देश-प्रदेश : SIR बढ़ी डेडलाइन से लेकर संसद विवाद तक—आज की 5 सबसे बड़ी खबरें

बी के झा

नई दिल्ली, 11 दिसंबर

भारत की राजनीति, चुनाव व्यवस्थाओं और न्यायपालिका से जुड़ी गुरुवार की घटनाओं ने देश की सुर्खियों को नए सिरे से परिभाषित किया। जहाँ एक ओर चुनाव आयोग ने छह राज्यों में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) की डेडलाइन बढ़ाकर करोड़ों मतदाताओं को राहत दी, वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को लगातार राजनीतिक गर्माहट देते हुए ‘धरने’ की चेतावनी दे डाली।उधर संसद में ई-सिगरेट विवाद ने गरमा-गरम राजनीतिक बहस छेड़ दी।गोवा के भीषण नाइटक्लब हादसे में आरोपी मालिकों को दिल्ली कोर्ट से बड़ा झटका मिला, जबकि पाकिस्तान में पूर्व ISI प्रमुख पर कठोर सजा ने पड़ोसी देश के भीतर की सत्ता-संघर्ष की जड़ें फिर उजागर कर दीं।

छह राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ी — मतदाताओं को राहत चुनाव आयोग ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में SIR की समय-सीमा बढ़ाने का फैसला किया।कई राज्यों के CEO ने आयोग से आग्रह किया था कि 11 दिसंबर को समाप्त हो रही अवधि को बढ़ाया जाए ताकि दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले मतदाता फॉर्म जमा करा सकें और किसी का नाम अनजाने में न कटे।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

2026 के विधानसभा चुनावों की आहट ने SIR को बेहद संवेदनशील विषय बना दिया है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा-शासित राज्यों में SIR का इस्तेमाल “चयनित मतदाता-वर्ग” पर प्रभाव के साधन के रूप में हो सकता है। हालांकि, आयोग इसे “पूर्णत: तकनीकी और नियमित प्रक्रिया” बताता है।

ममता बनर्जी का SIR पर हमला—“एक भी योग्य मतदाता का नाम कटा तो धरना दूंगी”पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को “राजनीतिक हथियार” बताते हुए केंद्र और भाजपा पर तीखा हमला बोला।उन्होंने कहा—मैंने खुद फॉर्म नहीं भरा। क्या दंगाइयों की पार्टी को अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत होती है? एक भी योग्य मतदाता का नाम काटा गया तो मैं धरना दूंगी।

”उन्होंने भाजपा और केंद्र पर आरोप लगाए कि—बंगालियों को ‘बांग्लादेशी’ बताने की सुनियोजित रणनीति चल रही है SIR की सुनवाई पर भाजपा समर्थित अधिकारी निगरानी कर रहे हैं चुनाव से ठीक दो महीने पहले SIR कराना राजनीतिक उद्देश्य का संकेत है विश्लेषण : राजनीतिक संदेशममता बनर्जी इस मुद्दे को व्यापक ‘बांग्लादेशी-नागरिकता’ बहस से जोड़कर एक भावनात्मक जनाधार बनाने की कोशिश कर रही हैं।राजनीतिक विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि यह मुद्दा बंगाल में पहचान की राजनीति पर निर्णायक प्रभाव डाल सकता है।

संसद में TMC सांसदों पर ई-सिगरेट पीने का आरोप—अनुराग ठाकुर ने खोला मोर्चाभाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में आरोप लगाया कि:TMC के सांसद सदन में बैठकर कई दिनों से ई-सिगरेट पी रहे हैं। देश में बैन है—क्या सदन में इसे अलाऊ किया गया है?”लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि कभी भी ऐसा मामला सामने आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।”

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इसे “दुर्भाग्यपूर्ण और संसदीय गरिमा के खिलाफ” बताया।कानूनी पहलूभारत में ई-सिगरेट 2019 से इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है।इसे अपने पास रखना भी अपराध है।संसदीय परंपराओं पर खतरा?वरिष्ठ संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि—“यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह संसद की परंपराओं के इतिहास में सबसे अस्वीकार्य घटनाओं में गिना जाएगा।”

गोवा नाइटक्लब आग कांड—लूथरा बंधुओं की जमानत याचिका खारिज‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में पिछले सप्ताह लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी।आग के बाद क्लब मालिक सौरभ और गौरव लूथरा थाईलैंड में थे और दिल्ली लौटते ही उन्होंने चार हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांगी।लेकिन दिल्ली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।जज का स्पष्ट संदेश अदालत ने कहा:“ऐसे मामलों में न्याय से बचने की कोशिश को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।”“जनहानि की जिम्मेदारी से कोई नहीं बच सकता।”

पाकिस्तान : पूर्व ISI प्रमुख फैज हमीद को 14 साल की सजा पाक सेना अदालत ने पूर्व ISI प्रमुख ले. जनरल (रि.) फैज हमीद को14 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई।उन्हें दोषी ठहराया गया—कदाचारसरकारी संसाधनों का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा राजनीतिक गतिविधियों में दखल इमरान खान की सत्ता-सुरक्षा में ‘

पर्दे के पीछे भूमिका’

विश्लेषण :

सत्ता संरचना में बड़ा संकेत विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला बताता है कि—पाकिस्तान की असली सत्ता-संरचना में सैन्य प्रतिष्ठान पूरी तरह नए समीकरण बना रहा है,जिसमें इमरान खान गुट को लगभग खत्म किया जा रहा है।

”निष्कर्ष

आज की पांचों बड़ी ख़बरें देश के लोकतांत्रिक ढांचे, चुनाव प्रक्रिया, शासन व्यवस्था और पड़ोसी देशों की अस्थिरता पर गहरी छाप छोड़ती हैं।जहाँ SIR पर बढ़ी डेडलाइन मतदाताओं को राहत देती है, वहीं बंगाल में राजनीतिक तापमान तेजी से उबल रहा है।संसद में ई-सिगरेट विवाद लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा पर सवाल उठाता है।न्यायपालिका ने गोवा त्रासदी में कठोर रुख दिखाया है, और पाकिस्तान की अदालत का फैसला क्षेत्रीय भू-राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।

NSK

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