बी के झा
NSK

पटना/दिल्ली, 16 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के ऐतिहासिक नतीजों के बाद सत्ता के गलियारों में सिर्फ एक ही सवाल तैर रहा है—आख़िर बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा?
243 में से 202 सीटों पर प्रचंड जीत के बाद एनडीए ने सरकार गठन की तैयारी तेज कर दी है। राजधानी पटना से लेकर दिल्ली के शक्तिशाली कॉरिडोर तक, मीटिंगों और क़यासों का दौर लगातार जारी है। लेकिन इस सियासी हलचल के बीच एक बात लगभग साफ होती दिख रही है—नीतीश कुमार ही एक बार फिर बिहार की कमान सँभालेंगे।
हालांकि, तस्वीर में एक दिलचस्प राजनीतिक विकल्प भी उभरता दिख रहा है—
बीजेपी का मुख्यमंत्री!पर यह विकल्प तभी संभव है, जब खुद नीतीश कुमार रास्ता खोलें।नीतीश कुमार—
10वीं बार शपथ की ओर?जेडीयू के शीर्ष नेताओं ने साफ कहा है—“
बिहार में सीएम पद की कोई वैकेंसी नहीं है। नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे।”लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी संकेत दिए—
गठबंधन में सीएम का चेहरा वही रहेंगे, जिन्होंने एनडीए को एकजुट रखा।इसके अलावा आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में मुलाकात के बाद बयान दिया—
“नीतीश जी ही मुख्यमंत्री रहेंगे, इससे इतर कोई चर्चा नहीं।”दिल्ली का रुख—
बीजेपी का पत्ता अभी बंद हालांकि, बीजेपी ने अभी तक खुलकर नीतीश का नाम नहीं घोषित किया है।बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने ज़िम्मेदारी केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ते हुए यह जरूर कहा कि विधायक दल की बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
यहीं से राजनीति थोड़ी दिलचस्प होती है…
बीजेपी का मुख्यमंत्री केवल एक स्थिति में एनडीए
सूत्रों का बड़ा दावा—“
बीजेपी का मुख्यमंत्री सिर्फ एक ही स्थिति में बनेगा—
अगर खुद नीतीश कुमार इसकी घोषणा करें।”नीतीश को गठबंधन की सबसे अनुभवी और स्वीकार्य नेतृत्व वाली शख्सियत मानते हुए बीजेपी सीधा टकराव नहीं चाहती।जेडीयू भी जानती है कि सत्ता के समीकरण में सीटों का अंतर भले ही कम हो, लेकिन चेहरा वही होगा जो गठबंधन को स्थिरता दे सके।
अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बना, तो जेडीयू को मिलेगा ‘डिप्टी सीएम’सियासी
सूत्रों के अनुसार—अगर किसी ‘अप्रत्याशित’ स्थिति में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है, तो जेडीयू से एक डिप्टी सीएम बनेगा।संभव है कि यह पद नीतीश कुमार अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में किसी नेता को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें।
हालाँकि—इसकी संभावना बेहद कम मानी जा रही है।नीतीश बनाम बीजेपी: मजबूरी या रणनीति?एक स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार का तंज भरा बयान चर्चा में है—“
बीजेपी नेतृत्व भले ही गठबंधन का सबसे बड़ा दल बनकर आया हो, पर राजनीतिक मजबूरी में उन्हें फिर से नीतीश को मुख्यमंत्री बनाना ही पड़ेगा।”
इस बयान में छिपी सच्चाई है—बीजेपी सीधे मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में नहीं, क्योंकि इससे जेडीयू के भीतर असंतोष पैदा हो सकता है।विपक्ष पहले से ही यह नैरेटिव चलाने की कोशिश कर रहा था कि बीजेपी चुनाव बाद ‘नीतीश को किनारे कर देगी’।
ऐसे में जेडीयू किसी भी हाल में यह जोखिम नहीं लेगी कि नीतीश के अलावा कोई और चेहरा सीएम बने और विपक्ष को नया हमला करने का मौका मिल जाए।
एनडीए का दमदार जनादेश —
सीटों का पूरा हिसाब 243 की विधानसभा में एनडीए को मिला ऐतिहासिक समर्थन।
पार्टी सीटें BJP 89
JDU 85
LJPR (चिराग) 19
HAM 5
RLM (कुशवाहा) 4
कुल — 202 सीटें,
यानी आरामदायक बहुमत से भी आगे।
निष्कर्ष:
सत्ता की चाबी नीतीश के हाथ में सारे संकेत, सारी बैठकों और सारे समीकरणों का निचोड़ बस इतना है—
नीतीश कुमार ही 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।दिल्ली में भले ही बीजेपी का दबदबा हो,पटना की राजनीति में आज भी कुंजी एक ही नेता के पास है—
नीतीश कुमार।और बीजेपी का मुख्यमंत्री?—
वह सिर्फ राजनीतिक पुस्तकों का एक ‘काल्पनिक पन्ना’ है,जिसे खोलने की चाबी अभी भी नीतीश कुमार की जेब में है।
