बी के झा
NSK


नई दिल्ली/कीव/वॉशिंगटन/मॉस्को, 26 दिसंबर
लगभग चार वर्षों से यूरोप को झुलसाती रूस–यूक्रेन जंग को लेकर पहली बार साल के अंत से पहले ठोस राजनीतिक फैसलों की संभावना उभरती दिख रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने साफ संकेत दिए हैं कि नए साल से पहले युद्ध समाप्ति की दिशा में निर्णायक कदम उठ सकते हैं। इस बयान का सबसे अहम पहलू यह है कि ज़ेलेंस्की जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने जा रहे हैं—
एक ऐसी बैठक, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।
ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा,“नया साल आने से पहले बहुत कुछ तय हो सकता है। हम एक भी दिन बर्बाद नहीं कर रहे। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उच्च-स्तरीय बैठक पर सहमति बन चुकी है।यह बयान ऐसे समय आया है जब कीव और वॉशिंगटन के बीच हफ्तों से गहन बातचीत चल रही है और इसके परिणामस्वरूप 20-सूत्रीय शांति प्रस्ताव का मसौदा तैयार हुआ है, जिसे मॉस्को के साथ भी साझा किया जा चुका है।
नया शांति प्रस्ताव: पुराने फार्मूलों से अलगराजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह प्रस्ताव पहले की तुलना में ज़्यादा संतुलित और व्यावहारिक माना जा रहा है। इसमें—यूक्रेन से अपने क्षेत्र छोड़ने की शर्त नहीं
NATO सदस्यता की आकांक्षा औपचारिक रूप से छोड़ने की बाध्यता नहीं भविष्य में रूसी हमलों से बचाव के लिए सुरक्षा गारंटी युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में अंतरराष्ट्रीय मदद मौजूदा मोर्चों पर संघर्षविराम (Ceasefire)हालांकि प्रस्ताव के तहत रूस को खारकीव और मायकोलाइव जैसे इलाकों से पीछे हटना होगा, जबकि यूक्रेन डोनेट्स्क के कुछ हिस्सों में असैन्य क्षेत्र (Demilitarized Zone) पर सशर्त सहमति जता सकता है।
एक वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ के शब्दों में,“यह प्रस्ताव न तो यूक्रेन की संप्रभुता बेचता है और न ही रूस को पूरी तरह अपमानित करता है—यही इसकी कूटनीतिक ताकत है।ट्रंप फैक्टर: गेम-चेंजर या जोखिम?शिक्षाविदों और रणनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात पर बहस तेज है कि डोनाल्ड ट्रंप की सक्रिय भूमिका युद्ध समाधान में कितनी निर्णायक होगी। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि वे सत्ता में होते तो यह युद्ध “24 घंटे में रुक सकता था।
अमेरिकी राजनीति के जानकार मानते हैं कि ट्रंप की शैली परंपरागत कूटनीति से अलग है—वे दबाव, सौदे और व्यक्तिगत समीकरणों के जरिए फैसले करवाने में विश्वास रखते हैं।
एक रक्षा शिक्षाविद कहते हैं,“अगर ट्रंप इस युद्ध को अपनी ‘डील-मेकिंग’ क्षमता की परीक्षा मानते हैं, तो रूस पर दबाव बढ़ सकता है।
”रूस का रुख:
सख़्ती में कोई कमी नहीं दूसरी ओर, क्रेमलिन अब तक नरमी दिखाने को तैयार नहीं है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो टूक कह चुके हैं कि—यूक्रेन को डोनेट्स्क और लुहांस्क से हटना होगा NATO में शामिल होने की योजना छोड़नी होगी रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रस्तावों का “अध्ययन” किया जा रहा है, लेकिन उनके सार पर टिप्पणी से इनकार कर दिया गया है।
एक रूसी मामलों के जानकार का कहना है,“मॉस्को बातचीत से पीछे नहीं हट रहा, लेकिन वह अपनी शर्तों पर ही शांति चाहता है।”
अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौर निर्णायक लेकिन खतरनाक है।“इतिहास गवाह है कि जब युद्धविराम की बात तेज होती है, तब ज़मीन पर लड़ाई अक्सर और भड़कती है—ताकि बातचीत की मेज पर बढ़त मिल सके,”एक यूरोपीय रक्षा विश्लेषक ने चेताया।
हिंदू अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण:
युद्ध नहीं, संतुलन कुछ हिंदू अंतरराष्ट्रीय विचारकों ने इस संकट को धर्म नहीं, शक्ति-संतुलन और भू-राजनीति के चश्मे से देखने की बात कही है।उनके अनुसार,“यह युद्ध सभ्यताओं का नहीं, बल्कि प्रभुत्व और सुरक्षा संरचनाओं का संघर्ष है। शांति तभी टिकेगी जब संतुलन होगा, न कि एकतरफा जीत से।
”निष्कर्ष:
नए साल से पहले बड़ा मोड़ के बयान और ट्रंप के साथ प्रस्तावित मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रूस–यूक्रेन युद्ध अब केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णायक रूप से कूटनीति के मंच पर पहुंच चुका है।
हालांकि अंतिम फैसला मॉस्को के हाथ में है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले हफ्ते वैश्विक राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होंगे।
क्या यह युद्ध नए साल से पहले थमेगा, या फिर शांति की यह कोशिश भी इतिहास की फाइलों में दफन हो जाएगी—
दुनिया सांस रोककर इंतजार कर रही है।
