पहली कैबिनेट बैठक आज: बड़े फैसलों की तैयारी में नीतीश सरकार, प्रोटेम स्पीकर बने नरेंद्र नारायण यादव; विपक्ष ने उठाए सवाल

बी के झा

NSK

नई दिल्ली /पटना, 25 नवंबर :

बिहार की नई एनडीए सरकार आज अपनी पहली बड़ी परीक्षा से गुज़रने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में कैबिनेट की पहली बैठक सुबह 10 बजे राज्य सचिवालय में प्रस्तावित है, जिसके बाद 11ः20 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में फैसलों का ऐलान होगा।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार अपनी पहली ही बैठक में कुछ “संकेतात्मक और निर्णायक” फैसले लेकर यह संदेश देना चाहेंगे कि सरकार अपने संकल्प पत्र पर तेजी से अमल की दिशा में बढ़ रही है।

नरेंद्र नारायण यादव बने ‘प्रोटेम स्पीकर’: वरिष्ठता और सादगी की मिसाल इस बीच जद-यू के वरिष्ठ नेता और आलमनगर सीट से लगातार आठ बार विधायक नरेंद्र नारायण यादव को बिहार विधानसभा का ‘प्रोटेम स्पीकर’ नियुक्त किया गया।राजभवन में आयोजित सादे समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें शपथ दिलाई।अब वे नई विधानसभा के 243 विधायकों को शपथ दिलाएंगे और स्थायी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को संचालित करेंगे।नरेंद्र नारायण यादव का राजनीतिक जीवन काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है।

जेपी आंदोलन का हिस्सा रहे यादव ने 1995 में पहली बार विधानसभा का रास्ता तय किया था। तब से उनकी सादगीपूर्ण छवि और जनाधार उन्हें जद-यू के सबसे प्रभावी नेताओं में शामिल करता आया है।पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनकी वरिष्ठता, राजनीतिक अनुभव और संगठन के प्रति निरंतर निष्ठा को देखते हुए उनके नाम पर सर्वसम्मति बनी।नीतीश कैबिनेट के मंत्री सक्रिय—कार्यभार संभालते ही किए बड़े ऐलान

सरकार बनते ही कई मंत्रियों ने सोमवार को अपने-अपने विभागों का कार्यभार संभाल लिया और विभागीय प्राथमिकताओं को सामने रखा।मद्य निषेध मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव“शराबबंदी नीति जारी रहेगी। जहां सुधार की ज़रूरत होगी, वहां तेजी से कदम उठाए जाएंगे।”राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा“भूमि माफियाओं को संरक्षण देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

भूमि सुधार मुख्य प्राथमिकता होगी।”

श्रम संसाधन मंत्री संजय सिंह टाइगर“श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। युवाओं के कौशल विकास के नए कार्यक्रम जल्द लागू होंगे।”पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता“पशुपालन और मत्स्य पालन पर निर्भर परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए नई योजनाएं तेज़ी से लाई जाएंगी।”सरकार के इन शुरुआती संकेतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश की नई टीम विकास, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर तुरंत काम शुरू कर चुकी है।विपक्ष की तेज़ प्रतिक्रिया—“

पहली कैबिनेट में दिखेगा सरकार का असली चेहरा”नीतीश सरकार की पहली कैबिनेट बैठक को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ भी तेज होने लगी हैं।

आरजेडी

आरजेडी ने तंज कसते हुए कहा:पहली कैबिनेट बैठक में भी सिर्फ खोखले दावे होंगे। बिहार के युवाओं, किसानों और गरीबों की समस्याओं पर कोई ठोस निर्णय आने की उम्मीद नहीं।”आरजेडी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि

—“शराबबंदी में बड़े घोटाले को दबाने का प्रयास होगा और भूमि सुधार के नाम पर केवल बयानबाज़ी।कांग्रेसकांग्रेस ने कहा:सरकार के वादे सिर्फ कागज़ पर हैं। नीतीश कुमार गठबंधन की राजनीति में इतने उलझ चुके हैं कि विकास उनकी प्राथमिकता रह ही नहीं गई है।”लेफ्ट पार्टियाँवामदलों ने बेरोज़गारी और महंगाई को बड़ा मुद्दा बताते हुए सवाल उठाया:पहली कैबिनेट में रोज़गार नीति पर क्या निर्णय होगा? अनुपातिक शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने पर कोई रोडमैप है या नहीं?”विपक्ष का मानना है कि यह बैठक यह निर्धारित करेगी कि नीतीश सरकार किस दिशा में आगे बढ़ने वाली है—

विकास और सुशासन की ओर या एक बार फिर राजनीतिक संतुलन साधने की ओर।विश्लेषण: नीतीश का बड़ा संदेश—स्थिरता और तेजी का संकेत राजनीतिक पंडितों का मानना है कि प्रोटेम स्पीकर के रूप में वरिष्ठ विधायक यादव की नियुक्ति,मंत्रियों द्वारा तेज़ी से कार्यभार ग्रहण,और पहली कैबिनेट बैठक का त्वरित आयोजन,यह संकेत है कि नीतीश कुमार सरकार “स्थिरता और प्रशासनिक गति” का संदेश देना चाहती है।आज की कैबिनेट बैठक में लिए जाने वाले फैसले न सिर्फ सरकार की दिशा तय करेंगे, बल्कि एनडीए गठबंधन की आपसी समझ और समन्वय का भी संकेत देंगे।

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