“प्रशांत किशोर नेता नहीं, कंसल्टेंट हैं” — तेजस्वी यादव का तीखा प्रहार; बोले, “राजनीति नहीं, रोजगार चाहिए बिहार को”

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 28 अक्टूबर

बिहार की चुनावी राजनीति इन दिनों बयानबाजी और वैचारिक टकराव के दौर से गुजर रही है। महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे तेजस्वी यादव ने अपने एक साक्षात्कार में रोजगार, विकास मॉडल, और विपक्षी रणनीतियों पर खुलकर बात की।

इसी दौरान उन्होंने जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर पर भी सीधा हमला बोला और कहा —वो नेता नहीं, कंसल्टेंट हैं। जनता के बीच कभी नहीं रहे। असली राजनीति जमीनी जुड़ाव से बनती है, मीडिया साउंडबाइट्स से नहीं।”

तेजस्वी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में जन सुराज और महागठबंधन दोनों ही जनता के बीच रोजगार और बदलाव की राजनीति का दावा कर रहे हैं।

“राजनीति नहीं, रोजगार चाहिए बिहार को” — तेजस्वी का विज़न स्पष्टइंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने इंटरव्यू में तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार की असली जरूरत सत्ता परिवर्तन नहीं, रोजगार क्रांति है।

उन्होंने कहा —हम रोजगार को खर्च नहीं, निवेश मानते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में जान आएगी और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में गुणात्मक सुधार होगा।तेजस्वी ने यह भी दोहराया कि 2020 के चुनाव में किए गए 10 लाख नौकरियों के वादे को जनता ने न केवल स्वीकार किया, बल्कि जब वे डिप्टी सीएम बने, तब 5 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार भी दिया गया।“रेवड़ी नहीं, गरिमा” —

विपक्ष के आरोपों पर पलटवार

एनडीए द्वारा महागठबंधन की घोषणाओं को “मुफ्तखोरी” कहने पर तेजस्वी ने पलटवार करते हुए कहा —लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी करना ‘रेवड़ी बांटना’ नहीं, मानव गरिमा का हिस्सा है। जब तक रोजगार और ढांचा नहीं बनता, तब तक राहत देना जरूरी है।

उन्होंने बीजेपी-जेडीयू के महिला मतदाताओं को लुभाने वाले वादों पर भी कटाक्ष किया —हमने ‘माई, बहन, मान योजना’ के तहत हर महिला को ₹2,500 प्रति माह देने का प्रस्ताव रखा है। यह दिखावा नहीं, स्थायी राहत है।

महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देना ही असली सशक्तिकरण है।”प्रशांत किशोर पर निशाना: “नेता जनता से बनते हैं, पॉवरपॉइंट से नहीं”प्रशांत किशोर को लेकर तेजस्वी यादव के स्वर तल्ख थे।

उन्होंने कहा —किशोर जी नेता नहीं, कंसल्टेंट हैं। उन्होंने कभी चुनाव जीता नहीं, सिर्फ दूसरों को सलाह दी। असली राजनीति का अर्थ है जनता के बीच रहना, उनकी धूल, पसीने और तकलीफ को समझना — न कि होटल की मीटिंगों में बिहार का खाका खींचना।”

यह बयान उस वक्त आया है जब प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी कई सीटों पर उम्मीदवार उतारकर तीसरे मोर्चे की चुनौती पेश कर रही है।

तेज प्रताप के खिलाफ उम्मीदवार उतारने पर बोले — “लोकतंत्र में विकल्प जरूरी”अपने ही बड़े भाई तेज प्रताप यादव के खिलाफ उम्मीदवार उतारने को लेकर पूछे गए सवाल पर तेजस्वी ने संयमित जवाब दिया —लोकतंत्र की खूबसूरती ही विविधता है। हर व्यक्ति को अपनी राय और चुनाव लड़ने का अधिकार है।

अगर कोई मेरे भाई के खिलाफ भी खड़ा होता है, तो यह लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है।राजनीतिक हलकों में इस बयान को तेजस्वी की परिपक्वता और आत्मविश्वास का संकेत माना जा रहा है।

“डिग्री नहीं, नीयत और काम जरूरी”अपनी शिक्षा और पृष्ठभूमि पर उठने वाले सवालों पर तेजस्वी ने सहजता से जवाब दिया —मैंने क्रिकेट के लिए पढ़ाई छोड़ी थी, लेकिन राजनीति में आने के बाद निरंतर सीखता रहा हूं। इस क्षेत्र में डिग्री नहीं, समझ और नीयत सबसे बड़ी योग्यता है।”उन्होंने कहा कि “राजनीति में वही सफल है जो जनता के साथ सीखता और बढ़ता है।”

राजनीतिक विश्लेषण: “

तेजस्वी की परिपक्व होती राजनीति”

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस इंटरव्यू से तेजस्वी यादव का नया रूप सामने आया है — एक आक्रामक नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी और नीतिगत नेता का।

एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा —तेजस्वी अब सिर्फ लालू यादव के बेटे नहीं, बल्कि अपनी पहचान खुद गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशांत किशोर पर उनका हमला राजनीतिक तौर पर रणनीतिक है — क्योंकि वही युवा वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश में हैं।”

निष्कर्ष:

तेजस्वी यादव ने अपने इस साक्षात्कार के ज़रिए स्पष्ट संदेश दिया है — “हमारी राजनीति वादों पर नहीं, रोजगार और सम्मान पर टिकी है।”उनके बयान से साफ है कि इस बार की जंग केवल सत्ता की नहीं, बल्कि नए बिहार के विज़न की है।

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