नीतीश–लालू की बढ़ती राजनीतिक दूरी: अब घर भी हुए परे, सड़क के आर-पार का रिश्ता बढ़कर 200 मीटर का फासला

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/ पटना, 26 नवंबर

बिहार की राजनीति में दशकों तक एक-दूसरे के सहयात्री रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बीच राजनीतिक दूरी अब सिर्फ वैचारिक या गठबंधन-आधारित नहीं रही—यह अब भौगोलिक दूरी में भी बदल गई है।पहले दोनों नेता पटना में एक ही सड़क— सर्कुलर रोड— के आर-पार रहते थे।लेकिन नई सरकार बनने के बाद भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को मिला 10, सर्कुलर रोड का आवास रद्द कर दिया है और उन्हें 39, हार्डिंग रोड पर नया आवास आवंटित किया गया है।इसके साथ ही दोनों परिवारों की दूरी लगभग 200 मीटर से अधिक हो गई है।यह बदलाव केवल आवास का नहीं…यह बिहार की राजनीति में बढ़ती दूरी, तनाव और असहजता का भी प्रतीक माना जा रहा है।

राबड़ी देवी का 20 साल पुराना पता बदला राबड़ी देवी जब 1997 में मुख्यमंत्री बनीं, तभी से उनका परिवार 10, सर्कुलर रोड में रहता आया है।दो दशक से अधिक के इस पड़ाव को अचानक बदलने के फैसले ने राजनीति को गर्मा दिया है।लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—सुशासन बाबू का विकास मॉडल यही है? लालू जी को घर से तो निकाल देंगे, पर जनता के दिल से कैसे निकालेंगे?रोहिणी का यह बयान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले ही इसी आवास को लेकर उनका तेजस्वी यादव से झगड़ा हुआ था।

RJD बोली— “राजनीतिक प्रतिशोध”RJD ने इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया।पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा—यह बीजेपी के दबाव में लिया गया प्रतिशोधात्मक निर्णय है। लालू परिवार को अपमानित करने की कोशिश हो रही है।”पार्टी का तर्क है कि 26 मंत्रियों के आवास बदले गए, पर जिस तरह लालू–राबड़ी का आवास हटाया गया, वह विशेष उद्देश्य से प्रेरित लगता है।

नीतीश कैबिनेट के 13 नए मंत्रियों को नए बंगले सरकार ने 13 नए मंत्रियों के लिए पटना के प्रतिष्ठित हार्डिंग रोड, स्ट्रैंड रोड और सर्कुलर रोड पर आवास आवंटित किए हैं।इसमें तेज प्रताप यादव का पुराना बंगला 26M, स्ट्रैंड रोड अब बीजेपी कोटे के मंत्री लखेंद्र रौशन को दे दिया गया है—यह भी RJD के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार का बड़ा दावा — “यह नीतीश का फैसला नहीं”पटना के एक वरिष्ठ पत्रकार ने इस मामले पर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उनके अनुसार—

“नीतीश कुमार निजी तौर पर लालू–राबड़ी परिवार का सम्मान करते हैं। हमें नहीं लगता कि आवास बदलने का निर्णय पूरी तरह उनका है।”जब पत्रकार से पूछा गया कि आगे क्या होगा, क्या राबड़ी देवी को आखिरकार घर छोड़ना पड़ेगा?

उनका जवाब था—अंतिम फैसले पर नीतीश कुमार ही निर्णायक होंगे। बिहार में इस फैसले से कैसी जनता–प्रतिक्रिया होगी, नीतीश अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए संभावना अधिक है कि लालू परिवार को अंततः उनका पुराना आवास वापस मिल जाए।”पत्रकारों और जानकारों की मानें तो, भले ही राजनीति में गठबंधन बदले, विचारधाराएं टकराएं,पर नीतीश और लालू का व्यक्तिगत सम्मान और पुराना राजनीतिक रिश्ता इतनी आसानी से नहीं टूटेगा।

विश्लेषण:

आवास बदला— संकेत बदल गए

दोनों नेता पहले सड़क के आर-पार रहते थे

अब दूरी 200 मीटर से भी अधिक

राजनैतिक संबंधों का ‘ठंडापन’ अब भूगोल में भी दिखने लगा इतिहास गवाह है—

नीतीश और लालू की दूरी चाहे जितनी बढ़ी हो,बिहार की राजनीति बार-बार दोनों को एक-दूसरे के सामने खड़ा… और कभी–कभी साथ खड़ा करती रही है।इस आवास विवाद ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं—न नजदीकियां, न दूरियां… बस समय का फैसला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *