पटना से दिल्ली अब 4 घंटे में: हाईस्पीड रेल कॉरिडोर से बिहार की दूरी नहीं, रफ्तार बदलेगी

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/पटना , 2 फरवरी

आम बजट 2026-27 ने बिहार के लिए बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर एक बड़ा सपना हकीकत में बदलने की दिशा दिखा दी है। केंद्र सरकार ने जिन सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है, उनमें दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं। इन दोनों को जोड़ने से दिल्ली से लेकर बिहार होते हुए सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन सेवा का रास्ता खुलेगा और पटना से दिल्ली का सफर महज चार घंटे में पूरा हो सकेगा।

आज जहां राजधानी एक्सप्रेस से यह दूरी तय करने में 12 से 13 घंटे लगते हैं, वहीं हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बिहार की कनेक्टिविटी, कारोबार और रोजगार की तस्वीर बदलने का दावा कर रहा है।

दिल्ली से सिलीगुड़ी तक हाईस्पीड धुरी

सरकारी योजना के मुताबिक, दिल्ली से वाराणसी के बीच 756 किलोमीटर और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच 744 किलोमीटर लंबा हाईस्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। बुलेट ट्रेन की प्रस्तावित अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। इसके तहत दिल्ली से वाराणसी की दूरी लगभग 3 घंटे 50 मिनट में तय होगी, जबकि वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक का सफर करीब 2 घंटे 55 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

इससे पहले दिल्ली–पटना–हावड़ा के बीच दो चरणों में हाईस्पीड ट्रेन चलाने की योजना थी, लेकिन अब वाराणसी से सिलीगुड़ी तक अलग कॉरिडोर बनाने का फैसला किया गया है, जिससे बिहार को सीधे हाईस्पीड नेटवर्क के केंद्र में लाया गया है।

बिहार में पांच स्टेशन, पटना के पास बड़ा हब

वाराणसी–सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर में बिहार में पांच स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें बक्सर, पटना, बेगूसराय, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं। किशनगंज के बाद अंतिम स्टेशन सिलीगुड़ी होगा।

विशेषज्ञों की ओर से कराए गए सर्वे में पटना शहर के निकट बिहटा क्षेत्र में हाईस्पीड स्टेशन बनाने का सुझाव दिया गया है, जिससे राजधानी के साथ-साथ आसपास के जिलों को भी सीधा लाभ मिल सके।

पूरा मार्ग क्या होगा

दिल्ली–वाराणसी कॉरिडोर (756 किमी): दिल्ली, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ और वाराणसी, वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर (744 किमी): वाराणसी, बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, हाथीदह, बेगूसराय, महेशखूंट, कटिहार, किशनगंज और सिलीगुड़ी यह पूरा मार्ग एलिवेटेड रेल लाइन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे रफ्तार के साथ सुरक्षा और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।

छह लाख करोड़ का निवेश, जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती

दिल्ली से सिलीगुड़ी तक करीब 1500 किलोमीटर लंबे इस हाईस्पीड रेल नेटवर्क पर लगभग छह लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा जमीन अधिग्रहण और एलिवेटेड स्ट्रक्चर के निर्माण पर जाएगा।तुलना करें तो मुंबई–अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर हाईस्पीड रेल कॉरिडोर करीब 86 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है।

प्रस्तावित बुलेट ट्रेन स्टेशन मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर आधुनिक और बहुस्तरीय होंगे।बुलेट ट्रेन के साथ जलमार्गों को भी गति बजट में बिहार के लिए केवल रेल ही नहीं, बल्कि जल परिवहन को भी नई रफ्तार देने का रोडमैप सामने आया है। पहले से अधिसूचित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) के अलावा अब छह नए जलमार्गों के विकास की उम्मीद बढ़ गई है।इनमें —एनडब्ल्यू-37 (गंडक)एनडब्ल्यू-58 (कोसी)एनडब्ल्यू-40 (घाघरा)एनडब्ल्यू-54 (कर्मनाशा)एनडब्ल्यू-81 (पुनपुन)एनडब्ल्यू-94 (सोन)शामिल हैं।

बिहार में कुल सात जलमार्गों की लंबाई करीब 1187 किलोमीटर होगी।

रोजगार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा फायदा

पटना के दीघा में प्रस्तावित जहाज मरम्मत सुविधा केंद्र के लिए राज्य सरकार ने पांच एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी है। इसके शुरू होने से युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।जलमार्गों के विकास से बालू, सीमेंट, स्टोन चिप्स और बिजली संयंत्रों के भारी उपकरणों की ढुलाई सस्ती होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे सड़क यातायात का दबाव 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

निष्कर्ष:

बिहार के लिए रफ्तार का दशक

हाईस्पीड रेल कॉरिडोर और जलमार्ग विकास के ये प्रावधान बिहार को देश की मुख्य आर्थिक धारा से और तेज़ी से जोड़ने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, बुलेट ट्रेन के बिहार से गुजरने में अभी करीब सात साल लग सकते हैं, लेकिन बजट ने यह साफ कर दिया है कि आने वाला दशक राज्य के लिए रफ्तार, रोजगार और कनेक्टिविटी का दशक बनने वाला है।

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