बी के झा
NSK

बेगूसराय , बिहार, 2 नवंबर
राजनीति की सजी-संवरी सड़कों से निकलकर अगर कोई नेता मिट्टी और पानी में उतर जाए, तो तस्वीर खुद-ब-खुद “राजनीति से परे” हो जाती है। रविवार को ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जब कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बेगूसराय के एक तालाब में उतरकर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के साथ मछलियां पकड़ने लगे।सभा खत्म होते ही राहुल गांधी न तो एसी गाड़ी में बैठे,
न मंच पर रुककर सेल्फी दी — बल्कि स्थानीय युवाओं के आग्रह पर पोखर तक पैदल पहुंचे, जूते उतारे और सीधे तालाब में उतर गए। उनके साथ मुकेश सहनी, एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया कुमार और कई स्थानीय युवक भी मौजूद थे।
मछुआरों के बीच ‘राहुल भैया ’तालाब किनारे मौजूद ग्रामीणों के लिए यह किसी सपने जैसा पल था। राहुल गांधी को अपने बीच देखकर भीड़ “राहुल भैया जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठी।कांग्रेस नेता ने न केवल मछली पकड़ी बल्कि नाव पर बैठकर नौकायन का आनंद भी लिया। करीब 40 मिनट तक वे मछुआरों के साथ समय बिताते रहे, उनके कामकाज, समस्याएं और संघर्षों को ध्यान से सुना।
वीडियो में बोले राहुल – “मछुआरे बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं”राहुल गांधी ने इस अनुभव का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा,बेगूसराय में आज VIP पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी जी के साथ मछुआरा समुदाय से मिलकर बहुत अच्छा लगा।उनका काम जितना दिलचस्प है, उतनी ही गंभीर हैं उनकी समस्याएं।बिहार की नदियां, नहरें, तालाब और उनमें जीवन बसाने वाले मछुआरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए मैं हमेशा उनके साथ हूं।”राजनीति में ‘सहजता’ का नया अध्यायराहुल गांधी का यह “पोखर डिप्लोमेसी” वाला अंदाज इस बार केवल प्रतीकात्मक नहीं था।यह उस नई छवि की झलक थी जिसमें वे ‘जनता से दूरी वाले नेता’ की परिभाषा तोड़ना चाहते हैं।मिट्टी, पानी और लोगों से सीधा संवाद—यही उनकी राजनीति की नई भाषा बनती दिख रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी की यह सादगीपूर्ण छवि बेगूसराय की कांग्रेस प्रत्याशी अमिता भूषण के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकती है।
गिरिराज सिंह का तंज – “राहुल बाबा को पिकनिक से फुर्सत नहीं”बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के इस कदम पर चुटकी ली।
उन्होंने कहा,चुनाव प्रचार के बीच भी राहुल बाबा पिकनिक से बाज नहीं आते।अब डर है कि पोखर में कूदने से कहीं उन्हें ज़ुकाम न हो जाए।गिरिराज के इस बयान पर कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि,जो नेता जनता के बीच उतरने की हिम्मत रखता है, वही जनता का दिल जीतता है।लोकप्रियता में उछाल,
स्थानीयों ने कहा – ‘नेता ऐसा हो जो हमारे बीच उतरे’राहुल गांधी के इस सरल और मिलनसार रूप को देखकर ग्रामीणों में उत्साह दोगुना था।एक मछुआरे ने कहा,हमारे तालाब में कोई नेता कभी नहीं आया। राहुल गांधी हमारे साथ मछली पकड़े, ये तो हम सपना भी नहीं सोच सकते थे।”महिलाएं और बच्चे तालाब किनारे से उन्हें मोबाइल कैमरे में कैद करते रहे।
उनका यह व्यवहार, भीड़ से नज़दीकी और सहज हंसी—
सबने उस पल को यादगार बना दिया।
राजनीतिक संदेश – ‘जनता का दिल जीतने का नया रास्ता’बिहार की राजनीति में जब जाति और समीकरणों की बात होती है, तब राहुल गांधी का यह मानवीय चेहरा उस रेखा को धुंधला करता दिखाई दे रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह “जनसंवाद का नया मॉडल” है, जो सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि “स्पर्श और सहभागिता” से जनता तक पहुंचता है।
राहुल की रैली में मोदी-अडानी-ट्रंप पर भी प्रहारसभा में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा,56 इंच की छाती का दावा करने वाले मोदी अमेरिकी दबाव में झुक जाते हैं।अडानी-अंबानी जैसे उद्योगपतियों के इशारे पर देश की नीतियां बन रही हैं।
”उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उदाहरण देते हुए कहा कि “डोनाल्ड ट्रंप के एक फोन पर मोदी ने कार्रवाई रोक दी थी।सियासी नतीजा क्या होगा?अब बेगूसराय में चर्चा सिर्फ अमिता भूषण बनाम बीजेपी प्रत्याशी की नहीं, बल्कि ‘पोखर वाली रैली’ की हो रही है।
लोग कह रहे हैं –मछलियां चाहे हाथ न लगी हों, लेकिन राहुल गांधी ने लोगों का दिल ज़रूर पकड़ लिया।
विश्लेषण:
बिहार की सियासत में जो नेता पोखर में उतर जाए, वही जनता के मन में उतरता है।राहुल गांधी का यह सहज, भावनात्मक और प्रतीकात्मक कदम उस राजनीति की याद दिलाता है,जिसमें जनता के साथ रहना ही सबसे बड़ा प्रचार होता है।
