक केंद्रित हैं। लक्ष्य सिर्फ आर्थिक ग्राफ ऊपर ले जाना नहीं, बल्कि लोगों का जीवन आसान बनाना है।पीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार फॉर्मलिटी और गैर-जरूरी कागजी संस्कृति को खत्म करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।
उन्होंने 30–40 पेज के लंबे फॉर्म, बार-बार दस्तावेज जमा करने और ‘अनावश्यक प्रमाणपत्र संस्कृति’ को समाप्त करने का अपना संकल्प दोहराया।सेल्फ-सर्टिफिकेशन पर भरोसा—
10 साल की सफलता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने नागरिकों पर भरोसे की नीति अपनाई है। सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा इसके केंद्र में है और यह पिछले दस वर्षों से बिना किसी दुरुपयोग के सफलतापूर्वक चल रही है।उन्होंने कहा कि इसका अगला चरण ईज ऑफ लाइफ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को एक साथ मजबूत करना है—
ताकि सामान्य नागरिक से लेकर उद्यमी तक, सभी के लिए व्यवस्था सरल, तेज़ और पारदर्शी बने।
सांसदों को PM का स्पष्ट संदेश—जनता के बीच रहो
प्रधानमंत्री ने सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए:अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहें लोगों की असली समस्याएँ और बाधाएँ सरकार तक पहुंचाएँ आगामी केंद्रीय बजट पर ग्राउंड-फीडबैक दें स्थानीय कार्यक्रमों, सामाजिक गतिविधियों और जनसंपर्क अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें पीएम ने कहा कि बिहार की जीत महत्वपूर्ण है, लेकिन अब पश्चिम बंगाल चुनाव एनडीए का अगला बड़ा लक्ष्य है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ
TMC की प्रतिक्रिया: “NDA को बंगाल में चुनौती का अंदाज़ा नहीं”तृणमूल कांग्रेस ने पीएम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:दिल्ली से बैठकर बंगाल को नहीं समझा जा सकता। यहाँ का जनादेश विकास के नाम पर नहीं, अस्मिता और संस्कृति के मुद्दों पर तय होता है।”TMC नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की घोषणा राजनीतिक रूप से आकर्षक भले लगे, लेकिन “जमीनी हकीकत और संघीय ढांचे की सीमाओं का सम्मान” जरूरी है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
“सुधारों का फायदा सिर्फ चुनिंदा लोगों को”कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के सुधार “नागरिक केंद्रित नहीं, कॉर्पोरेट केंद्रित” हैं। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है:ईज ऑफ लाइफ तभी संभव है जब बेरोज़गारी, महंगाई और असमानता पर ईमानदार कार्रवाई हो।”कांग्रेस ने एनडीए सांसदों को दिए गए निर्देशों को “चुनावी तैयारी की एक रणनीति” बताया।
जेडीयू और एनडीए सहयोगी दलों का समर्थन जेडीयू, शिवसेना (शिंदे गुट), लोजपा (RV) और अन्य एनडीए सहयोगियों ने पीएम मोदी की पहल का स्वागत किया है। इन दलों का कहना है कि सरकार का नागरिक-केंद्रित सुधार मॉडल देश की दिशा और गति दोनों को बदल रहा है।
जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा:बिहार की जीत बिहार मॉडल और मोदी मॉडल की साझी सफलता है। आने वाला समय और भी निर्णायक होगा।”
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
1. ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’— जमीनी हकीकत से टकराएगी या तेजी पकड़ेगी?कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी सरकार तीसरे कार्यकाल में तेज़ी से नीतिगत कदमों को अमल में लाने पर फोकस कर रही है।वरिष्ठ विश्लेषक सुशील झा कहते हैं:सरकार सुधार चाहती है, लेकिन असली चुनौती प्रशासनिक ढाँचे और राज्यों की राजनीतिक बाधाओं में है।”
2. बंगाल चुनाव पर फोकस— 2026 की बड़ी परीक्षा विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा के लिए बंगाल अगले दो वर्षों का सबसे कठिन चुनावी रण है।राजनीतिक टिप्पणीकार रजनीश सिन्हा के अनुसार:पीएम का संदेश संकेत है कि केंद्र अब बंगाल को टॉप प्रायोरिटी पर रख रहा है। बिहार की जीत भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त है, लेकिन बंगाल का मुकाबला पूरी तरह अलग प्रकृति का होगा।”
3. नागरिक केंद्रित सुधार— चुनावी रणनीति भी, प्रशासनिक दृष्टि भीनीति विश्लेषकों का कहना है कि सेल्फ-सर्टिफिकेशन, डिजिटल सुविधा और पेपरलेस गवर्नेंस पर जोर भविष्य की प्रशासनिक संरचना की रीढ़ बन सकते हैं।लेकिन यह भी चेतावनी दी जा रही है:सुधारों का असली परीक्षण तभी होगा जब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी सेवाएँ बिना भ्रष्टाचार और देरी के मिलें।
”निष्कर्ष:
सुधार, राजनीति और जनभागीदारी— तीनों की संयुक्त चुनौती एनडीए की बैठक के बाद एक बात स्पष्ट है—
सरकार सुधारों की गति बढ़ाने के लिए राजनीतिक रूप से आक्रामक और प्रशासनिक रूप से सक्रिय दोनों मोड में है।सांसदों को दिया गया जनसंपर्क मिशन आने वाले महीनों में इस बात की परीक्षा होगा कि क्या सुधारों की चमक जमीन तक पहुंचती है, और क्या यह राजनीतिक रूप से फ़ायदे में बदलती है।
