पहले पकौड़ा, अब रील बनाने की सलाह!” — पीएम मोदी पर भाकपा माले नेता दीपांकर भट्टाचार्य का तंज, अरवल की सभाओं में बोले — बिहार के बेरोजगारों का मज़ाक उड़ा रहे हैं प्रधानमंत्री, अडानी को मुफ्त जमीन देने पर सवाल

बी के झा

अरवल, ( बिहार ) 5 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की सरगर्मी के बीच बुधवार को भाकपा (माले) के महासचिव और इंडिया गठबंधन के प्रमुख नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि “मोदी जी पहले बेरोजगार युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह दे रहे थे, अब उन्हें रील बनाने का नुस्खा बता रहे हैं। यह देश के बेरोजगारों के साथ मज़ाक है।”दीपांकर बुधवार को अरवल जिले के कलेर, उसरी और तेलपा में आयोजित जनसभाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जनता से अपील की कि वे “इंडिया गठबंधन के माले प्रत्याशी महानंद सिंह को भारी मतों से जिताएं ताकि बिहार में बदलाव की नई शुरुआत हो।”

“नौकरी की बात करो तो कहते हैं पैसा कहां से लाओगे”भट्टाचार्य ने कहा कि जब विपक्ष हर परिवार को एक पक्की नौकरी देने और भूमिहीनों के लिए आवास की जमीन की बात करता है, तब भाजपा नेता कहते हैं — “

पैसा कहां से लाओगे, जमीन कहां से लाओगे?”

उन्होंने तीखे स्वर में सवाल किया — “

लेकिन जब अडानी को अरबों की जमीन और संसाधन मुफ्त देने की बात आती है, तब जमीन भी मिल जाती है और पैसा भी!”उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि “पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने जिस 60,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है, उस पर पीएम और मुख्यमंत्री दोनों चुप क्यों हैं?”“

दिल्ली में बिहारियों से वोट लेकर अब उन्हें भगाया जा रहा है”भट्टाचार्य ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (एनडीए की नेता) पर भी निशाना साधते हुए कहा —“उ

न्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले प्रवासी बिहारी मजदूरों से ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ का वादा किया था। आज वही लोग उन्हें दिल्ली से बाहर निकालने में लगे हैं।”

उन्होंने जोड़ा कि “मोदी जी ने कहा था कि 2022 तक कोई गरीब बेघर नहीं रहेगा — अब उनसे पूछना चाहिए कि उनके वादे और नारे कहां गए?”“

विकास के नाम पर 20 साल का हिसाब नहीं, सिर्फ सब्जबाग”माले महासचिव ने एनडीए पर हमला जारी रखते हुए कहा कि “पटना में 20 साल से और दिल्ली में सालों से एनडीए की सरकार है, लेकिन वे आज भी 20 साल पुराने ‘जंगलराज’ की बात करते हैं या 20 साल आगे के ‘विकसित बिहार’ का सपना दिखाते हैं।”

उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि “बिहार में बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और कर्ज का बोझ बढ़ा है, शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है, और भ्रष्टाचार चरम पर है।“महिलाएं अब जाग चुकी हैं, 10 हजार में वोट नहीं बिकेगा”

भट्टाचार्य ने एनडीए पर मतदाताओं को लुभाने का आरोप लगाते हुए कहा कि “अगर भाजपा-जदयू वाले सोचते हैं कि महिलाओं को 10 हजार रुपये देकर वोट ठग लेंगे, तो वे गलतफहमी में हैं। बिहार की महिलाएं अब ‘दस हजार नहीं, कर्जमुक्ति चाहिए’ का नारा लगा रही हैं।”

उन्होंने कहा कि “बिहार न बिका है, न बिकेगा — लड़ा है, लड़ेगा और जीतेगा।”“संविधान पर हमला था एसआईआर”दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिया गया मताधिकार देश के हर नागरिक की ताकत है। उन्होंने कहा, “एसआईआर (नागरिकता संशोधन कानून) उसी मताधिकार पर हमला था। हम इसके खिलाफ लड़े और आगे भी लड़ेंगे।”

उन्होंने ललन सिंह और सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया कि वे खुलेआम गरीबों को वोट डालने से रोकने की बातें कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

“चुनाव आयोग पर भरोसा करना मुश्किल”माले महासचिव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “जब कुछ मुख्यमंत्री और मंत्री खुद चुनावी भाषणों में धर्म के नाम पर लोगों को बांट रहे हों, तो आयोग की चुप्पी चिंता का विषय है।”उन्होंने कहा कि बिहार के लोग राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और इस बार “झांसे और फरेब की राजनीति को करारा जवाब देंगे।”

विश्लेषण

दीपांकर भट्टाचार्य का यह बयान बिहार के चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे रहा है। एक ओर जहां भाजपा और एनडीए ‘विकास और स्थिरता’ का नारा दे रहे हैं, वहीं विपक्ष ‘रोजगार, शिक्षा और भ्रष्टाचार’ के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है।भट्टाचार्य का यह तंज— “पहले पकौड़ा,

अब रील बनाओ” — युवा मतदाताओं में गूंज सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।

NSK

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *