बी के झा
नई दिल्ली/लखनऊ/श्रीनगर, 22 दिसंबर
दिसंबर के आख़िरी दिनों में उत्तर भारत मानो प्रकृति की कठोर परीक्षा से गुजर रहा है। ठंड, घना कोहरा और जहरीली हवा—तीनों ने मिलकर आम जनजीवन को जकड़ लिया है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से लेकर कश्मीर घाटी तक दृश्यता गिर चुकी है और वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच गई है।
सोमवार तड़के दिल्ली की सुबह केवल सर्द नहीं, बल्कि दम घोंटने वाली थी। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास छाई जहरीली स्मॉग ने राजधानी की हालत बयां कर दी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, एनएच-24 क्षेत्र में AQI 363 दर्ज किया गया—जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रैप-4 लागू कर दिया गया है।
विश्लेषण
: जब मौसम और प्रदूषण मिलकर संकट बन जाएं पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल मौसम की देन नहीं है।पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. रवि भूषण के अनुसार,“सर्दियों में हवा की गति कम हो जाती है। ऊपर से पराली, वाहनों और निर्माण गतिविधियों का प्रदूषण मिलकर स्मॉग को स्थायी बना देता है। यही वजह है कि कोहरा अब केवल जलवाष्प नहीं, बल्कि जहरीली गैसों का मिश्रण बन चुका है।”
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक पश्चिमी विक्षोभ और ठंडी हवाओं के कारण यह स्थिति बनी रह सकती है।स्वास्थ्य पर असर: सबसे ज्यादा खतरे में बच्चे और बुज़ुर्ग स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस हालात को लेकर खासे चिंतित हैं।
दिल्ली के एक वरिष्ठ फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल माथुर बताते हैं,“AQI 300 के ऊपर जाने का मतलब है—स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में दिक्कत। अस्थमा, हृदय रोग और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह बेहद खतरनाक है।”
डॉक्टरों ने लोगों को—सुबह-सुबह टहलने से बचने मास्क का प्रयोग करनेऔर अनावश्यक बाहर निकलने से परहेज़ करने की सलाह दी है।
उत्तर प्रदेश:
कोहरे ने थामी रफ्तार एनसीआर से सटे उत्तर प्रदेश में भी कोहरे की मोटी चादर छाई हुई है। मुरादाबाद, लखनऊ और अयोध्या समेत कई शहरों में सुबह के वक्त दृश्यता बेहद कम रही। सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और रेलवे व सड़क यातायात प्रभावित हुआ।एक स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार,“कोहरे के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है।”
कश्मीर: चिल्लई कलां के साथ जमी ज़िंदगी उधर कश्मीर घाटी में हालात और भी सख्त हैं। 21 दिसंबर से चिल्लई कलां की शुरुआत के साथ ही श्रीनगर समेत कई इलाकों में बर्फबारी और जबरदस्त शीतलहर का दौर जारी है। झीलें जमने लगी हैं, पाइप लाइनें ठिठुर गई हैं और हवाई यातायात पर असर पड़ा है।
कश्मीर के मौसम विशेषज्ञों का कहना है,“चिल्लई कलां के 40 दिन पूरे क्षेत्र के लिए सबसे कठिन होते हैं। इस दौरान तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है।”
अन्य राज्य भी प्रभावित हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में भी घना कोहरा जनजीवन पर भारी पड़ रहा है। हाईवे पर दृश्यता कम होने से लंबी दूरी के वाहनों की रफ्तार थम गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक कोहरा और पाला फसलों को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
निष्कर्ष:
चेतावनी का संकेत है यह सर्दीयह सर्दी सिर्फ मौसम की कहानी नहीं कह रही, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन और स्वास्थ्य संकट की चेतावनी भी दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रदूषण पर स्थायी और कठोर कदम नहीं उठाए जाएंगे, हर सर्दी इसी तरह “धुआँ-धुआँ” होती रहेगी।आने वाले दिनों में ठंड और कोहरे से राहत के आसार कम हैं।
ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी ही इस मौसम की सबसे बड़ी जरूरत है।
NSK

